मद्र्राज शल्य को अपना सारथी बनाने के लिए अंगराज कर्ण और दुर्योधन ने अथक परिश्रम किया
राजा शल्य को समझाते हुए दुर्योधन ने कहा “वीरवर ! सारथि तो रथी से भी बढ़कर होना चाहिये । इसलिये आप संग्राम भूमि में कर्ण के घोड़ों का नियन्त्रण कीजिये । जिस प्रकार त्रिपुरों के नाश के लिये देवताओं ने …