जब विक्रमादित्य ने अपने राज्य के निर्धन ब्राहमण तथा भाट को पुत्रियों के विवाह के लिए राजकीय सहायता देने में न्याय किया

जब विक्रमादित्य ने अपने राज्य के निर्धन ब्राहमण तथा भाट को पुत्रियों के विवाह के लिए राजकीय सहायता देने में न्याय किया

खुदायी में प्राप्त सम्राट विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की पचीसवी पुतली त्रिनेत्री ने राजा भोज को एक बार फिर रोक दिया | सिंहासन प्राप्त करने से पहले उसने उन्हें विक्रमादित्य की एक कथा सुनाई | उसने कहा ‘राजा विक्रमादित्य अपनी प्रजा …

Read more

विक्रमादित्य ने, चरित्रहीन स्त्री के प्रेम में पड़े हुए युवक को विनाश की ओर अग्रसर होने से बचा लिया

चरित्रहीन स्त्री

स्वर्ण सिंहासन की चौबीसवीं पुतली करुणावती ने राजा भोज को एक करुण कथा सुनायी | उसने कथा सुनाना प्रारंभ किया | राजा विक्रमादित्य का सारा समय ही अपनी प्रजा के दुखों का निवारण करने में बीतता था । प्रजा की …

Read more

विक्रमादित्य ने इस विवाद का समाधान किया कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से

विक्रमादित्य ने इस विवाद का समाधान किया कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से

सिंघासन बत्तीसी की तेईसवी पुतली धर्मवती ने राजा भोज को, विक्रमादित्य की कथा सुनाना प्रारम्भ किया | एक बार राजा विक्रमादित्य अपनी राजसभा में बैठे हुए थे और सभागणों से बातचीत कर रहे थे । बातचीत के उसी क्रम में …

Read more

राजा विक्रमादित्य के भरे दरबार में, एक बुद्धिमान और विद्वान युवक ने नर्तकी के उच्च स्तर के नृत्य की मुक्त कंठ से प्रशंसा की तथा उसे पुरस्कार दिया

राजा विक्रमादित्य के भरे दरबार में, एक बुद्धिमान और विद्वान युवक ने नर्तकी के उच्च स्तर के नृत्य

स्वर्ण सिंहासन की बाईसवीं पुतली अनुरोधवती ने राजा भोज को बताया कि राजा विक्रमादित्य अद्भुत गुणग्राही थे । वे वास्तविक कलाकारों का बहुत अधिक सम्मान करते थे तथा स्पष्टवादिता पसंद करते थे । उनके दरबार में योग्यता का सम्मान किया …

Read more

जब विक्रमादित्य की परोपकार की भावना से प्रसन्न हो कर चन्द्रदेव ने उन्हें अमृत दिया

जब विक्रमादित्य की परोपकार की भावना से प्रसन्न हो कर चन्द्रदेव ने उन्हें अमृत दिया

इक्कीसवें दिन राजा भोज को, स्वर्ण सिंहासन की इक्कीसवीं पुतली चन्द्रज्योति ने रोका | उसने राजा भोज को सम्राट विक्रमादित्य के जीवन का रोचक प्रसंग बताया | उसने कहा “एक बार राजा विक्रमादित्य एक यज्ञ करने की तैयारी कर रहे …

Read more

राजा विक्रमादित्य ने जब ज्योतिषी के धैर्य को परखने के लिए लकड़हारे का रूप धरा

lakadhara

स्वर्ण सिंहासन की बीसवीं पुतली ज्ञानवती ने राजा भोज को बताया कि राजा विक्रमादित्य सच्चे ज्ञान के बहुत बड़े पारखी थे तथा ज्ञानियों का अत्यधिक सम्मान करते थे । उन्होंने अपने राज दरबार में चुन-चुन कर विद्वानों, पंडितों, लेखकों और …

Read more

जब राजा विक्रमादित्य ने पाताल लोक की यात्रा की तथा वहाँ के राजा शेषनाग से मुलाकात की

जब राजा विक्रमादित्य ने पाताल लोक की यात्रा की तथा वहाँ के राजा शेषनाग से मुलाकात की

राजा भोज से स्वर्ण सिंहासन की सोलहवीं पुतली, सत्यवती ने जो विक्रमादित्य की कथा कही वह इस प्रकार थी | राजा विक्रमादित्य के शासन काल में उज्जैन नगरी का यश चारों ओर फैला हुआ था। एक से बढ़कर एक विद्वान …

Read more

जब विक्रमादित्य के यान्त्रिक रथ हवा में उड़े और उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया

जब विक्रमादित्य के यान्त्रिक रथ हवा में उड़े और उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया

स्वर्ण सिंहासन की पंद्रहवीं पुतली सुन्दरवती, अपने नाम के अनुरूप ही अत्यंत सुंदरी थी | राजा भोज समेत समस्त दरबारी गण उसे अपलक देख रहे थे जब वह उन्हें विक्रमादित्य के बारे में बता रही थी | उसने कथा आरम्भ …

Read more

विक्रमादित्य के राज्य में सुदूर देशों से विद्वान तथा प्रतिभावन, सम्मान तथा पारितोषिक पाने आते थे

विक्रमादित्य के राज्य में सुदूर देशों से विद्वान तथा प्रतिभावन, सम्मान तथा पारितोषिक पाने आते थे

राजा विक्रमादित्य कला तथा प्रतिभा का बहुत सम्मान करते थे | उनकी गुणग्राहिता का कोई जवाब नहीं था । वे विद्वानों तथा कलाकारों को बहुत सम्मान देते थे । इसके परिणाम स्वरूप उनके दरबार में एक से बढ़कर एक विद्वान …

Read more

विक्रमादित्य ने सुलझायी पहेली, मन बड़ा या ज्ञान

vikramaditya

विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन से निकली उन्नीसवीं पुतली, रूपरेखा ने, राजा भोज को, विक्रमादित्य की महानता का वर्णन करते हुए उन्नीसवीं कहानी सुनायी | उसने बताना आरम्भ किया | राजा विक्रमादित्य के व्यवहारिक ज्ञान, बुद्धि और न्याय की ऐसी धाक …

Read more