विक्रम बेताल की कहानियां, किसका पुण्य बड़ा, राजा का या सेवक का
राजा विक्रमादित्य जब बेताल को पीठ पर लाद कर ले चले तो मार्ग में बेताल ने उन्हें अगली कथा सुनायी | बेताल ने कहा मिथलावती नाम की एक नगरी थी । उसमें गुणधिप नाम का राजा राज्य करता था । …
राजा विक्रमादित्य जब बेताल को पीठ पर लाद कर ले चले तो मार्ग में बेताल ने उन्हें अगली कथा सुनायी | बेताल ने कहा मिथलावती नाम की एक नगरी थी । उसमें गुणधिप नाम का राजा राज्य करता था । …
बेताल ने राजा विक्रमादित्य को कथा सुनाने का क्रम जारी रखा | कर्मपुर नाम की एक नगरी थी। उसमें कर्मशील नाम का राजा राज्य करता था। उसके दरबार में अन्धक नाम का दीवान था । एक दिन दीवान ने कहा, …
राजा विक्रमादित्य की पीठ पर सवार होते ही बेताल ने उनसे कहा “तुम भी बड़े हठी हो राजन, मैंने तुम्हे बताया है कि वो तान्त्रिक तुम्हारा शत्रु है, तुम्हारे जीवन का प्यासा है फिर भी तुम उसकी सहायता के लिए …
बेताल ने विक्रमादित्य को अपनी प्रतिज्ञा याद दिलाते हुए अगली कहानी सुनाना प्रारम्भ किया | भोगवती नाम की एक नगरी थी । उसमें राजा अमर्त्यसेन राज करता था । उसके पास चिन्तामणि नाम का एक पालतू तोता था । एक …
राजा विक्रमादित्य भी अपनी धुन के पक्के थे | बेताल ने जैसे ही उनका कन्धा छोड़ा और वापस पेड़ पर जा कर लटका, वे वापस उसे लाने के लिए चल पड़े | विक्रमादित्य ने उसे पेड़ से उतारा, अपने कंधे …
अवतार का अर्थ सामान्य जन्म से नहीं है। अवतारी की तो जन्म-कर्म-जैसी समस्त लौकिक क्रियाएं दिव्य होती हैं। गीता में श्री भगवान ने अवतार के संबंध में समस्त जिज्ञासाओं का समाधान बड़ी स्पष्टता से किया है एवं कहा है “यद्यपि …
सम्राट विक्रमादित्य ने, असीम धैर्य का परिचय देते हुए, वापस पेड़ पर लौटने वाले बेताल को फिर से अपनी पीठ पर लादा और चल दिए उसी तान्त्रिक के पास, जिस तान्त्रिक ने उन्हें लाने का काम सौंपा था | कुछ …
अपनी धुन के पक्के सम्राट विक्रमादित्य ने, बिलकुल भी विचलित न होते हुए, वापस पेड़ पर लौटने वाले बेताल को फिर से अपनी पीठ पर लादा और चल दिए तान्त्रिक के पास, जिसने उन्हें लाने का काम सौंपा था | …
अपनी धुन के पक्के विक्रमादित्य ने, बिलकुल भी विचलित न होते हुए, वापस पेड़ पर लौटने वाले बेताल को फिर से अपनी पीठ पर लादा और चल दिए तान्त्रिक के पास, जिसने उन्हें लाने का काम सौंपा था | थोड़ी …
सम्राट विक्रमादित्य ने, अपने धर्म का पालन करते हुए, वापस पेड़ पर लौटने वाले बेताल को फिर से अपनी पीठ पर लादा और चल दिए उस तान्त्रिक के पास, जिसने उन्हें लाने का काम सौंपा था | थोड़ी देर बाद …