जब विक्रमादित्य की परोपकार तथा त्याग की भावना से भगवान् शिव प्रसन्न हुए

जब विक्रमादित्य की परोपकार तथा त्याग की भावना से भगवान् शिव प्रसन्न हुए

महाराजा विक्रमादित्य के उज्जैयनी राज्य की प्रजा को कोई कमी नहीं थीं । प्रजा का लगभग हर वर्ग संपन्न था | सभी लोग संतुष्ट तथा प्रसन्न रहते थे । कभी कोई समस्या लेकर यदि कोई दरबार आता था तो उसकी …

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विक्रमादित्य ने हिंसक सिंह का शिकार करते हुए एक कापालिक और बेताल का न्याय किया

विक्रमादित्य ने हिंसक सिंह का शिकार करते हुए एक कापालिक और बेताल का न्याय किया

राजा भोज को खुदाई में जो स्वर्ण सिंहासन मिला था उसकी चौदहवीं पुतली का नाम सुनयना था | सुनयना ने अपनी मिश्री घुली हुई, संगीतमय वाणी से राजा विक्रमादित्य के बारे में बताना शुरू किया | राजा विक्रमादित्य सारे नृपोचित …

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स्वर्ण सिंहासन की तेरहवीं पुतली, कीर्तिमती, ने खोला रहस्य, सर्वश्रेष्ठ दानवीर कौन विक्रमादित्य या कोई और

स्वर्ण सिंहासन की तेरहवीं पुतली, कीर्तिमती, ने खोला रहस्य, सर्वश्रेष्ठ दानवीर कौन

राजा भोज को इस बार विक्रमादित्य की कथा सुनायी तेरहवीं पुतली कीर्तिमती ने | कीर्तिमती ने राजा भोज व वहाँ उपस्थित सभी दरबारी गणों को बतलाना आरम्भ किया “एक बार राजा विक्रमादित्य ने एक महाभोज का आयोजन किया । उस …

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ब्राह्मणी को बचाने के लिए विक्रमादित्य ने रहस्यमय राक्षस से घमासान युद्ध किया

ब्राह्मणी को बचाने के लिए विक्रमादित्य ने रहस्यमय राक्षस से घमासान युद्ध किया

विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की बारहवीं पुतली पद्मावती ने राजा भोज को, विक्रमादित्य के एक राक्षस से हुए घमासान युद्ध की कथा सुनाई | उस कथा के अनुसार एक दिन रात के समय राजा विक्रमादित्य महल की छत पर टहल …

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दानवीर विक्रमादित्य ने समुद्र देव से उपहार स्वरुप प्राप्त दुर्लभ मणियों तथा पवन वेगी घोड़े को ब्राहमण को दान कर दिया

दानवीर विक्रमादित्य ने समुद्र देव से उपहार स्वरुप प्राप्त दुर्लभ मणियों तथा पवन वेगी घोड़े को ब्राहमण को दान कर दिया

सम्राट विक्रमादित्य बहुत बड़े प्रजापालक व प्रजाहितैषी थे । उन्हें हमेंशा अपनी प्रजा की सुख-समृद्धि की ही चिन्ता सताती रहती थी । एक बार उन्होंने एक महायज्ञ करने की ठानी । असंख्य राजा-महाराजाओं, पण्डितों और ॠषियों को आमन्त्रित किया । …

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जब विक्रमादित्य अपने राज्य के नौनिहालों की प्राणरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने से भी नहीं हिचके

जब विक्रमादित्य अपने राज्य के नौनिहालों की प्राणरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान

राजा भोज को, स्वर्ण सिंहासन की नवीं पुतली, मधुमालती ने जो कथा सुनाई उससे विक्रमादित्य की प्रजा के हित में अपने प्राणों की आहुति करने की भी भावना झलकती है । वह कथा इस प्रकार है | एक बार राजा …

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जब विक्रमादित्य ने अपने प्राणों की भी परवाह न करते हुए वसु का विवाह अप्सराओं से भी सुन्दर राजकुमारी से करवाया

जब विक्रमादित्य ने अपने प्राणों की भी परवाह न करते हुए वसु का विवाह अप्सराओं

राजा भोज को स्वर्ण सिंहासन की दसवीं पुतली प्रभावती ने विक्रमादित्य की जो कथा सुनाई वो इस प्रकार थी | एक बार राजा विक्रमादित्य वन में हिंसक पशुओं का शिकार करते-करते अपने सैनिकों की टोली से काफी आगे निकलकर वन …

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भृगु ऋषि और सुन्दरी पुलोमा के पुत्र च्यवन ऋषि का जन्म कैसे हुआ था, क्या भृगु ऋषि ने ही अग्निदेव को सर्वभक्षी होने का शाप दिया था ?

भृगु ऋषि और सुन्दरी पुलोमा के पुत्र च्यवन ऋषि का जन्म कैसे हुआ था

शौनक ऋषि, महर्षि भृगु की कथा सुनना चाहते थे इसलिए एक बार वे अपने मित्रों व अन्य ऋषियों के साथ, पुराणों व इतिहास के ज्ञाता ऋषि उग्रश्रवा के पास आये | शौनक जी ने उनसे कहा “तात लोमहर्षण कुमार ! …

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सिंहासन बत्तीसी की सातवीं पुतली कौमुदी ने, विक्रमादित्य की पिशाचिनी से मुलाकात और उसके दिव्य चमत्कारी, अन्नपूर्णा पात्र की कथा सुनायी

सिंहासन बत्तीसी की सातवीं पुतली कौमुदी ने, विक्रमादित्य की पिशाचिनी से मुलाकात

विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन ने राजा भोज की नींद उड़ायी हुई थी | वे जल्द से जल्द उस पर विराजमान होना चाह रहे थे | लेकिन उस स्वर्ण सिंहासन की पुतलियाँ ऐसा होने नहीं दे रही थी | अब तक …

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स्वर्ण सिंहासन की छठी पुतली रविभामा ने राजा भोज को सम्राट विक्रमादित्य के आतिथ्य-सत्कार की हैरान कर देने वाली कथा सुनायी

राजा भोज को अब तक सिंघासन बत्तीसी से निकलने वाली पुतलियों द्वारा सुनायी जाने वाली कहानियों को सुनने में आनंद आने लगा था | उस स्वर्ण सिंहासन पर आरूढ़ होने के क्रम छठे दिन भी उनका रास्ता, छठी पुतली रविभामा …

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