भगवान शिव के अटठाईस योगेश्वर और महाकाल आदि दस अवतार क्या हैं


भगवान शिव के अटठाईस योगेश्वर और महाकाल आदि दस अवतार क्या हैंजिस प्रकार से प्रत्येक मन्वन्तर के प्रत्येक द्वापर युग में भगवान नारायण स्वयं वेदव्यास के रूप में अवतार लेकर मनुष्यों के हित के लिये वेदों और पौराणिक ग्रंथों का विभाजन करते हैं, उसी प्रकार भगवान सदाशिव प्रत्येक मन्वन्तर के प्रत्येक कलि युग में योगेश्वर अवतार के रूप में अवतार लेते हैं । ये अवतार कलि युग के मनुष्यों को ध्यान योग की शिक्षा देने के लिये होते हैं |

क्योंकि उस समय मनुष्य ध्यान के अतिरिक्त दान, धर्म आदि कर्म हेतुक साधनों द्वारा उन भगवान सदाशिव का दर्शन (या आत्मसाक्षात्कार) नहीं पा सकता । प्रत्येक योगेश्वर अवतार के साथ उनके चार अविनाशी शिष्य भी होते हैं, जो महान शिव भक्त और योग मार्ग की वृद्धि करने वाले होते हैं । इनके शरीरों पर भस्म रमी रहती है, ललाट त्रिपुण्ड्र से सुशोभित रहता है, रूद्राक्ष की माला ही उनका आभूषण होता है ।

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ये सभी शिष्य धर्मपरायण, वेद-वेदांग के पारगामी विद्वान और लिंगार्चन में तत्पर रहने वाले होते हैं । ये शिव जी में भक्ति रख कर योगपूर्वक ध्यान में निष्ठा रखते हैं ।

वाराह कल्प के सातवें मन्वन्तर में भगवान शिव द्वारा लिये गये अटठाईस योगेश्वर अवतारों और उनके शिष्यों की नामवाली इस प्रकार है-

अटठाईस योगेश्वर

परब्रह्म परमात्मा भगवान सदाशिव और उनकी शक्ति भगवती शिवा ने भक्तों के कल्याण और उनको भोग-मोक्ष प्रदान करने के लिये दस अवतार धारण किये हैं । यद्यपि भगवान शिव तथा भगवती शिवा अभिन्न हैं, परंतु भक्तों की मनोवांछापूर्ति के लिये वे अवतार ग्रहण करते हैं ।

जिस रूप में भगवान शिव का प्राकट्य होता है, उसी रूप से उनकी शक्ति भगवती शक्ति शिवा भी प्रकट होती हैं । तंत्र-ग्रंथों में तथा पुराणों में भगवती के काली, तारा आदि दस महाविद्या रूपों में वर्णन आया है, उसी प्रकार भगवान शिव के भी महाकाल आदि दस रूप हैं । शिव पुराण में प्राप्त इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-

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भगवान सदाशिव का पहला और सनातन अवतार ‘महाकाल’ है, इस अवतार की शक्ति ‘महाकाली’ हैं । दूसरा ‘तार’ नामक अवतार हुआ, जिनकी शक्ति ‘तारादेवी’ हैं । ‘बाल भुवनेश’ नामक भगवान का तीसरा अवतार हुआ, जिनकी शक्ति ‘बाला भुवनेशी’ हुई । चौथा अवतार ‘षोडश श्रीविद्येश’ हुआ, जिनकी शक्ति ‘षोडशी श्रीविद्या’ हुई ।

भगवान शिव का पांचवा अवतार ‘भैरव’ नाम से प्रसिद्ध हुआ, इस अवतार की शक्ति का नाम ‘भैरवी गिरिजा’ है । छठा शिव अवतार ‘छिन्न मस्तक’ नाम से जाना जाता है, इनकी शक्ति ‘छिन्नमस्ता’ हैं ।

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सम्पूर्ण मनोरथों के दाता शम्भु का सातवां अवतार ‘धूमवान’ नाम से विख्यात हुआ, उनकी शक्ति ‘धूमावती’ हैं । शिव जी का आठवां अवतार ‘बगलामुख’ है, उनकी शक्ति ‘बगलामुखी’ नाम से विख्यात हुई । नवां शिव अवतार ‘मातन्ग’ नाम से प्रसिद्ध है, इनकी शक्ति ‘मातंगी’ हैं |

भगवान शिव के दसवें अवतार का नाम ‘कमल’ है, इनकी शक्ति ‘कमला’ हैं । शिव जी के ये दसों अवतार भक्तों तथा सत्पुरूषों के लिये सुखदायक तथा भोग-मोक्ष को देने वाले हैं।

 





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