परग्रही दुनिया की रहस्यमय उड़नतश्तरी जिसे सत्तर हज़ार लोगों ने देखा


परग्रही दुनिया की रहस्यमय उड़नतश्तरी जिसे सत्तर हज़ार लोगों ने देखा
परग्रही दुनिया की रहस्यमय उड़नतश्तरी जिसे सत्तर हज़ार लोगों ने देखा

दूसरी दुनिया से आने वाले परग्रही एवं उनकी उड़नतश्तरियों के दिखने की घटनाएं सारे संसार में ऐसा रोमांच पैदा करती हैं मानो उनके जैसा कोई ना हो | सदियों से सरकारों द्वारा पोषित वैज्ञानिक एवं अधिकारी इन घटनाओं के पीछे की सच्चाई को आम जनता से छुपाते चले आयें हैं लेकिन कुछ घटनाएं बेमिसाल हैं जो बड़ी संख्या में उपस्थित आम जनता के सामने स्वयं घटित हुई हैं |

प्रस्तुत घटना परग्रही एवं उड़नतश्तरियों के दिखने की अन्य घटनाओं से थोड़ी अलग है | ये घटना 13 अक्टूबर 1917 की है | पुर्तगाल के कोवा डा इरिया (Cova da Iria) नामक स्थान पर तीन बच्चों ने पेड़ पर झूलते हुए एक प्रकाश-पुंज को देखा | उस प्रकाश-पुंज के भीतर एक सुन्दर देवी, दिव्य वस्त्रों में खड़ी मुस्कुरा रही थीं |

बच्चों को भय लगा | वो घबरा कर भागने लगे | तभी उस देवी ने कहा “ठहरो ! डरो मत, मै ऊपर स्वर्गलोक से आई हूँ | अगर तुम लोग इसी समय आया करोगे तो इस दिव्य प्रकाश के साथ मेरे भी दर्शन कर सकोगे” | बच्चे कौतूहल से एकटक उसी की तरफ़ देख रहे थे |

उन्हें वो कोई फ़रिश्ता लग रही थी | शाम होते-होते, लड़कों ने ये बात सब जगह फैला दी | दूसरे दिन उस गाँव और आस-पास के दूसरे गाँव से भी कुल मिलकर सत्तर हज़ार लोग उस जगह इकठ्ठा हो गए जहाँ उन लड़कों ने देवी के दर्शन की बात बताई थी |

इतने अधिक लोगों के इकठ्ठा हो जाने से किसी के कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि सही जगह कौन सी है और कईयों को तो ये बात अफ़वाह भी लग रही थी | समय बीतता गया, भगवान भास्कर मुस्कुराते हुए पश्चिम की तरफ़ निकलते रहे लेकिन उन देवी के दर्शन किसी को नहीं हुए |

अचानक उन्हें आकाश में, बादलों के बीच, एक चांदी की तरह चमकता हुआ एक दिव्य प्रकाश का गोला दिखाई | वहां उपस्थित दर्शकों में, अनपढ़, गँवार, जाहिल, आस्तिक, नास्तिक, पढ़े-लिखे और विद्वान सभी तरह के लोग थे | वे सभी लोग उस समय, आकाश में प्रकट होने वाले उस दिव्य प्रकाश के गोले को देखकर आश्चर्यचकित थे और सोच रहे थे कि ‘यह क्या बला है’ |

बादलों से प्रकट होने के बाद वह चमकदार उड़नतश्तरी स्थिर न रह सकी और आकाश में ही घेरे बनाकर विभिन्न प्रकार की गतियाँ करनी लगी | कभी धीरे-धीरे हवा में तैरती हुई सी आगे बढ़ती और कभी पलक झपकते ही तेज़ी से एक ओर निकल जाती | हवा में इस प्रकार से कलाबाजियाँ खाने से, उस उड़नतश्तरी से, इन्द्रधनुषी आकृतियाँ बनने लगीं |

बहुत समय तक उस उड़नतश्तरी के ऊपर इन्द्रधनुष उभरा रहा | उस इन्द्रधनुष का घेरा काफी बड़ा था | क्या गज़ब का दृश्य था | उस समय हल्की-हल्की, झींसी जैसी बारिश हो रही थी | दर्शकों का एक विशाल हूजूम एक अभूतपूर्व घटना का साक्षी बना हुआ था |

उनका मनोरंजन करती हुई उस उड़नतश्तरी ने अचानक से, पूरे दर्शकों के समूह का एक चक्कर लगया और गर्म-तरंगो (Heat Waves) की एक लहर छोड़ी | जिसके परिणामस्वरूप वहां उपस्थित दर्शकों के कपड़ों से भाप उठने लगी और उनके कपड़े मिनटों में सूख गए |

इस घटना की जानकारी फैलने पर पूरे पुर्तगाल में तहलका मच गया | वहां के एक प्रसिद्ध, दैनिक समाचार पत्र मार्से क्यूलों ने इस घटना का आँखों देखा विवरण छापा और इसे ‘चमकदार सूर्य का नृत्य’ नाम दिया |

पढ़े-लिखे, मॉडर्न और वैज्ञानिक टाइप के लोगों को इस घटना के घटित होने में संदेह था (वो दौर ही कुछ ऐसा था) | उनके हिसाब से ये एक प्रकार का Mass Hypnotism (सामूहिक वशीकरण) था | एक बड़ी संख्या में लोगों ने वही देखा और महसूस किया जो उन्हें दिखाया गया |

ये वो दौर था जब विश्व में अलग-अलग जगहों पर लोगों में मेस्मरिज्म और हिप्नोटिस्म को लेकर काफ़ी क्रेज और आकर्षण था | लेकिन इस प्रकार की घटना की व्याख्या करने के लिए ये थ्योरी बेतुकी और निरर्थक थी |

पूरी पृथ्वी पर जहाँ कहीं भी उड़नतश्तरियों के दीखने की घटना हुई है वहां उसके गवाह, दो, चार, आठ, दस लोग ही हुए हैं | एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा, दूसरी दुनिया के परग्रहियों की उड़नतश्तरी देखने की यह घटना अपने आप में अनोखी है जो इसका प्रमाण देने के लिए काफ़ी हैं कि हमसे भी उन्नत सभ्यतायें और संस्कृतियाँ, इस ब्रह्माण्ड के अन्य ग्रहों पर हैं और हमारी धरती पर वह बेरोकटोक आ जा सकती हैं |

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