भ्रामरी देवी के अवतार की कथा
पूर्व समय की बात है, अरूण नाम का एक पराक्रमी दैत्य था। देवताओं से द्वेष रखने वाला वह दानव पाताल में रहता था। उसके मन में देवताओं को जीतने की इच्छा उत्पन्न हो गयी, अतः वह हिमालय पर जाकर भगवान् …
पूर्व समय की बात है, अरूण नाम का एक पराक्रमी दैत्य था। देवताओं से द्वेष रखने वाला वह दानव पाताल में रहता था। उसके मन में देवताओं को जीतने की इच्छा उत्पन्न हो गयी, अतः वह हिमालय पर जाकर भगवान् …
‘अवतार’ शब्द ‘अव’ उपसर्गपूर्वक ‘तृ’ धातु में ‘घ´’ प्रत्यय के संयोग से निष्पन्न हुआ है, जिसका शाब्दिक अर्थ है – अपनी स्थिति से नीचे उतरना। इसके विभिन्न अर्थ भी हैं , जैसे – उतार, उदय, प्रारम्भ, प्रकट होना इत्यादि। जैसे …
भगवद्वचनों के अनुसार अधर्म में विशेष वृद्धि के कारण जगतरूपी भगवदीय बगीचा जब समय से पूर्व ही उजड़ने लगता है तो करूणावरूणालय प्रभु श्री राम कभी अदिति नन्दन, कभी देवहूति नन्दन, कभी कौशल्या नन्दन तो कभी यशोदा नन्दन के रूप …
शास्त्रों में धर्म , अर्थ , काम तथा मोक्ष – इन चार पुरूषार्थ का सम्यक रूप से वर्णन हुआ है, परंतु भगवद्विमुख मानव – जीवन में भगवान के प्रति प्रेम का उदय एवं संवर्द्धन हो कैसे – ऐसे दिव्य सर्वसाधन …
भगवान सूर्य की स्तुति में भक्त प्रातःकाल प्रार्थना करते हुए कहता है कि ‘हे भगवान सूर्य! मैं आपके उस श्रेष्ठ रूप का स्मरण करता हूँ , जिसका मण्डल ऋग्वेद है, तनु यर्जुर्वेद है, किरणें सामवेद हैं तथा जो ब्रह्मा और …
अखिल विश्व ब्रह्माण्ड में भूलोक, भूलोक में भी जम्बू, प्लक्ष तथा क्रोच् आदि द्वीपों में जम्बू द्वीप; पुनः जम्बू – द्वीपान्तर्गत किम्पुरूष, कुरूमाल आदि वर्षों में भारत वर्ष श्रेष्ठ माना जाता है। भारत वर्ष का माहात्म्य यहाँ की सम्भ्यता और …
श्री रामानुजाचार्य जी बड़े ही विद्वान , सदाचारी , धैर्यवान , सरल एवं उदार थे। यह आचार्य आलवन्दार (यामुनाचार्य) की परम्परा से थे। इनके पिता का नाम श्री केशव भटट था। ये दक्षिण के तिरूकुदूर नामक क्षेत्र में रहते थे। …
सर्व व्यापक निर्गुण निराकार ब्रह्म अनुभवगम्य है। उसका प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होता, किंतु उसके साकार रूप सूूर्य का प्रकाश, नित्य ब्रह्म का प्रत्यक्ष प्रकाश् हैै। शत पथ ब्राह्मण में कहा गया हैे कि ‘असौ वा आदित्यो ब्रह्म अहरहः पुरस्तताज्जायते’ (7।4।1।14) …
श्रीमद भागवत में एक कथा वर्णित है कि एक बार आततायी राजा कंस के भय से भयभीत होकर वसुदेव जी भगवान श्री कृष्ण को लेकर नन्द गोप यानी नन्द बाबा के घर में चल गये। वहां पहुंचकर उन्होंने बालक श्री …
उत्कल प्रदेश पुरूषोत्तम अवतार प्रभु श्री जगन्नाथ जी की पुण्यलीलायों की भूमि है। नित्य लीला से युक्त उत्कल प्रदेश अपनी विश्ववन्द्य पुरूषोत्तम – संस्कृति के निमित्त विश्व में प्रसिद्ध है। पार्वती वल्लभ , श्री शंकर , गगनविलासी श्री सूर्य नारायण …