मौत का झपट्टा मारने वाली परछाइयों से घिरे खजाने की रहस्यमय गाथा


मौत का झपट्टा मारने वाली परछाइयों से घिरे खजाने की रहस्यमय गाथा
मौत का झपट्टा मारने वाली परछाइयों से घिरे खजाने की रहस्यमय गाथा

दुनिया भर के खज़ाना खोजियों (Treasure Hunters) के लिए अमेरिका (America) का एरिज़ोना (Arizona) किसी जन्नत से कम नहीं | संयुक्त राज्य अमेरिका (United State of America) के दक्षिण पश्चिम में स्थित एरिज़ोना, जिसकी राजधानी फीनिक्स (Phoenix) है, यूं तो अपने रेगिस्तानी मौसम और भयंकर गर्मी के लिए जाना जाता है लेकिन वहां के पहाड़ों और जंगलों में कड़ाके की ठण्ड पड़ती है |

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इसी वजह से अमेरिका के कई अन्य प्रान्तों की तुलना में वहां का मौसम ठंडा ही बना रहता है | यद्यपि राज्य की आधिकारिक भाषा इंग्लिश है लेकिन यहाँ स्पेनिश बोलने वाले काफी अधिक संख्या में लोग मिल जायेंगे |

अमेरिका के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में यहाँ, खोये हुए खजानों की कहानियाँ अधिक प्रचलित हैं | ये कहानियां यहाँ की हवाओं में बहती हैं | अगर आपकी इतिहास, पुरातत्व जैसे शब्दों में रूचि है तो एक बार आपको जरूर आना चाहिए यहाँ |

सोलहवीं शताब्दी (1510 से 1554) के स्पेनिश कांक्विस्टाडोर (Spanish Conquistador) Francisco Coronado के साहसिक खज़ाना खोजी अभियान रहे हों या फिर उन्नीसवीं शताब्दी के ओल्ड वेस्ट (Old West) दिनों में हुई भारी भरकम खजानों की लूट रही हो, रहस्यमयी खजानों की जीवंत कहानियाँ सुनकर आप भौचक्के रह जायेंगे |

लेकिन कहानियाँ तो…कहानियाँ ही होती हैं | इन्ही कहानियों पर भरोसा करके पाइलिन बीवर ने भी अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा दांव खेला था | उस दिन पाइलिन बीवर (Pylin Weber) के जीवन का सबसे रोमाँचक दिन था जब उसने अपने सामने वाले पहाड़ से स्वर्ण जैसी चमकती हुई धातु निकलते हुए देखा । उसका कैंप पहाड़ी से कुछ ही दूर पर था जहाँ बीवर के दूसरे साथी गहरी नींद में सो रहे थे ।

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बीवर को लगा वह सपना देख रहा है लेकिन जल्द ही उसे यथार्थ और भ्रम की दुनिया की सीमाओं का पता लग गया | वह अकेले ही उठकर ऊपर की तरफ गया और वहां उसने उस ‘रहस्यमयी’ लेकिन बेहद कीमती लगने वाली धातु के एक-एक टुकड़े इकट्ठे किये और नीचे अपने पड़ाव की ओर चलने के लिए खड़ा हुआ लेकिन तभी अचानक उसे अपने पैरों के नीचे की जमीन धँसती हुई जान पड़ी ।

उसे तुरंत समझ में आ गया कि ये पहाड़ उसे अपने आगोश में लेने वाला है | उसने देखा कि उसके कैंप का भी कहीं अता पता नहीं है और वह स्थान, जहाँ उसका कैंप था, जली हुई राख की ढेरी में परिवर्तित श्मशान जैसा लग रहा था । उसके द्वारा इकठ्ठा किये हुये सोने के ढेर सारे टुकड़े वहीं बिखर गये । भय से कांपते शरीर ने पसीना उगलने में देर न लगाई |

अपने पीछे से उठता हुआ निनाद सुनकर उसने फिर दृष्टि पीछे घुमाई तो उसके पूरे शरीर में बिजली सी कौंध गयी, उसे एक और विलक्षण दृश्य दिखाई दे रहा था । उसके पीछे, ऊपर पर्वत की चोटी पर से हजारों की संख्या में रहस्यमयी छायाएं उतर रही थीं और भयंकर आवाज के साथ उसी की ओर सेना के सिपाहियों की तरह दौड़ी चली आ रही थीं ।

