बरमूडा ट्राएंगल के बारे में क्या वैज्ञानिक सच बोल रहे हैं, या वो परग्रही एलियंस की दुनिया में जाने का रास्ता है


बरमूडा ट्रायंगल के बारे में, दुनिया भर के साइंस जर्नल्स, पत्र पत्रिकाओं, समचार पत्रों आदि में काफ़ी कुछ लिखा जा चुका है | ये विषय अब केवल वैज्ञानिकों की ही दिलचस्पी का नहीं रहा बल्कि आम जनमानस भी इसमें पर्याप्त दिलचस्पी ले रहा है | इसके प्रमाण, इस पर बनने वाली डॉक्युमेंट्रीज़, हॉलीवुड फ़िल्में, एवं मैगज़ीन्स में छपने वाले हैरतअंगेज़ लेखों के रूप में बिखरे पड़े हैं |

क्या कहती है बरमूडा ट्रायंगल की थ्योरी ?

बरमूडा ट्रायंगल के बारे में आज कल के वैज्ञानिकों की जो थ्योरी है, जिसे आजकल मीडिया द्वारा भी दिखाया जा रहा है वह यह है कि बरमूडा ट्राएंगल पर विमानों और पानी के जहाजों के गायब होने का मुख्य कारण वहां उपस्थित मैग्नेटिक डिस्टर्बेंस, 250 किलोमीटर से भी तेज चलने वाले हवाई तूफ़ान और 50 फीट तक ऊपर उठने वाली समुद्री लहरें आदि हैं | तो क्या इतनी सारी भयानक और रहस्यमय घटनाओं के पीछे बस इतनी ही सच्चाई है ?

क्योंकि मुख्य प्रश्न यह हैं कि वहां का वातावरण प्रथम द्रष्टया इतना अशांत क्यों दिखता है ?

बरमूडा ट्रायंगल धरती पर स्थित एक ऐसी खतरनाक जगह है, जो अपने आस-पास से भी गुजरने वाली सभी समुद्री एवं हवाई जहाजों को लील लेता है | अमेरिका के फ्लोरिडा, बरमूडा और प्यूर्टो रिको से घिरा हुआ यह समुद्री क्षेत्र, दुनिया के सबसे खतरनाक क्षेत्रों में से एक है | इसके ऊपर से गुजरने वाली हर चीज के गायब हो जाने वाले रहस्य की खोज अब तक कई बार की जा चुकी है, लेकिन ये खतरनाक रहस्य अभी तक अनसुलझा है।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तव में बरमूडा ट्रायंगल से सम्बंधित, 100 प्रतिशत सत्य का खुलासा करना समाज में अशांति पैदा कर सकता है, इसलिए संबधित सरकारों एवं सक्षम अधिकारियों द्वारा कभी कभी उस सत्य की जगह अर्ध सत्य या कोई दूसरी काल्पनिक मनगढ़न्त स्टोरी भी सुनाई जा सकती है |

कई देशों के वैज्ञानिकों ने मिलकर इतने सालों में जो भी शोध कार्य (खोज) किये है वो उनके हिसाब से बेहद कीमती है और जैसा की मनुष्य स्वभाव होता है कि ज्यादातर मनुष्य अपनी मूल्यवान वस्तुओं को छुपा कर रखने में ही बुद्धिमानी समझतें है उसी सिद्धांत पर वैज्ञानिकों ने भी उन बहुत से सीक्रेट्स (रहस्यों)को आम जनता से साझा नहीं किया है |

लेकिन केवल यही एक मात्र कारण नहीं है इन जानकारियों को छुपा कर रखने का क्योंकि असल में मानवेत्तर (भौतिक दुनिया से परे) दुनिया के जितने भी अनुभव होते हैं वे आश्चर्यजनक होने की वजह से रोचक तो होते हैं लेकिन उतने ही खतरनाक भी हो सकते हैं अगर किसी गलत स्वभाव के एलियन से पाला पड़ गया या किसी मानव ने जाने अनजाने अपनी अधिकार सीमा को पार करने की गलती कर दी तो, अविश्वसनीय रूप से ख़तरनाक परिणाम निकल  सकते हैं |

