पाण्डवों के प्रति धृतराष्ट्र के मन में जहर किसने भरा, किसने उनकी बुद्धि भ्रष्ट की, क्या वो शकुनी नहीं कोई और था
परीक्षित के पुत्र जन्मेजय को महाभारत की कथा सुनते हुए वैशम्पायन जी कहते हैं “जनमेजय ! द्रुपद को जीत लेने के एक वर्ष बाद राजा धृतराष्ट्र ने पाण्डु नन्दन युधिष्ठिर को युवराज पद पर अभिषिक्त कर दिया । एक तो …