उत्तराखंड की रूपकुंड (Roopkund) झील, सफेद बर्फ के नीचे दबी काली मौत का रहस्य

Roopkund_Lake

उत्तराखंड का कुमाऊं क्षेत्र, बर्फ की पहाड़ियां, बर्फ की नदियाँ, जिसका नाम है रूपकुंड (Roopkund)। आप सोंच रहे होंगे कि हम आज रूप कुंड के सुंदर रूप की चर्चा करने जा रहे होंगे। लेकिन जब हम इस कुंड में डूबे हुए रहस्य को आपके सामने रखेंगे तो आपकी आँखो से आंसू निकल आयेंगे। क्योंकि जब इस झील पर बर्फ जमी रहती है तब तक प्रकृति अपने आँचल में इस रूप कुंड के दर्द को छिपाये रखती है।

लेकिन जब इस रूपकुंड (Roopkund) की बर्फ पिघलती है तो दिखाई देता है एक बदसूरत सच, क्योंकि यहां की झील की बर्फ पिघलते ही सैकड़ों की संख्या में मानव कंकाल नजर आने लगते हैं। बड़ा भयावह लगता है यह दृश्य, सैकड़ों की संख्या में इस बर्फीली झील में दफन होने वाले लोग कौन थे? वे यहां क्यों आये थे? किस अपराध में किसने उन्हें मार डाला? मरने वालों का क्या कुसूर था? ऐसे ही न जाने कितने ही रहस्यों की परतें यहां की बर्फ के नीचे दफन है।

कंकालों वाली झील के नाम से प्रसिद्ध यह डरावनी जगह पत्थर से पत्थर दिलों वाले व्यक्ति को रुला देती है, क्योंकि यह वह स्थान है जहां कभी ऐसा मौत का तांडव हुआ होगा, जिसकी कल्पना करते ही दिल दहल उठता है। इस मौत की झील की दर्दनाक कहानी कितनी पुरानी है? किसी को मालूम नहीं, लोग -बाग बस एक अनुमान लगाते हैं। जो सच से कितना दूर है किसी को पता नहीं।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बहुत समय तक लोगों को इस डरावनी झील के बारे में पता नहीं था। कोई नहीं सोंच सकता था कि उतराखंड की इन खूबसूरत पहाड़ियों में एक अमानवीय दर्द छिपा होगा। सबसे पहले हम यह जानते हैं कि वह कौन व्यक्ति था जिसे रूपकुंड के बर्फीले जल में डूबे हुए मौत के रहस्य के बारे में पता चला।

रूपकुंड (Roopkund) झील के रहस्य का पता कब चला 

दरअसल यह बात है वर्ष 1942 की, एक बार एक ब्रिटिश फॉरेस्ट रेंजर इस क्षेत्र में आया। वह अपने सरकारी कार्य के कारण कई दिनों तक यहाँ रहा। उसने कई दिनों तक इस स्थान पर सर्वेक्षण किया। उन दिनों जाड़े की कड़कती ठंड थी। पूरा मौसम बर्फीला हो रहा था। एक दिन धूप खिलने के बाद जब रूपकुंड की बर्फ पिघली तो ब्रिटिश रेंजर ने जो कुछ देखा तो वह बर्फीली ठंड में भी पसीने- पसीने हो गया।

हुआ यों की तेज सर्द के कारण रूप कुंड की झील पर बर्फ जमी हुई थी । सर्द मौसम में यहाँ कई कई दिन सूर्य के दर्शन नहीं होते हैं। लेकिन जैसे ही सूर्य की रोशनी निकली तो झील के पानी में सैकड़ों मानव कंकाल दिखाई देने लगे। इस दिल दहलाने वाले दृश्य को देखकर उस फॉरेस्ट रेंजर की चीख निकल पड़ी। उसने उसी समय अपने अधिकारियों को इस बात की खबर दी।

यह अविश्वसनीय समाचार सुनकर कई अंग्रेज अफसर रूप कुंड में तैर रहे मानव कंकालों को देखने आए। लेकिन वे भी इस बात का अनुमान नहीं लगा पाये कि रूप कुंड के मानव कंकाल होने के पीछे कारण क्या है ? लोग अचंभे में थे कि यह मानव कंकाल किसके है और कितने पुराने हैं ?

