राजा विक्रमादित्य ने दानवीर राजा बलि से पाताल लोक में मिलने के लिए भगवान विष्णु को, कठोर तपस्या करके प्रसन्न किया

राजा विक्रमादित्य ने दानवीर राजा बलि से पाताल लोक में मिलने के लिए भगवान विष्णु को

राजा भोज, स्वर्ण सिंहासन की सत्ताईसवीं पुतली, मलयवती को देख कर मुग्ध हुए जा रहे थे | जीवंत होने के …

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जब विक्रमादित्य ने अपने राज्य के निर्धन ब्राहमण तथा भाट को पुत्रियों के विवाह के लिए राजकीय सहायता देने में न्याय किया

जब विक्रमादित्य ने अपने राज्य के निर्धन ब्राहमण तथा भाट को पुत्रियों के विवाह के लिए राजकीय सहायता देने में न्याय किया

खुदायी में प्राप्त सम्राट विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की पचीसवी पुतली त्रिनेत्री ने राजा भोज को एक बार फिर रोक दिया …

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विक्रमादित्य ने, चरित्रहीन स्त्री के प्रेम में पड़े हुए युवक को विनाश की ओर अग्रसर होने से बचा लिया

विक्रमादित्य ने, चरित्रहीन स्त्री के प्रेम में पड़े हुए युवक को विनाश की ओर अग्रसर होने से बचा लिया

स्वर्ण सिंहासन की चौबीसवीं पुतली करुणावती ने राजा भोज को एक करुण कथा सुनायी | उसने कथा सुनाना प्रारंभ किया …

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विक्रमादित्य ने इस विवाद का समाधान किया कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से

विक्रमादित्य ने इस विवाद का समाधान किया कि मनुष्य जन्म से बड़ा होता है या कर्म से

सिंघासन बत्तीसी की तेईसवी पुतली धर्मवती ने राजा भोज को, विक्रमादित्य की कथा सुनाना प्रारम्भ किया | एक बार राजा …

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राजा विक्रमादित्य के भरे दरबार में, एक बुद्धिमान और विद्वान युवक ने नर्तकी के उच्च स्तर के नृत्य की मुक्त कंठ से प्रशंसा की तथा उसे पुरस्कार दिया

राजा विक्रमादित्य के भरे दरबार में, एक बुद्धिमान और विद्वान युवक ने नर्तकी के उच्च स्तर के नृत्य

स्वर्ण सिंहासन की बाईसवीं पुतली अनुरोधवती ने राजा भोज को बताया कि राजा विक्रमादित्य अद्भुत गुणग्राही थे । वे वास्तविक …

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जब विक्रमादित्य की परोपकार की भावना से प्रसन्न हो कर चन्द्रदेव ने उन्हें अमृत दिया

जब विक्रमादित्य की परोपकार की भावना से प्रसन्न हो कर चन्द्रदेव ने उन्हें अमृत दिया

इक्कीसवें दिन राजा भोज को, स्वर्ण सिंहासन की इक्कीसवीं पुतली चन्द्रज्योति ने रोका | उसने राजा भोज को सम्राट विक्रमादित्य …

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राजा विक्रमादित्य ने जब ज्योतिषी के धैर्य को परखने के लिए लकड़हारे का रूप धरा

राजा विक्रमादित्य ने जब ज्योतिषी के धैर्य को परखने के लिए लकड़हारे का रूप धरा

स्वर्ण सिंहासन की बीसवीं पुतली ज्ञानवती ने राजा भोज को बताया कि राजा विक्रमादित्य सच्चे ज्ञान के बहुत बड़े पारखी …

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जब राजा विक्रमादित्य ने पाताल लोक की यात्रा की तथा वहाँ के राजा शेषनाग से मुलाकात की

जब राजा विक्रमादित्य ने पाताल लोक की यात्रा की तथा वहाँ के राजा शेषनाग से मुलाकात की

राजा भोज से स्वर्ण सिंहासन की सोलहवीं पुतली, सत्यवती ने जो विक्रमादित्य की कथा कही वह इस प्रकार थी | …

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जब विक्रमादित्य के यान्त्रिक रथ हवा में उड़े और उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया

जब विक्रमादित्य के यान्त्रिक रथ हवा में उड़े और उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया

स्वर्ण सिंहासन की पंद्रहवीं पुतली सुन्दरवती, अपने नाम के अनुरूप ही अत्यंत सुंदरी थी | राजा भोज समेत समस्त दरबारी …

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विक्रमादित्य के राज्य में सुदूर देशों से विद्वान तथा प्रतिभावन, सम्मान तथा पारितोषिक पाने आते थे

विक्रमादित्य के राज्य में सुदूर देशों से विद्वान तथा प्रतिभावन, सम्मान तथा पारितोषिक पाने आते थे

राजा विक्रमादित्य कला तथा प्रतिभा का बहुत सम्मान करते थे | उनकी गुणग्राहिता का कोई जवाब नहीं था । वे …

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