सूर्य भगवान कौन हैं और उनके 12 नाम क्या हैं

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‘अवतार’ शब्द ‘अव’ उपसर्गपूर्वक ‘तृ’ धातु में ‘घ´’ प्रत्यय के संयोग से निष्पन्न हुआ है, जिसका शाब्दिक अर्थ है – अपनी स्थिति से नीचे उतरना। इसके विभिन्न अर्थ भी हैं , जैसे – उतार, उदय, प्रारम्भ, प्रकट होना इत्यादि। जैसे …

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श्री रामानन्दाचार्य जी एवं बारह महा भागवतों की कथा

श्री रामानन्दाचार्य जी एवं द्वादश महाभागवतों का अवतार

भगवद्वचनों के अनुसार अधर्म में विशेष वृद्धि के कारण जगतरूपी भगवदीय बगीचा जब समय से पूर्व ही उजड़ने लगता है तो करूणावरूणालय प्रभु श्री राम कभी अदिति नन्दन, कभी देवहूति नन्दन, कभी  कौशल्या नन्दन तो कभी यशोदा नन्दन के रूप …

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दक्षिण भारत के संत रामानुजाचार्य की कथा

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श्री रामानुजाचार्य जी बड़े ही विद्वान , सदाचारी , धैर्यवान , सरल एवं उदार थे। यह आचार्य आलवन्दार (यामुनाचार्य) की परम्परा से थे। इनके पिता का नाम श्री केशव भटट था। ये दक्षिण के तिरूकुदूर नामक क्षेत्र में रहते थे। …

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देवी विन्ध्यवासिनी की लीला-कथा

देवी नन्दा (विन्ध्यवासिनी) की लीला-कथा

श्रीमद भागवत में एक कथा वर्णित है कि एक बार आततायी राजा कंस के भय से भयभीत होकर वसुदेव जी भगवान श्री कृष्ण को लेकर नन्द गोप यानी नन्द बाबा के घर में चल गये। वहां पहुंचकर उन्होंने बालक श्री …

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देवी रक्तदन्तिका कौन हैं

देवी रक्तदन्तिका

देवी भुवनेश्वरी ने हमेशा विविध प्रकार के अवतार – लीलाओं के द्वारा दुष्ट दैत्यों का शर्वनाश करके इस संसार को सदैव ही विनाश से बचाया है। देवी भुवनेश्वरी ने आर्तजनों को हमेशा ही कष्ट से दूर किया है। शुम्भ निशुम्भ …

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मधु-कैटभ के वध की कथा

मधु-कैटभ के वध की कथा

स्वारोचिष मन्वन्तर के समय की बात है। चैत्र वंश में सुरथ नाम के एक वीर राजा थे , जो राजा विरथ के पराक्रमी पुत्र थे। राजा विरथ बहुत ही दानी, धार्मिक और सत्यवादी राजा थे। राजा सुरथ के पिता विरथ …

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माँ ज्योति का अवतार

ज्योति-अवतार

एक बार जब देवताओं और दैत्यों में भयंकर युद्ध छिड़ गया और देवताओं को इस भीषण युद्ध में विजय प्राप्त हुई । युद्ध को जीतने के बाद देवताओं के हृदय में अहंकार की भावना उत्पन्न होने लगी । सभी देवता …

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महिषासुर वध की कथा

महिषासुर वध

प्राचीनकाल में महिषासुर नामक एक महा पराक्रमी असुर का जन्म हुआ था , जो रम्भ नामक असुर का पुत्र था एवं दैत्यों का सम्राट था। उसने युद्ध में सभी देवताओं को हराकर इन्द्र के सिंहासन पर अपना अधिकर जमा लिया …

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गंगा नदी के अवतरण की कथा एवम गंगा दशहरा का माहात्म्य

गंगा नदी के अवतरण की कथा

श्री गंगा के उत्पत्ति में मूल कारण तपस्या है । भारतीय संस्कृति में तप के महत्व को सर्वाेच्च माना गया है । तप द्वारा अकथनीय ऊर्जा की उत्पत्ति होती है। राजा भागीरथ ने हजारों वर्षों तक तपस्या कर ब्रह्मा जी …

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श्री वल्लभाचार्य जी कौन थे

श्री वल्लभाचार्य जी कौन थे

श्री महाप्रभु जी श्री वल्लभाचार्य जी अवतरित होकर इस धराधाम पर पधारे और उन्होंने अपने बताये भगवत्सेवा-स्मरण तथा ज्ञानोपदेश से दिग्भ्रमित भारतवासियों के जीवन को रसमय और आनंदमय बना दिया। उन्होंने अपने ‘चतुःश्लोकी’ में कहा है कि सच्चिदानन्द प्रभु श्री …

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