अब तक अपनी सोचने समझने की क्षमता खो चुके बीवर के गले से सिर्फ एक चीख निकली…भयानक चीख ! और वह अचेत होकर वहीं ढेर हो गया । चेतना वापस लौटी तब वहाँ कुछ नहीं था । दिन का सूरज सर पर चढ़ आया था | लेकिन जेहन में सारी बात घूमते ही वह वहां से सरपट भागा । अपने जीवन में बीवर ने फिर कभी उधर जाने की हिम्मत नहीं की ।

इस घटना के ठीक 6 वर्ष बाद ऐसी ही एक घटना, उसी जगह पर, मैक्सिको के युवक डॉन पैलेटा (Donald Paleta) के साथ घटी, उसके भी सभी साथी इस अभियान में मारे गये थे लेकिन उसके भाग्य में जीवित रहना लिखा था इसलिए किसी तरह से वह स्वयं उन रूहों के शिकंजे से बचकर निकल सका ।

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अपने-अपने सदमों से उबरने के बाद पाइलीन बीवर और डॉनल्ड पैलेटा दोनों ने अपने संस्मरण छपवाए | तब लोगों को उस सोना बरसाने वाले उस रहस्यमयी पर्वत का पता चला । ये जगह, राजधानी फीनिक्स से चालीस मील पूर्व की तरफ, The Lost Dutchman’s Gold Mine के नाम से कुख्यात है |

इसके बारे में यहाँ तक कहा जाता है कि आज तक वहाँ सोने के लालच में जो भी गया जीवित नहीं लौट पाया जो जिन्दा लौटा भी वह वहाँ से सोने का एक टुकड़ा भी नहीं ला पाया है | बल्कि लाया है तो भय, हताशा, और सदमे का ऐसा पिटारा जिससे छुटकारा पाने में उसे सालों लग गए | एरिजोना का ये इलाका रुस के साइबेरिया प्राँत जैसा क्षेत्र है |

जिस तरह रूस के साइबेरियाइ क्षेत्र में कई तरह के रहस्यमयी विकिरण, दूसरी दुनिया से आने वाली रहस्यमय आवाजें और प्रकाश उसे विचित्र आश्चर्यों वाला क्षेत्र बना देती हैं (यहाँ उपस्थित दूसरी दुनिया में प्रवेश करने वाले दरवाजे के बारे में जानने के लिए क्लिक करें) उसी तरह से अमेरिका का एरिज़ोना भी अपने अनसुलझे और भयानक रहस्यों के लिए सारे संसार में प्रसिद्ध है |

यहाँ के विनस्लो (Winslow) के रेगिस्तान में एक बहुत बड़ा, लगभग 1.186 किलोमीटर लम्बा और 560 फीट की गहराई वाला क्रेटर (गड्ढा) है जो माना जाता है कि किसी उल्का पिंड के आघात से बना है । इससे बड़ा, लगभग 6 मील लम्बा और 700 फीट की गहराई वाला क्रेटर केवल कनाडा में है |

डॉनल्ड पैलेटा की यात्रा के वर्षों बाद तक बेहिसाब सोने के खजाने के लालच में दुनिया भर से सैकड़ों लोगों ने एरिजोना की यात्रा की इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका के ही युवक सबसे अधिक संख्या आये । लालच, एक ऐसी चीज है जो बड़े-बड़े लोगों को अपनी गिरफ़्त में ले लेती है | एक बार अमेरिका के ही एक प्रसिद्ध डाक्टर लॉरेन रवाली (Dr. Lauren Ravalli) भी उधर पहुँच गये ।

तमाम नक्शों से माथापच्ची करने के बाद डाक्टर लॉरेन किसी तरह से उस पहाड़ी के निकट तक पहुँचने में सफल हो गये | जैसा उन्होंने वर्णन किया है उसके अनुसार वहां पहुँचते ही उन्हें अनहोनी की आशंका होने लगी तभी उन्हें अपने चारो तरफ़ किसी बड़ी भारी चीज के घूमने की भयंकर आवाज सुनाई पड़ने लगी और पलक झपकते ही सैंकड़ों रहस्यमयी आकृतियों ने उन्हें घेर लिया ।

बाद में एक खोजी अभियान दल को उनका मृत शरीर मिला | उनके झोले में कुछ खाने की सामग्री और कुछ दस्तावेज़ थे | उनकी मौत को वहाँ के अखबारों ने प्रमुखता से छापा और इस घटना ने वहां सनसनी मचा दी ।

डाक्टरी जाँच से पता चला कि डाक्टर लॉरेन के शरीर का एक-एक बूँद रक्त चूस लिया गया पर यह कैसे हुआ यह कभी पता नहीं चल पाया । तब से इस पहाड़ को लोग खूनी पहाड़ भी कहते हैं ।

