समुद्र मंथन की कहानी
महर्षि उग्रश्रवा जी जब शौनक आदि ऋषियों को महाभारत की कथा सुना रहे थे तभी अचानक समुद्र मंथन का प्रसंग उठा | उन्होने उस दैवीय घटना का वहां ज़िक्र करते हुए कहा कि “शौनकादि ऋषियो ! मेरु नामका एक पर्वत …
महर्षि उग्रश्रवा जी जब शौनक आदि ऋषियों को महाभारत की कथा सुना रहे थे तभी अचानक समुद्र मंथन का प्रसंग उठा | उन्होने उस दैवीय घटना का वहां ज़िक्र करते हुए कहा कि “शौनकादि ऋषियो ! मेरु नामका एक पर्वत …
जब ऋषि उग्रश्रवा वहां बैठे ऋषियों को महभारत की कथा सुना रहे थे उसी समय उन्होंने उस घटना का वर्णन किया जब परीक्षित पुत्र जन्मेजय समूची नागजाति पर क्रुद्ध हो गए और उन्होंने पूरी सर्पजाति के विनाश का संकल्प ले …
महर्षि लोमहर्षण के पुत्र उग्रश्रवा सूतवंश के एक श्रेष्ठ पौराणिक कथा वाचक थे। एक बार जब नैमिषारण्य क्षेत्र में कुलपति शौनक अपने बारह वर्ष का सत्संग-सत्र कर रहे थे, तभी उग्रश्रवा बड़ी विनम्रता के साथ सुखासन पर बैठे हुए व्रतनिष्ठ …
यह सत्ययुग की बात है | अत्यन्त प्राचीनकाल में ‘स्यूमरश्मि’ नाम के एक ऋषि हुआ करते थे | वो दिव्य तेज़ के स्वामी थे लेकिन एक बार उन्हें परम प्रभु परमेश्वर के सम्बन्ध में अनेक महान कौतूहल उत्पन्न हुए | …
ध्रुव के माता और पिता का क्या नाम था ब्रह्मा जी के पुत्र स्वायम्भुव मनु और शतरूपा के अत्यन्त प्रतापी पुत्र उत्तानपाद की दो पत्नियाँ थीं । उनमें से उनकी छोटी पत्नी सुरूचि पर महाराज का अत्यधिक प्रेम था । …
इतिहास की गहराइयों में, समय की पर्त-दर-पर्त धूल जब छँटती है तो कभी-कभी ऐसी नायाब चीज सामने आती है कि उस समय हम आवाक रह जाते हैं | कितने ही ऐसे तथ्य और घटनायें आज भी समय की रेत में …
मामला उतना संगीन दिख नहीं रहा था जितना वास्तव में वो था | लेकिन होनी को जब-जब, जैसे-जैसे घटना होता है, वैसा हो कर ही रहता है | बहुत लोगों को यह बात थोड़ी देर से समझ आती है | …
आज के आधुनिक वैज्ञानिक एवं पुरातत्वविद, प्राचीन काल की जिन शानदार संरचनाओं को नहीं समझ पाते, उन्हें वे प्राचीन विश्व के आश्चर्यों में से एक गिनते हैं | ये बिलकुल उसी तरह का धोखा है कि यदि आप किसी परीक्षा …
जिस प्रकार से प्रत्येक मन्वन्तर के प्रत्येक द्वापर युग में भगवान नारायण स्वयं वेदव्यास के रूप में अवतार लेकर मनुष्यों के हित के लिये वेदों और पौराणिक ग्रंथों का विभाजन करते हैं, उसी प्रकार भगवान सदाशिव प्रत्येक मन्वन्तर के प्रत्येक …
इस सृष्टि में जो परमानन्दमय हैं, जिनकी लीलाएं अनंत हैं, जो ईश्वरों के भी ईश्वर, सर्व व्यापक, महान गौरी के प्रियतम तथा कार्तिकेय और विघ्नहर्ता गणेश जी को उत्पन्न करने वाले हैं, उन आदि देव शंकर की मैं वंदना करता …