जब विक्रमादित्य की परोपकार की भावना से प्रसन्न हो कर चन्द्रदेव ने उन्हें अमृत दिया
इक्कीसवें दिन राजा भोज को, स्वर्ण सिंहासन की इक्कीसवीं पुतली चन्द्रज्योति ने रोका | उसने राजा भोज को सम्राट विक्रमादित्य के जीवन का रोचक प्रसंग बताया | उसने कहा “एक बार राजा विक्रमादित्य एक यज्ञ करने की तैयारी कर रहे …