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इस पहाड़ की विचित्रताओं में कुछ नियमित प्रतिमान (Pattern) हैं | जैसे कि वह वर्ष में एक निश्चित समय पर ही सोना उगलता है | इसी तरह से वहाँ पर जितनी भी मौतें अब तक हुई वह दिन के ठीक 4 बजे हुई । 4 बजे ही इस चोटी की परछाई पृथ्वी को छूती है ।

विस्तृत जाँच करने पर पता चला कि यहाँ आकर जिस किसी की भी हत्या हुई उसकी मृत्यु, शरीर से एक-एक बूँद रक्त चूस लेने के कारण हुई जबकि पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में किसी के भी शव में किसी तरह के घाव या चोट का कोई निशान नहीं मिला |

आस्ट्रेलिया के एक युवक फ्रेंज तथा होनोलुलु के कुछ व्यापारियों की हत्यायें इसी पहाड़ के उन अनजान ‘रहस्यमयी शक्तियों’ द्वारा ही हुई जिनके बारे में कहीं कोई दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं है । सबसे रोमाँचक कथा जर्मनी के एक इंजीनियर वाल्ज की है जो भले ही इस पहाड़ के रहस्यों का पता न लगा पाया हो लेकिन अपनी साहसिक खोज में संघर्ष का तथा सोना प्राप्ति का सबसे अधिक आनन्द उसी ने पाया ।

जर्मन इंजीनियर वाल्ज उन दिनों एरिजोना की खदानों में काम कर रहा था | उसने सोना बरसाने वाले उस अद्भुत, रहसयमयी पहाड़ के बारे में सुन रखा था, उसकी कहानियाँ समय-समय पर उसे उद्वेलित करती और उसे उसका रहस्य खोजने के लिए प्रेरित करतीं ।

वाल्ज का अनुमान था कि उस खूनी पहाड़ी का रहस्य, दक्षिण-पश्चिम अमेरिका से लेकर मेक्सिको तक बसे हुए वहां के अपाचे कबीलों के प्रमुख तान्त्रिकों के इतिहास में ही छिपा हो सकता है क्योंकि वही लोग उसके आस.पास बसे थे | वहां के स्थानीय अपाचे, स्वभावतः बड़े लड़ाकू होते थे | गोरे अंग्रेजों से उन्हें बड़ी घृणा थी |

कई बार अमेरिकियों ने उनका विधिवत संहार किया था, जिससे उनके मन में गोरों के प्रति और भी तीव्र घृणा का भाव था | 1872 का अपाचे लीप (Apache Leap) विश्व प्रसिद्ध है जिसमें जॉन बाकर (John Baker) ने अपाचियों को बुरी तरह काटा था । इसके बाद अपाचियों के सरदार गैरोनियों ने गोरे अंग्रेजों पर गोरिल्ला हमले किये उन्हें नेस्तनाबूद करने के लिये |

चौदह साल बाद सन 1886 में जनरल नेल्सन ने अंतिम युद्ध किया और उन्हें पीछे धकेल दिया था | तब से माना जाता है कि अपाचे कबीले के कुछ प्रभावशाली लोग और तान्त्रिक उसी रहस्यमय पहाड़ पर शरण लिये हुये थे, जहाँ जो भी आज तक गया, ज़िन्दा वापस नहीं लौटा |

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अपने प्रतिदिन के जीवन से ऊबे हुए वाल्ज ने अपने काम को अंजाम देने से पहले पूरी प्लानिंग की | उसने अपाचे कबीले की एक सुन्दर युवती, जिसे वह केन टी नाम से बुलाता था, से प्रेम कर लिया और फिर उसी से शादी भी कर ली ।

यह एक बड़ी सफलता थी क्योंकि आदिवासियों का सद्भाव प्राप्त करने के बाद वाल्ज के लिए उस रहस्यमय पहाड़ तक आने जाने का रास्ता खुल चुका था | सबसे पहले उसने अपनी पत्नी केन टी से, उस सोना उगलने वाले पहाड़ का रहस्य जानने का प्रयास किया लेकिन जल्दी ही उसे मालूम पड़ गया कि केन टी ही क्या, लगभग सारे कबीले वाले उस पहाड़ के रहस्य से अनभिज्ञ थे केवल कुछ ही तान्त्रिक ऐसे थे जो इस रहस्य को जानते थे |

अपनी योजना पर आगे बढ़ने से पहले तक वाल्ज ने केन टी के सहयोग से काफी सोना इकट्ठा कर लिया था | फिर उसने जैकब विजनर नाम के युवक से मित्रता करके उसे अपनी टीम में शामिल कर लिया | इसके बाद सारी तैयारियाँ पूरी करके उस पहाड़ के अन्तरंग रहस्यों का पता लगाने का काम शुरू किया |