कुछ वैज्ञानिकों को लग सकता है कि उन्होंने अब तक जो भी खोज की है वो बहुत यूनिक और एडवांस्ड है पर वास्तव में ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं है, क्योंकि कभी-कभी जो दिखता है, वो आभासी होता है, और सच्चाई आपसे कोसों दूर होती हैं |

ये एक सामान्य स्थापित सत्य है कि अधिक से अधिक बड़ी खोज के लिए अधिक से अधिक बड़े मार्गदर्शक की सहायता की आवश्यकता होती है |

 

क्या एलियंस मार्गदर्शक भी हो सकते हैं 

ये मार्गदर्शक कोई भी हो सकता है, कोई भी मतलब, कोई भी | अगर एलिएंस से सम्बन्ध स्थापित हो जाय तो एलियंस भी मार्गदर्शक की भूमिका अदा कर सकते हैं और बरमूडा ट्रायंगल जैसे बहुत से रहस्यमय पहलुओं के ऊपर से पर्दा उठा सकते हैं |

जितना ज्यादा शक्तिशाली एलियंस से सम्बन्ध स्थापित होता है उतनी ही हाई लेवल (उच्च स्तर) की जानकारी प्राप्त हो सकती है | मॉडर्न कल्चर में पले बढ़े वैज्ञानिकों में अगर कुछ विशेष आवश्यक पात्रताएं होंगी तो ही वे सर्वोच्च स्तर के एलियंस (जैसे – ईश्वर के गण आदि) की सहायता को प्राप्त कर पायेंगे अन्यथा उन्हें अधिक से अधिक कुछ उच्च स्तर के एलियंस (जैसे- ऋक्ष, यक्ष, दिक्पाल आदि) की ही सहायता मिल सकती है |

एलियंस की सहायता प्राप्त होने के पीछे एक और ध्यान देने वाला पहलू यह भी है कि धरती कभी- कभी युग परिवर्तन के आवश्यक दौर से गुजर रही होती है | ये परिवर्तन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला जैसे विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए, एक वृहद स्तर पर समग्र परिवर्तन जैसे भी हो सकते हैं | परिवर्तन के इन दौर में, क्षमतावान, विद्वानों, वैज्ञानिकों और राजनितिक हस्तियों को भी उच्च स्तर के एलियंस का सहयोग एवं सहायता प्राप्त होती है |

क्या एलियंस के संपर्क में आना ज़ोखिम भरा हो सकता है 

(जैसा कि पूर्व के कई लेखों में हमने बताया है कि सबसे ज्यादा शक्तिशाली अर्थात सर्वोच्च स्तर के एलियंस से स्थायी सम्बन्ध स्थापित करने के लिए किसी मनुष्यों के लिए कंपल्सरी व मिनिमम एलीजीबिलिटी क्राईटेरिया हैं – मांसाहार और मद्यपान से एकदम दूरी, उचित पात्रों की निःस्वार्थ सहायता अर्थात परोपकार की भावना और एक निम्नतम स्तर की मानसिक पवित्रता)

आज की तारीख में एलियंस के विषय में खोज करने वाले तो बहुत से विशेषज्ञ और खोजकर्ता हैं लेकिन उनमें से बहुत ही थोड़े से ऐसे हैं जो वाकई में अब तक किसी एलियन से संपर्क स्थापित कर पाने में सफल हो पाए हैं और जिन जिन मनुष्यों ने अपनी कड़ी मेहनत और अथक प्रयासों से किसी एलियन से सम्पर्क स्थापित कर पाने में सफलता प्राप्त कर ली है वे सभीमनुष्य, एलियंस से उनके सम्पर्क की बात को बहुत ही गुप्त रखने की कोशिश करते हैं |

