जब विक्रमादित्य के यान्त्रिक रथ हवा में उड़े और उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया

जब विक्रमादित्य के यान्त्रिक रथ हवा में उड़े और उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया

स्वर्ण सिंहासन की पंद्रहवीं पुतली सुन्दरवती, अपने नाम के अनुरूप ही अत्यंत सुंदरी थी | राजा भोज समेत समस्त दरबारी …

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विक्रमादित्य के राज्य में सुदूर देशों से विद्वान तथा प्रतिभावन, सम्मान तथा पारितोषिक पाने आते थे

विक्रमादित्य के राज्य में सुदूर देशों से विद्वान तथा प्रतिभावन, सम्मान तथा पारितोषिक पाने आते थे

राजा विक्रमादित्य कला तथा प्रतिभा का बहुत सम्मान करते थे | उनकी गुणग्राहिता का कोई जवाब नहीं था । वे …

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विक्रमादित्य ने सुलझायी पहेली, मन बड़ा या ज्ञान

विक्रमादित्य ने सुलझायी पहेली, मन बड़ा या ज्ञान

विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन से निकली उन्नीसवीं पुतली, रूपरेखा ने, राजा भोज को, विक्रमादित्य की महानता का वर्णन करते हुए …

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जब विक्रमादित्य की परोपकार तथा त्याग की भावना से भगवान् शिव प्रसन्न हुए

जब विक्रमादित्य की परोपकार तथा त्याग की भावना से भगवान् शिव प्रसन्न हुए

महाराजा विक्रमादित्य के उज्जैयनी राज्य की प्रजा को कोई कमी नहीं थीं । प्रजा का लगभग हर वर्ग संपन्न था …

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विक्रमादित्य ने हिंसक सिंह का शिकार करते हुए एक कापालिक और बेताल का न्याय किया

विक्रमादित्य ने हिंसक सिंह का शिकार करते हुए एक कापालिक और बेताल का न्याय किया

राजा भोज को खुदाई में जो स्वर्ण सिंहासन मिला था उसकी चौदहवीं पुतली का नाम सुनयना था | सुनयना ने …

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स्वर्ण सिंहासन की तेरहवीं पुतली, कीर्तिमती, ने खोला रहस्य, सर्वश्रेष्ठ दानवीर कौन विक्रमादित्य या कोई और

स्वर्ण सिंहासन की तेरहवीं पुतली, कीर्तिमती, ने खोला रहस्य, सर्वश्रेष्ठ दानवीर कौन

राजा भोज को इस बार विक्रमादित्य की कथा सुनायी तेरहवीं पुतली कीर्तिमती ने | कीर्तिमती ने राजा भोज व वहाँ …

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ब्राह्मणी को बचाने के लिए विक्रमादित्य ने रहस्यमय राक्षस से घमासान युद्ध किया

ब्राह्मणी को बचाने के लिए विक्रमादित्य ने रहस्यमय राक्षस से घमासान युद्ध किया

विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की बारहवीं पुतली पद्मावती ने राजा भोज को, विक्रमादित्य के एक राक्षस से हुए घमासान युद्ध …

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दानवीर विक्रमादित्य ने समुद्र देव से उपहार स्वरुप प्राप्त दुर्लभ मणियों तथा पवन वेगी घोड़े को ब्राहमण को दान कर दिया

दानवीर विक्रमादित्य ने समुद्र देव से उपहार स्वरुप प्राप्त दुर्लभ मणियों तथा पवन वेगी घोड़े को ब्राहमण को दान कर दिया

सम्राट विक्रमादित्य बहुत बड़े प्रजापालक व प्रजाहितैषी थे । उन्हें हमेंशा अपनी प्रजा की सुख-समृद्धि की ही चिन्ता सताती रहती …

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जब विक्रमादित्य अपने राज्य के नौनिहालों की प्राणरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने से भी नहीं हिचके

जब विक्रमादित्य अपने राज्य के नौनिहालों की प्राणरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान

राजा भोज को, स्वर्ण सिंहासन की नवीं पुतली, मधुमालती ने जो कथा सुनाई उससे विक्रमादित्य की प्रजा के हित में …

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जब विक्रमादित्य ने अपने प्राणों की भी परवाह न करते हुए वसु का विवाह अप्सराओं से भी सुन्दर राजकुमारी से करवाया

जब विक्रमादित्य ने अपने प्राणों की भी परवाह न करते हुए वसु का विवाह अप्सराओं

राजा भोज को स्वर्ण सिंहासन की दसवीं पुतली प्रभावती ने विक्रमादित्य की जो कथा सुनाई वो इस प्रकार थी | …

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