वह कई बार सामने से पहाड़ की ओर गया, जैसी कोशिश उससे पहले कई लोगों ने की थी, लेकिन हर बार वही भयावनी आत्माएं उसकी और झपटी और हर बार उसे जान बचाकर भागना पड़ा | उसके इन प्रयासों का पता, अपाचे कबीले के प्रभावशाली लोगों और तान्त्रिकों को भी चला, और उन्हें उसका दुस्साहस कतई पसंद नहीं आया |

इन्हीं प्रयत्नों के बीच वाल्ज की पत्नी केन टी का अपहरण कर लिया गया और अपाचियों ने उसे यातना देते हुए उसकी जीभ काट ली जिससे उसकी मृत्यु हो गई । अब हताश और निराश वाल्ज के लिए उस कबीले में कुछ नहीं बचा था | लेकिन उसने हार नहीं मानी और अपना रास्ता बदला |

लम्बा रेगिस्तान पार कर, इस बार वह पीछे से पहाड़ी के पास पहुँचने में सफल हो गया । रेगिस्तान के आगे मैदानी भाग में तम्बू गाड़कर वाल्ज, जैकब के साथ बाहर निकल कर अभी कुछ ही दूर जा पाया था कि उसे अग्नि की छोटी-छोटी सी ज्वालायें अपनी ओर बढ़ती हुई दिखाई दीं ।

रात का समय था, पर देखते-देखते वहाँ दिन का सा प्रकाश फैल गया लेकिन उस उजाले में विचित्र भयंकरता थी, मानो प्रलय काल का उदय हो रहा हो । दोनों वहाँ से सरपट भागे | पीछे से जलते हुए पत्थरों की बौछार हो रही थी लेकिन उन्होंने पीछे मुड़कर न देखने की कसम खा ली थी | तभी कुछ पत्थर उनके आस-पास गिरें ।

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वाल्ज ने भागते-भागते ही एक पत्थर को छुआ तो देखा वह पत्थर बिलकुल ठंडा था | अब वाल्ज रुक गया उसने पीछे मुड़कर देखा अब बरसने वाली लपटें भी शान्त हो चली थीं | इसलिये वह एक बार फिर पहाड़ की ओर चल पड़ा ।

उसे, उसकी पत्नी केन टी ने पहले बताया था कि पहाड़ के अन्दर जाने के लिए एक सुरंग जाती है जिसका दरवाज़ा पहाड़ के पीछे की तरफ ही था | वाल्ज को अपनी पत्नी की वो बातें याद थीं | उन्ही जानकारियों के सहारे, कुछ ही देर के परिश्रम के बाद वाल्ज उस सुरंग का दरवाजा खोजने में कामयाब हो गया ।

सहमे हुए क़दमों से, जैकब के साथ वह भीतर घुसा । वहाँ सुरंग में कुछ कमरे जैसे बने हुए थे | उसे वहाँ हजारों की संख्या में नर-कंकाल बिछे हुए मिले | कुछ का डील डौल सामान्य से काफी अधिक था | देखने से लगता था वह कंकाल हजारों वर्षों से पूर्व तक के रहे होंगे ।

आगे बढ़ने पर उन दोनों को वह विशालकाय गड्ढा भी दिख गया जहाँ से सोने का लावा निकलता था पर सोने के वास्तविक स्रोत का उसे कुछ भी पता नहीं चल सका और ना ही वहाँ से आगे बढ़ने का कोई रास्ता मिल सका । उस जगह की भीषण गर्मी की वजह से वहाँ एक-एक गुजरता हुआ पल भारी बीत रहा था उन पर |

वापस लौटने के दौरान एक जंगल के दलदल के पास उन्हें कबीले वालों ने देख लिया । जैकब को तो वहीं बेरहमी से मार दिया गया लेकिन वाल्ज किसी तरह से उनके चंगुल से बच निकला बाद में कुछ ही वर्षों बाद, 1961 में उसकी मृत्यु हो गई ।

उसके पीछे रह गयी तो केवल उसकी डायरी | उसी डायरी के सहारे उसके बाद बरेनी आदि ने भी यात्रायें की पर सोना बरसाने वाले उस पहाड़ के रहस्य का कोई पता न लगा सका ।

मौत का झपट्टा मारने वाली रहस्यमयी परछाइयाँ हो या असीमित सोना उगलने वाला वह विशालकाय गड्ढा, कोई नहीं जानता कि इन रहस्यों का मूल, किस बिंदु पर ले जायेगा !





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