रूपकुंड (Roopkund) झील में कितने कंकाल हैं

आपको जानकर आश्चर्य होगा की इस मौत की झील में पानी में तैरते हुऐ मानव कंकाल एक-दो नहीं ,बल्कि 700 से 800 की संख्या में थे। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित यह त्रिशूल पहाड़ी, समुद्र तल से 5029 मीटर ऊंचाई पर है। यहां तीन पहाड़ियां इस तरह से बनी हुई है जैसे की भगवान शिव का त्रिशूल स्थापित हो। इसीलिए इन पहाड़ियों को त्रिशूल पहाड़ियों के नाम से भी जाना जाता है।

इन तीन पहाड़ियों के मध्य क्षेत्र में स्थित झीलें अनेक रहस्यों से भरी हुई हैं। इसका रहस्य यह है कि झील में सैकड़ों की संख्या में मृत स्त्री और पुरुषों के हड्डियाँ नजर आते हैं। जिन्हें देख करलोगों द्वारा तरह-तरह की अटकलें लगाई जातीं हैं। कुछ वर्षों पहले अखबार में यह खबर छपी इस स्थान पर मिलने वाले कंकाल आदिवासियों के हैं, जो अति ओलावृष्टि होने के कारण मृत्यु को प्राप्त हो गये होंगे।

अफवाहों से घिरा है रूपकुंड (Roopkund) झील का रहस्य 

लेकिन इस बात का कोई विश्वसनीय उल्लेख नहीं मिलता है। पूर्व में कुछ सर्वेक्षकों का कहना था कि यह भारतीय सैनिकों की अस्थियाँ हैं, जो तिब्बत देश से युद्ध लड़ने के लिए गए थे। लेकिन इस बात में भी सच्चाई नहीं है क्योंकि इन कंकालों में स्त्रियों की भी कंकालें है और उस समय सेना में स्त्रियों की भर्ती नहीं की जाती थी।

कुछ शोध कर्ताओं का ऐसा मानना है कि इस झील में सैकड़ों की संख्या में कंकालों का मिलना किसी एक दिन की घटना नहीं हो सकती है । हो सकता है प्राचीन काल में यहां कोई प्रेत आत्मा या नकारात्मक शक्ति रहती हो, जो यहाँ आने वाले को अपना शिकार बना देती थी। परन्तु बात कुछ भी हो लेकिन है दर्दनाक, क्योंकि इतनी संख्या में स्त्रियों-पुरुषों को बर्बरता से मौत की घाट उतारना बड़ा डरावना है।

मानव संहार के खौफनाक सच को प्रकृति की शीतलता ने इन कंकालों के रूप में पूरी तरह सुरक्षित रखा हुआ है। कुछ प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि इस रूपकुंड में मिलने वाले कुछ अस्थि पंजर बिल्कुल समूचे हैं, जिन्हें देखकर ऐसा लगता है किसी ने जादू- टोने से उनको मौत के घाट उतारा होगा। कुछ लोग यहां की झील में कंकालों के होने के कारण आत्माओं की उपस्थिति का आभास करते हैं।

सत्तर वर्ष पुरानी एक घटना जिसने रहस्य को और गहरा दिया 

एक बार रॉबर्ट ले नाम के व्यक्ति यहां पर इस डरावनी हकीकत को देखने सपरिवार आये। ऑफिसर रॉबर्ट ले जब अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से बातें कर रहे थे तो उनकी मैडम झील की तरफ आगे बढ़ गईं। अचानक उन्हें लगा कि कोई उन्हें पकड़ कर झील के अंदर खींच रहा है। रॉबर्ट ले की पत्नी तेजी से चिल्लाने लगीं। तब दौड़ के लोगों ने उनका हाथ पकड़ लिया। तब जाकर उनकी जान बच सकी।

कोलकाता के डॉ. जे.बी. दत्तात्रेय ने इस रूपकुंड के बारे जो कुछ रिसर्च किया वह और भी भयावह था। उन्होंने बताया कि लगभग सैकड़ों साल पहले एक बार एक पैदल यात्रियों का एक काफिला इस क्षेत्र से होकर गुजर रहा था। वे लोग वह खानाबदोश लोग थे जो अलग अलग स्थानों पर रहते हुये अपनी जिंदगी बिताते थे। न जाने क्यों उस दिन उन खानाबदोश लोगों ने इस पहाड़ी क्षेत्र में रुकने का मन बना लिया।

Roopkund दैत्यरूपकुंड (Roopkund) झील का दैत्य, यथार्थ या मिथक 

वे खानाबदोश महिलाएं और पुरुष सैकड़ों की संख्या में थे। चलते-चलते वे लोग थक गये थे । उन्होंने इसी पहाड़ी क्षेत्र में रुकने का मन बना लिया। उन सभी लोगों ने यहाँ उस स्थान पर डेरा डाल दिया। वे लोग उस स्थान पर अपना बिछौना बिछाकर लेट गये। कुछ समय बाद उन लोगों में एक व्यक्ति को प्यास लगी।

वह व्यक्ति जल के लिए एक बर्तन लेकर वहाँ स्थित रूपकुंड के पास गया। वहाँ उसे लगा कि कोई एक काफी बड़े कद का जीव पानी पी रहा है। देखने में वह जीव कुछ इंसान और कुछ जानवर सा विचित्र लग रहा है। खानाबदोश समुदाय का वह व्यक्ति उस अजीब से दिखने वाले जीव को देखकर बहुत डर गया। उसे क्या पता था की यह रूप कुंड का दैत्य है, जो यहीं इसी जल के कुंड आसपास रहता है।

