विक्रम बेताल की कहानियाँ
विक्रम बेताल की कथा बहुत पुरानी है । एक समय धारा नगरी में गंधर्वसेन नाम के एक राजा राज करते थे । उनकी चार रानियाँ थीं । उन चार रानियों से उनके छ: लड़के थे जो सब-के-सब बड़े ही चतुर …
विक्रम बेताल की कथा बहुत पुरानी है । एक समय धारा नगरी में गंधर्वसेन नाम के एक राजा राज करते थे । उनकी चार रानियाँ थीं । उन चार रानियों से उनके छ: लड़के थे जो सब-के-सब बड़े ही चतुर …
मार्ग में कथा सुनाने के लिए विक्रम की अनुमति मिलने के बाद बेताल ने कथा सुनाना प्रारंभ किया | किसी समय काशी में प्रतापमुकुट नाम का राजा राज्य करता था । उसके वज्रमुकुट नाम का एक बेटा था । एक …
सिंहासन बत्तीसी के स्वर्ण सिंहासन की अंतिम पुतली थी रानी रूपवती राजा विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की अंतिम यानी बत्तीसवीं पुतली का नाम था रानी रूपवती | बत्तीसवें दिन जब रानी रूपवती ने राजा भोज को स्वर्ण सिंहासन पर बैठने …
उनके मरते ही सर्वत्र हाहाकार मच गया । उनकी प्रजा शोकाकुल होकर रोने लगी । जब उनकी चिता सजी तो उनकी चिता पर देवताओं ने फूलों की वर्षा की
जयलक्ष्मी तीसवीं पुतली थी जिसने राजा भोज का रास्ता रोका था | जयलक्ष्मी ने राजा भोज को, सम्राट विक्रमादित्य की जो कथा सुनायी वह इस प्रकार थी |’राजा विक्रमादित्य जितने बड़े राजा थे उतने ही बड़े तपस्वी भी थे । …
सिंहासन बत्तीसी की उन्तीसवीं पुतली मानवती ने राजा भोज को बताया कि राजा विक्रमादित्य (raja vikramaditya) वेश बदलकर रात में, अपने राज्य में, घूमा करते थे । ऐसे ही एक दिन घूमते-घूमते नदी के किनारे पहुँच गए । चाँदनी रात …
स्वर्ण सिंहासन की अट्ठाईसवीं पुतली का नाम वैदेही था और उसने राजा भोज को आगे बढ़ने से रोक कर उनसे विक्रमादित्य की कथा इस प्रकार कही “एक बार राजा विक्रमादित्य अपने शयन कक्ष में गहरी निद्रा में लीन थे । …
राजा भोज, स्वर्ण सिंहासन की सत्ताईसवीं पुतली, मलयवती को देख कर मुग्ध हुए जा रहे थे | जीवंत होने के पश्चात् मलयवती ने सर्वप्रथम राजा भोज व उनके समस्त दरबारी गणों को बैठ जाने को कहा फिर अपनी संगीतमय वाणी …
खुदायी में प्राप्त सम्राट विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की पचीसवी पुतली त्रिनेत्री ने राजा भोज को एक बार फिर रोक दिया | सिंहासन प्राप्त करने से पहले उसने उन्हें विक्रमादित्य की एक कथा सुनाई | उसने कहा ‘राजा विक्रमादित्य अपनी प्रजा …
स्वर्ण सिंहासन की चौबीसवीं पुतली करुणावती ने राजा भोज को एक करुण कथा सुनायी | उसने कथा सुनाना प्रारंभ किया | राजा विक्रमादित्य का सारा समय ही अपनी प्रजा के दुखों का निवारण करने में बीतता था । प्रजा की …