वास्तव में एलियंस का सूक्ष्म संसार उम्मीद से कई गुना बढ़कर रहस्यमय है और ज्यादातर एलियन्स किसी मनुष्य के सम्पर्क में आने के बाद, उस मनुष्य का अपने रहस्यमय संसार से परिचय कराने से पहले ही उसे उन सभी रहस्यों को बेहद गुप्त रखने का सख्त आदेश और चेतावनी दे देते हैं, जिन्हे ऐसे मनुष्य गुप्त रखते भी हैं |

विभिन्न लोकों में रहने वाले अलग-अलग स्तर के एलियंस के सम्पर्क में रहने वाले ऐसे मनुष्य जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से एलियंस से नियमित या अनियमित सम्पर्क स्थापित कर लिया है (ना कि किसी संयोग से एलियंस का दर्शन या क्षणिक सम्पर्क प्राप्त किया है), वे अधिकांश मनुष्य एलियंस की हैरान कर देने वाली चमत्कारी भीषण शक्तियों की झलक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से देख चुके होते हैं इसलिए उनकी हिम्मत ही नहीं पड़ती है कि वे एलियंस के मना करने के बावजूद भी उनका रहस्य सार्वजनिक करने की गलती कभी कर सकें |

यही वजह है कि पिछले सैकड़ों, हज़ारों वर्षों से धरती पर एलियंस के हस्तक्षेप (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों) होने के बावज़ूद पिछले कई सालों से एलियंस सम्बंधित कोई भी अनुभव पूरी प्रमाणिकता से दुनिया के सामने नहीं आ सका है | जो जो भी मनुष्य एलियंस के नियमित या अनियमित सम्पर्क में हैं, उनमें से ज्यादातर की हिम्मत ही नहीं है कि वे अपने एलियंस के अनुभव को दुनिया के सामने स्वीकार सकें |

कुछ वर्ष पहले तक कुछ साहसी मनुष्यों ने अमेरिका आदि देशों में अति उत्साह में आकर एलियंस से सम्बंधित कुछ रहस्यों को सार्वजनिक करने का प्रयास किया था लेकिन ऐसा कर पाने से पहले ही वे मनुष्य रहस्यमय तरीके से मरे हुए पाए गए थे |

यहाँ तक कि कुछ विशेषज्ञों द्वारा यह भी आरोप लगाए जाते हैं कि अमेरिका के सबसे चहेते राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या के पीछे की असली वजह उनके द्वारा शुरू किया गया वो अभियान था जिससे सीक्रेट सोसाइटी और एलियंस के कुछ बड़े गुप्त राज आम जनता के सामने लीक (खुल) हो सकते थे | इससे सम्बंधित कुछ डॉक्युमेंट्रीज़, टीवी प्रोग्राम्स, विश्व के कुछ बेहद प्रसिद्ध टीवी चैनल्स पर दिखाए भी जा चुके हैं |

इन आरोपों में यह शंका जताई जाती है कि राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी को इस अभियान को रोकने के लिए अमेरिका की कुछ बेहद ‘ख़ास’ सीक्रेट सोसाइटी द्वारा चेताया भी गया था पर राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी द्वारा ना मानने पर, उनकी हत्या की साजिश को एलियंस ने ही इस प्रकार रचा था कि कभी भी कोई यह संदेह ना कर सके कि इसके पीछे किसी एलियन का भी हाथ हो सकता है |

इन आरोपों के अनुसार एलियंस ने राष्ट्रपति की हत्या अपने किसी दिव्य अस्त्र से नहीं बल्कि जानबूझकर कुछ मनुष्यों द्वारा करवाई और हत्या हो जाने के बाद, हत्या के कारण के बारे में भी कई तरह की अन्य आशंकाओं व अफवाहों का माहौल खड़ा करवाया ताकि किसी का दिमाग कभी इस तरफ ना जा सके कि उनकी हत्या के पीछे एलियंस की नाराजगी भी कारण हो सकती है तथा साथ ही साथ एलियंस ने इस हत्या को भविष्य के सभी अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए भी एक गुप्त सबक के रूप में पेश किया जिससे वे भी कभी एलियंस के रहस्यों को सार्वजनिक करने के बारें में गलती से भी ना सोचें |

