भगवान् नरसिंह के अवतार, भक्त प्रह्लाद एवं हिरण्यकशिपु के वध की कहानी

bhakt prahlad

बहुत पुरानी बात है, उस समय सत्य युग चल रहा था | एक बार भगवन ब्रह्मा के मानस-पुत्र सनकादि, जिनकी आयु हमेशा पंचवर्षीय बालक की-सी ही रहती है, वैकुण्ठ लोक में जा पहुँचे । वे भगवान् विष्णु के पास जाना …

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धरती के प्रथम सम्राट पृथु कौन थे, वो और उनकी पत्नी अर्चि की उत्पत्ति कैसे हुई थी, क्या उन्ही के नाम पर धरती का नाम पृथ्वी पड़ा

सम्राट पृथु द्वारा पृथ्वी को आतंकित करना

ब्रह्माण्ड के प्रथम मनु यानि स्वायम्भुव मनु के वंश में अंग नामक प्रजापति का विवाह मृत्यु की मानसिक पुत्री सुनीथा के साथ हुआ । उन दोनों पति-पत्नी को वेन नामक पुत्र हुआ । वेन अपने मातामह यानी नाना के स्वभाव …

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विक्रम बेताल की कहानियाँ

विक्रम बेताल की कहानियाँ

विक्रम बेताल की कथा बहुत पुरानी है । एक समय धारा नगरी में गंधर्वसेन नाम के एक राजा राज करते थे । उनकी चार रानियाँ थीं । उन चार रानियों से उनके छ: लड़के थे जो सब-के-सब बड़े ही चतुर …

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विक्रम बेताल की कहानियां, स्त्री को अपमानित करने का पाप किसको लगा

विक्रम बेताल की कहानियां, स्त्री को अपमानित करने का पाप किसको लगा

मार्ग में कथा सुनाने के लिए विक्रम की अनुमति मिलने के बाद बेताल ने कथा सुनाना प्रारंभ किया | किसी समय काशी में प्रतापमुकुट नाम का राजा राज्य करता था । उसके वज्रमुकुट नाम का एक बेटा था । एक …

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राजा विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन का क्या हुआ, सिंहासन बत्तीसी की अंतिम कथा

सिंहासन बत्तीसी की

सिंहासन बत्तीसी के स्वर्ण सिंहासन की अंतिम पुतली थी रानी रूपवती राजा विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की अंतिम यानी बत्तीसवीं पुतली का नाम था रानी रूपवती | बत्तीसवें दिन जब रानी रूपवती ने राजा भोज को स्वर्ण सिंहासन पर बैठने …

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राजा विक्रमादित्य की मृत्यु कैसे हुई, उनकी मृत्यु के बाद उनके स्वर्ण सिंहासन का क्या हुआ, क्या वह आज भी धरती के अन्दर दबा हुआ है

राजा विक्रमादित्य की मृत्यु कैसे हुई, उनकी मृत्यु के बाद उनके स्वर्ण सिंहासन का क्या हुआ

इकत्तिस्वें दिन राजा भोज जब स्वर्ण सिंहासन की तरफ बढ़े तो उनके क़दमों को इकत्तीसवीं पुतली कौशल्या ने रोक लिया | फिर उसने राजा विक्रमादित्य की जो कथा उन्हें सुनायी वो इस प्रकार थी ‘राजा विक्रमादित्य अब वृद्ध हो गए …

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जब विक्रमादित्य ने राजकुमार को उसका राज्य वापस दिलाने के लिए शत्रुओं से पैशाचिक युद्ध किया

जब विक्रमादित्य ने राजकुमार को उसका राज्य वापस दिलाने के लिए शत्रुओं से पैशाचिक युद्ध किया

जयलक्ष्मी तीसवीं पुतली थी जिसने राजा भोज का रास्ता रोका था | जयलक्ष्मी ने राजा भोज को, सम्राट विक्रमादित्य की जो कथा सुनायी वह इस प्रकार थी |’राजा विक्रमादित्य जितने बड़े राजा थे उतने ही बड़े तपस्वी भी थे । …

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राजा विक्रमादित्य की बहन के विवाह की कथा

राजा विक्रमादित्य की बहन के विवाह की कथा

सिंहासन बत्तीसी की उन्तीसवीं पुतली मानवती ने राजा भोज को बताया कि राजा विक्रमादित्य वेश बदलकर रात में, अपने राज्य में, घूमा करते थे । ऐसे ही एक दिन घूमते-घूमते नदी के किनारे पहुँच गए । चाँदनी रात में नदी …

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जब देवताओं ने विक्रमादित्य को सपने में स्वर्ग आने का निमंत्रण भेजा और उन्होंने स्वर्ग तक की यात्रा की

जब देवताओं ने विक्रमादित्य को सपने स्वर्ग आने का निमंत्रण भेजा और उन्होंने स्वर्ग तक की यात्रा की

स्वर्ण सिंहासन की अट्ठाईसवीं पुतली का नाम वैदेही था और उसने राजा भोज को आगे बढ़ने से रोक कर उनसे विक्रमादित्य की कथा इस प्रकार कही “एक बार राजा विक्रमादित्य अपने शयन कक्ष में गहरी निद्रा में लीन थे । …

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राजा विक्रमादित्य ने दानवीर राजा बलि से पाताल लोक में मिलने के लिए भगवान विष्णु को, कठोर तपस्या करके प्रसन्न किया

राजा विक्रमादित्य ने दानवीर राजा बलि से पाताल लोक में मिलने के लिए भगवान विष्णु को

राजा भोज, स्वर्ण सिंहासन की सत्ताईसवीं पुतली, मलयवती को देख कर मुग्ध हुए जा रहे थे | जीवंत होने के पश्चात् मलयवती ने सर्वप्रथम राजा भोज व उनके समस्त दरबारी गणों को बैठ जाने को कहा फिर अपनी संगीतमय वाणी …

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