जब विक्रमादित्य की परोपकार तथा त्याग की भावना से भगवान् शिव प्रसन्न हुए
महाराजा विक्रमादित्य के उज्जैयनी राज्य की प्रजा को कोई कमी नहीं थीं । प्रजा का लगभग हर वर्ग संपन्न था | सभी लोग संतुष्ट तथा प्रसन्न रहते थे । कभी कोई समस्या लेकर यदि कोई दरबार आता था तो उसकी …