यह एक विचित्र तथ्य है किन्तु इसकी वृहद और विस्तृत जांच होनी चाहिए और जांच से निकल कर आये तथ्यों को आम जनता के सामने भी रखना चाहिए | इन्ही सब खतरों को देखते हुए कुछ लोग एलियंस की अनजान और रहस्यमय दुनिया की तुलना माफियाओं के अंडरवर्ल्ड से करते हैं जिसके बारे में साधारण बातचीत तो हर कोई कर सकता है लेकिन उसके बारे में एकदम अंदर तक घुस कर खोजबीन सिर्फ वही करता है जिसे वाकई में इसका जूनून हो |

इसलिए एलियंस के रहस्य सार्वजनिक करने की हिम्मत वही मनुष्य दिखा सकते हैं जिनकी खुद की रक्षा, स्वयं ईश्वर के आदेश पर अच्छे स्वभाव वाले सर्वोच्च शक्तिशाली एलियंस करते हों |

क्या अच्छे और बुरे दोनों तरह के एलियंस होते हैं 

ये बात हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि जैसे मनुष्यों में अच्छे स्वभाव और बुरे स्वभाव वाले दोनों तरह के लोग होते हैं, वैसे ही एलियंस की लगभग सभी दिव्य प्रजातियों (नाग, यक्ष, गन्धर्व, किन्नर, किरात, विद्याधर, ऋक्ष, पितर, देवता, दिक्पाल आदि) में भी अच्छे स्वभाव और बुरे स्वभाव वाले दोनों तरह के एलियंस होते हैं |

अच्छे व दृढ़ स्वभाव वाले एलियंस कभी भी किसी मनुष्य के साथ कुछ भी बुरा नहीं करते हैं बल्कि हर सज्जन स्वभाव के स्त्री पुरुषों का उचित मार्गदर्शन खुद से करने की या किसी अन्य माध्यम से करवाने की हर संभव कोशिश सदैव करते रहते हैं |

कोई मनुष्य अगर किसी अच्छे स्वभाव वाले एलियंस के सम्पर्क में होने के बावजूद भी उनकी सलाह, या उनके निर्देशों को नहीं मानता तो भी वे अच्छे एलियंस उसको कभी कोई नुकसान नहीं पहुचाते, बल्कि उस मनुष्य के द्वारा बार बार अपनी अवेहलना होते देख, ज्यादे से ज्यादा बस उससे अपना सम्पर्क ख़त्म कर लेते हैं, और कुछ भी गलत नहीं करते क्योंकि उनका मानना है किसी के अच्छे/बुरे कर्मों का फल देना सिर्फ ईश्वर का काम है, ना कि उनका |

क्या भविष्य में हमें एलियंस की सहायता मिल सकती है 

कदाचित निकट भविष्य के आने वाले बेहद कठिन समय में, फिर से स्पष्ट रूप से (अर्थात सरेआम प्रकट होकर) अच्छे स्वभाव के एलियंस को मानवों की रक्षा व सहायता के लिए आना पड़ सकता है क्योंकि भविष्य में आने वाली आपदाओं में से एक आपदा यह भी हो सकती है कि निरीह और अल्प सामर्थ्य वाले मनुष्यों को बुरे स्वभाव वाले एलियंस का असहनीय कोप सार्वजनिक व खुले तरीके से झेलना पड़े |

यदि हम इतिहास में निगाह डाले पूर्वकाल में भी कई बार मनुष्यों का एलियंस से सबके सामने सार्वजनिक तरीके से युद्ध हो चुका है |इस प्रकार के कई युद्धों के वर्णन हमारे प्राचीन हिन्दू धर्म के ग्रन्थों में मिलते हैं | महाभारत का युद्ध इसका सबसे बड़ा उदाहरण था जहाँ मनुष्यों के पक्ष और विपक्ष में एलियंस (अर्थात नाग, यक्ष, गंधर्व आदि सभी से) ने स्पष्ट रूप से भीषण युद्ध किया था |

