क्या महभारत की कथाओं में अनसुलझी पहेलियाँ हैं जिन्हे सुलझाना सामान्य मनुष्य के वश की बात नहीं
महर्षि लोमहर्षण के पुत्र उग्रश्रवा सूतवंश के एक श्रेष्ठ पौराणिक कथा वाचक थे। एक बार जब नैमिषारण्य क्षेत्र में कुलपति शौनक अपने बारह वर्ष का सत्संग-सत्र कर रहे थे, तभी उग्रश्रवा बड़ी विनम्रता के साथ सुखासन पर बैठे हुए व्रतनिष्ठ …