सिंहासन बत्तीसी की सातवीं पुतली कौमुदी ने, विक्रमादित्य की पिशाचिनी से मुलाकात और उसके दिव्य चमत्कारी, अन्नपूर्णा पात्र की कथा सुनायी

सिंहासन बत्तीसी की सातवीं पुतली कौमुदी ने, विक्रमादित्य की पिशाचिनी से मुलाकात

विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन ने राजा भोज की नींद उड़ायी हुई थी | वे जल्द से जल्द उस पर विराजमान …

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स्वर्ण सिंहासन की छठी पुतली रविभामा ने राजा भोज को सम्राट विक्रमादित्य के आतिथ्य-सत्कार की हैरान कर देने वाली कथा सुनायी

राजा भोज को अब तक सिंघासन बत्तीसी से निकलने वाली पुतलियों द्वारा सुनायी जाने वाली कहानियों को सुनने में आनंद …

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विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की तीसरी पुतली चन्द्रकला ने राजा भोज को पुरुषार्थ और भाग्य की कथा सुनायी

सिंहासन बत्तीसी की तीसरी पुतली चन्द्रकला ने राजा भोज को कथा सुनायी

विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन ने राजा भोज का कौतूहल बढ़ा दिया था | अब वे जल्दी से जल्दी उस पर …

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सिंघासन बत्तीसी की पांचवी पुतली लीलावती ने विक्रमादित्य के प्रजापालन व दानवीरता की कथा सुनायी

सिंघासन बत्तीसी की पांचवी पुतली लीलावती

विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन को प्राप्त करने के बाद, पांचवें दिन राजा भोज का रास्ता रोकने वाली लीलावती थी, जो …

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जब देवराज इंद्र का मान रखने के लिए विक्रमादित्य, अंतरिक्ष में भगवान् सूर्य के निकट गये, सिंहासन बत्तीसी की चौथी कहानी

जब देवराज इंद्र का मान रखने के लिए विक्रमादित्य, अंतरिक्ष में भगवान् सूर्य के निकट गये, सिंहासन बत्तीसी की चौथी कहानी

चौथे दिन फिर राजा भोज, सम्राट विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान होने के लिए बढे, तो उनका रास्ता सिंहासन …

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सिंघासन बत्तीसी की दूसरी पुतली चित्रलेखा ने राजा भोज को विक्रम और बेताल की कथा सुनायी

सिंघासन बत्तीसी की दूसरी पुतली चित्रलेखा ने राजा भोज

जमीन की खुदाई से निकले विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की दूसरी पुतली ने राजा भोज को विक्रम और बेताल की …

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सिंघासन बत्तीसी की पहली पुतली रत्नमंजरी द्वारा कही गयी, सम्राट विक्रमादित्य के जन्म, शंख से युद्ध तथा स्वर्ण सिंहासन प्राप्त होने की कथा

सिंघासन बत्तीसी की पहली पुतली रत्नमंजरी

अपने राज्य में खुदाई द्वारा प्राप्त हुए उस अद्भुत, दिव्य राज सिंहासन पर आरूढ़ होने के लिए राजा भोज जैसे …

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क्या महर्षि च्यवन के पौत्र ऋषि रुरु ने अपनी आधी आयु, अपनी मृत पत्नी को दे कर उसे जीवित किया था और क्या रुरु ने ही अपनी, सर्पों के विनाश की प्रतिज्ञा के चलते महर्षि सहस्त्रपाद को सर्पयोनी से मुक्त किया था

क्या महर्षि च्यवन के पुत्र ऋषि रुरु ने अपनी आधी आयु

उग्रश्रवा जी कहते है “ब्रह्मन् ! भृगु पुत्र च्यवन ने अपनी पत्नी सुकन्या के गर्भ से एक पुत्र को जन्म …

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जब मयासुर दैत्य द्वारा रचित दिव्य, अद्भुत त्रिपुरों के नाश के लिए भगवान शिव ने योद्धा का रूप धारण किया और उनके रथ के सारथी बने भगवान ब्रह्मा जी

जब मयासुर दैत्य द्वारा रचित दिव्य, अद्भुत त्रिपुरों के नाश के लिए भगवान शिव ने योद्धा का रूप धारण किया

एक बार दुर्योधन ने कर्ण के विषय में समझते हुए राजा शल्य से कहा “महाराज शल्य ! पूर्वकाल में महर्षि …

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