इस युद्ध के समय जगत नियंता, भगवान श्री कृष्ण इस धरती पर ही मौजूद थे | इतिहास के इस भीषणतम युद्ध के बाद श्री कृष्ण ने एक व्यवस्था स्थापित की थी कि आने वाले समय (अर्थात कलियुग) में एलियन्स सिर्फ किसी कल्याणकारी कार्य के लिए ही मानवों से सम्पर्क करें अन्यथा ना करें क्योंकि आने वाले समय के ज्यादातर मनुष्य जो मानसिक तौर पर बहुत कमजोर व स्वार्थी होंगे, एलियंस की चमत्कारी शक्तियों की मदद से अपने छोटे से छोटे फायदों के लिए दूसरे मनुष्यों का बुरा करने से बिल्कुल भी नहीं हिचकेंगे |

पर लगभग 5000 साल पहले भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा स्थापित की गयी यह व्यवस्था अब धूमिल पड़ती जा रही है जिसकी वजह से बुरे स्वभाव वाले एलियंस का मानवों के इस संसार में अब हस्तक्षेप लगातार बढ़ता जा रहा है जिसके कुछ प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष दुष्परिणाम मनुष्यों को अलग अलग तरीके से झेलने पड़ रहें हैं लेकिन अधिकाँश मनुष्य यह समझ ही नहीं पाते कि इन समस्याओं के पीछे बुरे स्वभाव के किन्ही अदृश्य एलियंस का हाथ भी हो सकता है |

भविष्य में बुरे स्वभाव वाले एलियंस का दुस्साहस यदि बढता है तो उन्हें रोकने के लिए अच्छे स्वभाव के एलियंस का विरोध भी बढ़ सकता है और इन्हे रोकने के लिए वे (अच्छे स्वभाव वाले एलियंस) धरती पर जन्म भी ले सकते हैं |

क्या ईश्वर अवतार ले सकते हैं 

लेकिन अगर इन अच्छे व बुरे स्वभाव वाले एलियंस के आपसी मतभेद में फिर से अगर कोई भीषण युद्ध छिड़ गया तो पृथ्वी को किसी अपूरणीय नाश से बचाने के लिए इसकी संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है कि परमसत्ता अर्थात ईश्वर खुद ही इस विकट स्थिति को सम्भालने के लिए फिर से पृथ्वी पर किसी ना किसी रूप में अवतरित हो जाए | ईश्वर के इस प्रकार के आकस्मिक प्रकटीकरण के विषय में पहले से कुछ नहीं कहा जा सकता |

ईश्वर सर्वशक्तिमान हैं इसलिए वो जो कुछ भी करना चाहते हैं, उसे निश्चित करके ही छोड़ते हैं तथा उन्हें क्या करना है और क्या नहीं करना है इसका निर्धारण या अनुमति कोई ऋषि, देवता, ग्रन्थ आदि नहीं करते या देते, बल्कि ईश्वर खुद ही करतें हैं इसलिए इनका एक नाम “स्वतन्त्र” भी है अर्थात अपनी इच्छाओं के पूर्ण मालिक |

अतः परमेश्वर को जब जब उचित लगता है तब तब वो अपने पूर्ण रूप में या अंश रूप में कहीं भी, किसी भी आकार में और किसी भी समय, बिना किसी पूर्व सूचना के अवतरित हो सकते हैं (जैसे – द्वापरयुग में श्रीकृष्ण के पैदा हो जाने से पहले तक बड़े बड़े ब्रह्मर्षि जो हर वेद पुराण के ज्ञाता और त्रिकालदर्शी कहे जाते थे, उनको तक को भी कोई पूर्व सूचना नहीं थी कि अभी स्वयं परमसत्ता इस पृथ्वी पर कहीं जन्म लेने वाली हैं) |

