पंचतन्त्र की कहानियाँ-एकता में सदैव बल है
कबूतरों का एक दल भोजन की खोज में उड़ता चला जा रहा था, परंतु दूर जाने पर भी कहीं उन्हें कुछ भोजन दिखाई नहीं पड़ा | कबूतर उड़ते-उड़ते थक गए थे, फिर भी भोजन की आशा में उड़ते रहे। आखिर …
कबूतरों का एक दल भोजन की खोज में उड़ता चला जा रहा था, परंतु दूर जाने पर भी कहीं उन्हें कुछ भोजन दिखाई नहीं पड़ा | कबूतर उड़ते-उड़ते थक गए थे, फिर भी भोजन की आशा में उड़ते रहे। आखिर …
समूची पृथ्वी के एक तत्व में विलीन हो जाने पर, अपनी विद्या शक्ति से सम्पन्न भगवान् विष्णु योग निद्रा का आश्रय लेकर शेषनाग पर शयन कर रहे थे । शयन समाप्त होने पर प्रभु की नाभि से सहस्र दलों वाला …
“निरन्तर सांसारिक विषय-भोगों की अभिलाषा करने के कारण अपने वास्तविक श्रेय से चिरकाल तक बेसुध हुई जीवात्माओं को जिन्होंने करूणावश निर्भय आत्मलोक का उपदेश दिया और जो स्वयं निरन्तर अनुभव होने वाले आत्मस्वरूप् की प्राप्ति से सब प्रकार की तृष्णाओं …
एक तालाब में एक कछुआ रहता था । कछुए को अधिक बात करने की आदत थी । वह जब तक किसी से बात नहीं कर लेता था, उसके मन को शांति नहीं मिलती थी । वह जब बात करने लगता, …
जब महर्षि उग्रश्रवा, शौनक आदि ऋषियों को महाभारत की कथा सुना रहे थे तो उसी समय सर्प जाति और भगवान् विष्णु के वाहन गरुण जी की उत्पत्ति का वर्णन शुरू हुआ | उग्रश्रवा जी से प्रसन्न हो कर महर्षि शौनक …
पौराणिक ग्रंथों में ईश्वर के धन्वन्तरी अवतार के विषय में आया है “असुरों के द्वारा पीड़ित होने से जो दुर्बल हो रहे थे, उन देवताओं को अमृत पिलाने की इच्छा से ही भगवान् धन्वतरि-समुद्र-मंथन से प्रकट हुए थे । वे …
इस जगत में जो अज्ञान रुपी अन्धकार को दूर कर हृदय में ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं, उन्हें ‘गुरू’ कहते हैं । ‘गरति अज्ञानम्’ अथवा ‘गृणाति ज्ञानम्, स गुरूः’ ऐसी ‘गुरू’ शब्द की व्यूत्पत्ति है । जीवों का अज्ञान मिटाने …
यज्ञ क्या हैं ? यह बात अगर आप आज किसी, हिन्दू धर्म को मानने वाले सामान्य व्यक्ति से पूछेंगे तो वो इसे एक धार्मिक अनुष्ठान बतायेगा और शायद यह भी कि इसे करने से वातावरण में शुद्धता और पवित्रता बढ़ती …
प्राचीन काल में किसी समय एक महान ऋषि हुआ करते थे आयोदधौम्य | महर्षि आयोदधौम्य के एक प्रिय शिष्य का नाम था उपमन्यु । एक दिन आचार्य ने उसकी परीक्षा लेने की सोची | आचार्य ने उसे यह कहकर भेजा …
महाभारत में एक कथा आती है आरुणि की | किसी समय की बात है भारतवर्ष में एक महान ऋषि हुआ करते थे आयोदधौम्य | महर्षि आयोदधौम्य ब्रह्मज्ञानी थे | अपने जिस शिष्य पर प्रसन्न होते थे उस पर अपने स्पर्श …