विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की तीसरी पुतली चन्द्रकला ने राजा भोज को पुरुषार्थ और भाग्य की कथा सुनायी

सिंहासन बत्तीसी की तीसरी पुतली चन्द्रकला ने राजा भोज को कथा सुनायी

विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन ने राजा भोज का कौतूहल बढ़ा दिया था | अब वे जल्दी से जल्दी उस पर आरूढ़ होना चाह रहे थे | तीसरे दिन भी उनका रास्ता, उस स्वर्ण सिंहासन की तीसरी पुतली चन्द्रकला ने रोका …

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सिंघासन बत्तीसी की पांचवी पुतली लीलावती ने विक्रमादित्य के प्रजापालन व दानवीरता की कथा सुनायी

सिंघासन बत्तीसी की पांचवी पुतली लीलावती

विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन को प्राप्त करने के बाद, पांचवें दिन राजा भोज का रास्ता रोकने वाली लीलावती थी, जो उस स्वर्ण सिंहासन की पांचवीं पुतली थी | उसने भी राजा भोज को एक कथा सुनायी जिसमे सम्राट विक्रमादित्य की …

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जब देवराज इंद्र का मान रखने के लिए विक्रमादित्य, अंतरिक्ष में भगवान् सूर्य के निकट गये, सिंहासन बत्तीसी की चौथी कहानी

जब देवराज इंद्र का मान रखने के लिए विक्रमादित्य, अंतरिक्ष में भगवान् सूर्य के निकट गये, सिंहासन बत्तीसी की चौथी कहानी

चौथे दिन फिर राजा भोज, सम्राट विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान होने के लिए बढे, तो उनका रास्ता सिंहासन की चौथी पुतली कामकंद कला ने रोक लिया | उसने भी राजा भोज को विक्रमादित्य की एक कहानी सुनायी | …

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सिंघासन बत्तीसी की दूसरी पुतली चित्रलेखा ने राजा भोज को विक्रम और बेताल की कथा सुनायी

सिंघासन बत्तीसी की दूसरी पुतली चित्रलेखा ने राजा भोज

जमीन की खुदाई से निकले विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की दूसरी पुतली ने राजा भोज को विक्रम और बेताल की कथा सुनायी, जो जगत प्रसिद्ध है | इस कथा के अनुसार एक बार राजा विक्रमादित्य आखेट खेलते-खेलते एक ऊँचे पहाड़ …

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सिंघासन बत्तीसी की पहली पुतली रत्नमंजरी द्वारा कही गयी, सम्राट विक्रमादित्य के जन्म, शंख से युद्ध तथा स्वर्ण सिंहासन प्राप्त होने की कथा

सिंघासन बत्तीसी की पहली पुतली रत्नमंजरी

अपने राज्य में खुदाई द्वारा प्राप्त हुए उस अद्भुत, दिव्य राज सिंहासन पर आरूढ़ होने के लिए राजा भोज जैसे ही, उस, सम्राट विक्रमादित्य के अद्भुत दैवीय, सिंहासन की ओर बढे, उस सिंहासन में जड़ी हुई बत्तीस पुतलियों ने उनका …

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सिंघासन बत्तीसी की कथायें

सिंघासन बत्तीसी की कथायें

भारतवर्ष रहस्यों का देश है, कहानियों का देश है | सहस्त्राब्दियों से यहाँ कहानियां देश को नयी दिशा देती आयी है | यहाँ प्रचलित कहानियाँ सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं होती थी बल्कि वो शिक्षा और संस्कार के नए प्रतिमान …

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क्या महर्षि च्यवन के पौत्र ऋषि रुरु ने अपनी आधी आयु, अपनी मृत पत्नी को दे कर उसे जीवित किया था और क्या रुरु ने ही अपनी, सर्पों के विनाश की प्रतिज्ञा के चलते महर्षि सहस्त्रपाद को सर्पयोनी से मुक्त किया था

क्या महर्षि च्यवन के पुत्र ऋषि रुरु ने अपनी आधी आयु

उग्रश्रवा जी कहते है “ब्रह्मन् ! भृगु पुत्र च्यवन ने अपनी पत्नी सुकन्या के गर्भ से एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम प्रमति था । महात्मा प्रमति बडे तेजस्वी थे । फिर प्रमति ने घृताची नाम की अप्सरा से …

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जब मयासुर दैत्य द्वारा रचित दिव्य, अद्भुत त्रिपुरों के नाश के लिए भगवान शिव ने योद्धा का रूप धारण किया और उनके रथ के सारथी बने भगवान ब्रह्मा जी

जब मयासुर दैत्य द्वारा रचित दिव्य, अद्भुत त्रिपुरों के नाश के लिए भगवान शिव ने योद्धा का रूप धारण किया

एक बार दुर्योधन ने कर्ण के विषय में समझते हुए राजा शल्य से कहा “महाराज शल्य ! पूर्वकाल में महर्षि मार्कण्डेय ने मेरे पिताजी से एक उपाख्यान कहा था । वह सब कथा मैं आपको सुनाता हूँ । उसे सुनिये …

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पंचतन्त्र की कहानियां-घमण्डी सौबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि मछलियों के घमंड और मूर्खता की वजह से बेचारी मछलियों को अपनी जान से हाँथ धोना पड़ा

पंचतन्त्र की कहानियां-घमण्डी सौबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि

एक सरोवर में बहुत-सी छोटी-छोटी मछलियां रहती थीं । उन मछलियों में दो मछलियां ऐसी थीं, जिनमें एक का नाम सौबुद्धि और दूसरी का नाम सहस्रबुद्धि था । सौबुद्धि अपने नाम के अनुसार ही समझती थी कि उसमें सौ बुद्धि …

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पंचतंत्र की कहानियां-जंगल के हंस की बुद्धिमानी

एक जंगल में एक बहुत बड़ा सधन वृक्ष था । वृक्ष में बड़ी-बड़ी डालियां और शाखाएं थीं | पत्ते भी लंबे-लंबे और हरे-हरे थे | उस वृक्ष की छाया बड़ी घनी होती थी । कभी भी धूप नहीं आती थी …

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