वास्तव में साकार ईश्वर की सारी योजनायें इतनी ज्यादा गुप्त होती हैं कि जब तक ईश्वर खुद किसी से ना बताना चाहें तब तक उसकी भनक कोई भी ग्रन्थ, ऋषि, देवता (एलियंस) आदि बिल्कुल नहीं पा सकते हैं, जिसका एक बड़ा उदाहरण है द्वापर युग में श्रीकृष्ण द्वारा की गयी वे कुछ गुप्त लीलाएं जिनके बारे में स्वयं ब्रहमांड के रचयिता ब्रह्मा जी तक को भी कुछ पता नहीं चल पाया था लेकिन श्रीकृष्ण के गोलोकधाम के गण और गणिकायें जो उस समय वृन्दावन में उनके सखा और गोपियों के साधारण रूप में पैदा हुए थे ,उन्हें उन गुप्त लीलाओं को जानने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ था |

जहाँ एक तरफ यह भी देखने को मिलता है कि ईश्वर अपनी लीलाओं में कभी अति साधारण काम (उदाहरण स्वरुप चैतन्य महाप्रभु की गुरु माँ जैसे भक्तों के घर में झाड़ू पोछा जैसे घरेलू काम करना आदि) भी करते हैं, वही दूसरी तरफ ईश्वर कुछ ऐसे परम दुर्लभ चमत्कारी काम (जैसे महारास नाम की परमदुर्लभ यौगिक क्रिया आदि) भी करते हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि ‘ना भूतो ना भविष्यति’ (अर्थात जो ना पहले कभी हुआ और ना ही कभी आगे हो पायेगा) |

महाभारत युद्ध से पहले श्री कृष्ण के अवतार का रहस्य 

बहुत कम लोग इस रहस्य को जानते हैं कि जब द्वापर युग में महाभारत नामक भीषण युद्ध से पहले स्थिति सँभालने के लिए परमसत्ता, श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लेने वाली थी तब उनके जन्म से ठीक कुछ क्षण पहले पूरी पृथ्वी को मानों काठ मार गया था क्योंकि हिरण्यगर्भ अर्थात ईश्वर जिनके खुद के गर्भ में अनन्त ब्रहमांड समायें हुए हैं, वे जब स्वयं पृथ्वी जैसे अति छोटे ग्रह के गर्भ में आने का प्रयास करने लगे तो पृथ्वी और (देवकी जी सहित) पृथ्वी के सभी प्राणियों को असहनीय बेचैनी होने लगी थी पर जैसे ही श्री कृष्ण पैदा हो गए वैसे ही पृथ्वी और सभी प्राणियों को अभूतपूर्व शान्ति प्राप्त हुई थी |

द्वापरयुग में ईश्वर द्वारा श्रीकृष्ण के रूप में लिया गया अवतार, एक पूर्ण अवतार (16 कलाओं युक्त) था तथा श्रीकृष्ण के इस अवतार के बाद, भगवान् ने कलियुग में 2 अवतार और लिए जो सबसे पहले शंकराचार्य अर्थात श्री आदि शंकराचार्य के रूप में और श्री गौतम बुद्ध के रूप में था पर ये दोनों अवतार ईश्वर के अंश रूप में थे चूंकि अज्ञान को ही इस कलियुग में सबसे बड़ा शत्रु कहा गया है अतः इसी अज्ञान के नाश के लिए, भगवान् कलियुग में शस्त्र अवतार की जगह, ज्ञान अवतार ही लेते हैं वास्तव में अवतार का सिद्धान्त बहुत ही जटिल है जिसे ना तो आसानी से समझा जा सकता है और ना ही समझाया जा सकता है |

भगवत गीता के अनुसार हरि ने अनन्त अवतार लिए हैं तो उनकी लीलायें भी अनन्त रहीं हैं अर्थात उनकी सभी लीलाएं एक ही जैसी नहीं बल्कि काफी कुछ एक दूसरे से भिन्न भिन्न (अलग अलग) रहीं हैं | परमसत्ता यदि फिर से इस पृथ्वी पर कहीं पूर्ण रूप में या अंश रूप में अवतीर्ण होने वाली होगी तो, ना जाने इस बार उनके आने से पहले या उनके आने के बाद प्रकृति में किस तरह की हलचल मचेगी |