जल लेने गये उस व्यक्ति ने सोंचा की वह कोई जानवर है जो पानी पीने आया है। उस खानादोश समुदाय के व्यक्ति को, उस विचित्र से दिखने वाले जानवर को देखकर बड़ा डर लग रहा था। इसलिए उसने विचार किया की पहले वह खौफनाक जानवर पानी पीकर चला जाये ,उसके बाद ही वह अपने लिए पानी लेगा। क्यों कि ऐसा न हो कि पानी लेने के दौरान वह उस पर हमला कर दे और फाड़कर खा जाये।

इसलिए वह व्यक्ति एक पेड़ के पीछे छिपकर उसके जाने का इंतजार करने लगा। लेकिन आधा घंटा बीता, फिर एक घंटा बीता। लेकिन फिर भी वह जानवर पानी पीता रहा। उस व्यक्ति को क्या पता था कि यह दैत्य की प्यास है आसानी से थोड़े न बुझेगी। लेकिन अब पानी लेने के लिए आये उस व्यक्ति का घैर्य टूटता जा रहा था। उसे तो पहले से प्यास लगी थी जो अब असहनीय होती जा रही थी।

अब वह उस जंगली जीव को भगाने का उपाय सोंचने लगा। क्योंकि उस व्यक्ति को ऐसा लग रहा था कि अब पानी के बिना उसकी जान ही निकल जायेगी। उस व्यक्ति के पास ही एक विशाल पत्थर पड़ा था और उस विशाल पत्थर को देखकर उस व्यक्ति के मन में एक हिंसक योजना ने जन्म ले लिया। उसने सोंचा की उस भारी -भरकम पत्थर को उठाकर उस जानवर के ऊपर फेंक देते हैं। जिसके कारण वह डरकर भाग जायेगा।

लेकिन उस व्यक्ति को अंदाज़ा नहीं था की वह अपनी मौत से मुठभेड़ करने का रास्ता बना रहा है। जैसे ही उस व्यक्ति ने जानवर की तरह दिखने वाले उस जीव पर पत्थर उठा कर मारा तो उस विचित्र जीव ने पीछे मुड़कर देखा। अब उस व्यक्ति को लगा की उसने भारी गलती कर दी है। वह एक मानव से दुगने कद का जीव था, जो रूप कुंड के आस पास फैली झुरमुट के कारण थोड़ा सा ही नजर आ रहा था।

उस व्यक्ति ने देखा की दरअसल वह विशालकाय जानवर बहुत ही डरावना दिखने वाला और कोयले से भी अधिक काले रंग का जीव है। जिसकी बड़ी बड़ी लाल – लाल आँखों और मुँह में बड़े-बड़े दाँतो को देखकर वह व्यक्ति मारे डर के पसीना -पसीना हो गया। उस व्यक्ति द्वारा फेंका गया पत्थर रूप कुंड के उस दैत्य के सिर पर लगा था। जिसके कारण वह गुस्से से आग बबूला हो गया था।

वह उस खानाबदोश समुदाय के व्यक्ति को जिंदा चबा जाने के लिए आगे बढ़ रहा था। वह व्यक्ति वापस उस ओर भागा, जहाँ उसके समुदाय के लोग विश्राम कर रहे थे। दैत्य उस व्यक्ति के पीछे पीछे वहाँ भी पहुँच गया गया जहाँ सैकड़ों की संख्या में लोग सो रहे थे। दैत्य ने वहाँ पहुँच कर मौत का तांडव शुरू कर दिया। सबसे पहले दैत्य ने उस व्यक्ति को उठाकर हवा में उछाल दिया। जो रूप कुंड में जाकर गिरा ओर उसने दम तोड़ दिया।

रूपकुंड (Roopkund) झील का रहस्य अभी भी अनसुलझा है 

उसके बाद वह एक-एक करके खानाबदोश समुदाय के एक एक आदमी औरत को उठा उठाकर रूप कुंड में फेंकने लगा। देखते ही देखते कुंड में लाशों का ढेर लग गया। मृत नर- नारियों के शरीरों से रूप कुंड भर गया। वह रात रूप कुंड की भयानक रात थी। खानाबदोश समुदाय के लोग रूप कुंड के दैत्य के क्रोध का शिकार बन गये थे। उन्हीं व्यक्तियों की हड्डियाँ आज रूप कुंड के पानी में तैरती हुईं दिखाई दे रहीं हैं। ऐसी कई कहानियां लोग सुनते हैं।

लेकिन जितने लोग उतनी बातें, रूप कुंड के भयानक रहस्य से आज तक पर्दा नहीं उठ पाया है। लोग तरह- तरह की कहानियाँ सुनाते हैं। लेकिन झील में मरे हुये लोग वापस जिंदा नहीं हो सकते जो बता सकें कि इस रूप कुंड का दर्दनाक सच क्या था? कौन है वह गुनाहगार ,जो गुनाह करके न जाने कहाँ छिप गया? सत्य यह है कि उत्तराखंड के रूप कुंड का डरावना रहस्य अभी भी दफ़न है।