द्वितीय विश्वयुद्ध में परग्रही एलियंस का हाँथ 

जहाँ तक बात है बुरे स्वभाव वाले एलियंस की तो इनसे सम्बन्धित आरोप दबी जबान में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भी लगाये गये थे कि द्वितीय विश्वयुद्ध में हिटलर के माध्यम से हुए भीषण रक्तपात के पीछे हिटलर का मानवी दिमाग नहीं बल्कि हिटलर को अदृश्य रूप से काबू में रखकर निर्देशित करने वाले बुरे स्वभाव वाले एलियंस का हाथ था | द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान होने वाली भीषण त्रासदी के पीछे दूसरी दुनिया के एलियंस का भी हाँथ था |

इन्ही सब पहलुओं को देखकर लगता है कि आज कि स्थिति वाकई में विचित्र हो चुकी है कि जहाँ एक तरफ वास्तव में एलियंस का हस्तक्षेप मनुष्य जीवन में बढ़ता जा रहा है वहीँ अधिकाँश मानव इन सबसे एकदम बेखबर अपनी छोटी बड़ी अभीप्साओं के पीछे ही भागने में व्यस्त हैं अतः अब यह आवश्यक हो चुका है कि एलियंस के बारे में आम जनता में फैलाये गए सभी भ्रमों का नाश करके, उनके बारे में सही जानकारी देकर आम जनता का भी एलियंस के प्रति अथेंटिक ज्ञान बढ़ाया जाए |

बरमूडा ट्रायंगल कहीं परग्रही एलियंस के आने का द्वार तो नहीं 

जहाँ तक बात बरमूडा ट्राएंगल की है तो, इसमें कोई संदेह नहीं कि यहाँ पर ऊपर लिखे हुए आंकड़ों के अनुसार तेज हवा, तेज समुद्री लहरें, मैग्नेटिक डिस्टर्बेंस आदि है पर यह सब क्यों है इसके बारे में कुछ वैज्ञानिक असलियत जानते हुए भी एकदम मौन है |

कुछ विशेषज्ञ ये बताते हैं कि यह बरमूडा ट्राएंगल कुछ और नहीं बल्कि एक इंटर डायमेंशनल पोर्टल है जिससे हमारे इस पूरे ब्रहमांड में कहीं भी आया जाया जा सकता है (बरमूडा ट्राएंगल के सिद्धांत और एलियंस से इसके संबंधों को और विस्तार से समझने के लिए हमारी इस केटेगरी , जिसका नाम अन्सिएंट एलियंस थ्योरी है, के अन्य आर्टिकल्स को भी पढ़ें) |

बरमूडा ट्रायंगल के एलियंस से सम्बन्ध

ऐसी भी सम्भावना हो सकती है कि एक तरफ जहाँ इस बरमूडा ट्राएंगल में फंसकर हमारे कई पृथ्वी वासी मनुष्य, दूसरे कई अनजान लोकों में पहुँच गएँ हैं वहीँ कई दूसरे अनजान लोकों के प्राणी भी इसी बरमूडा ट्राएंगल के माध्यम से हमारी इस धरती पर भी आ पहुँचे हों, जिनमे से कई मानव रूप में ही हमारी इस पृथ्वी पर गुमनाम जिंदगी जी रहें हों जो अपने रहस्य दूसरे मनुष्यों से कभी भी साझा नहीं करते हों क्योंकि पृथ्वी पर पहुंचते ही उन्हें नियंत्रक एलियन्स से सख्त निर्देश मिले हुए हों कि अपने रहस्य गुप्त रखो अन्यथा अनर्थ हो सकता है और कुछ तो परग्रह वासी ऐसे भी हो सकते हैं जो अपने पुराने ग्रह की सारी स्मृतियों को एकदम भूल चुकें हों और पृथ्वी पर इस तरह घुलमिल कर रह रहें हों मानों वे शुरू से ही पृथ्वी के निवासी रहें हों |

ब्रह्मांड में स्वतः हो जाने या इरादतन की जाने वाली कई रहस्यमय घटनाओं में से एक घटना यह भी होती है कि पृथ्वी पर बरमूडा ट्राएंगल के अलावा अन्य जगहों पर भी अचानक से विभिन्न आयामों के द्वार खुल जाते हैं जिससे दूसरे आयाम के एकदम अपरिचित जीव हमारे आयाम में आ जाते हैं या हमारे आयाम के जीव दूसरे अपरिचित आयाम में पहुँच जाते हैं |

दूसरे आयामों से पृथ्वी पर आये अपरिचित जीवों का जब इंसानों से आमना सामना होता है तो इंसान उन्हें एलियंस समझ लेते हैं | कभी कभी ऐसा भी होता है कि किसी इंसान के सामने किसी दूसरे अजनबी आयाम का द्वार अचानक से कुछ देर के लिए खुल जाता है जिससे वो इंसान उस दूसरे आयाम के एकदम अजनबी माहौल या अजनबी प्राणियों की झलक कुछ देर के लिए देखने में सफल हो पाता है | किन्तु ऐसा उस तरह से नहीं होता जैसा कि अक्सर फ़न्तासी फिल्मों में दिखाया जाता है, बल्कि इस प्रकार की अत्यंत दुर्लभ घटनाएं इतने सहज ढंग से होती है कि देखने वाले मनुष्य को लगता है कि अभी-अभी उसने जागते हुए स्वप्न देखा |

ये जानकारियां सुनकर ही कई लोगों को यह सब एक फ़िल्मी स्टोरी जैसा लग सकता है लेकिन वे लोग तब क्या कहेंगे जब उन्हें पता लगेगा कि एलियंस प्रेरित करके कोई मूवी भी बनवा सकते हैं | जी हाँ, यह बातें कई लोगों को अतिश्योक्ति, कल्पना या कोरी बकवास लग सकती है क्योंकि उन्हें यह वास्तविकता मालूम ही नहीं कि आखिर ईश्वर को परम रहस्यमय क्यों कहा जाता है ?

क्योंकि यह चराचर सृष्टि जो कि भगवान का ही प्रत्यक्ष शरीर है, उन्ही के समान एक से बढ़कर एक अंतहीन और अकल्पनीय रहस्यों से भरी हुई है | इन अकल्पनीय रहस्यों से जिस जिसका पाला पड़ता गया उन सब ने एक सुर में स्वीकारा कि वाकई में सच्चाई, कल्पना से भी परे, और रोमांचित करने वाली है |

धरती पर एलियंस कितने प्रकार के हो सकते हैं 

वास्तव में इस पृथ्वी पर एलियंस तीन तरीके से दिख सकते हैं एक तरह के एलियंस वे होते हैं जो मनुष्यों के बीच में मनुष्य (स्त्री या पुरुष) का ही रूप धरकर (भेष बदलकर) रहते हैं और मानवों की ही तरह सारे क्रियाकलाप जैसे ऑफिस जाना, खाना खाना, अन्य मानवों से दोस्ती कर हंसी मजाक करना और यहाँ तक कि स्मार्ट फ़ोन यूज करके फेसबुक पर अपने मनपसन्द एलियंस के आर्टिकल्स भी लाइक करना आदि भी करते रहते हैं |

पर समान्यतया वे 24 घंटे में एक बार कुछ देर के लिए ऐसे गायब हो जाते हैं जहाँ उन्हें कोई दूसरा मनुष्य चाहकर भी खोज नहीं सकता है | इस तरह के एलियंस किसी बड़ी घटना, परिवर्तन का कारण तो हो सकते हैं लेकिन ये हमेशा पीठ पीछे, सामान्य लोगों की नज़रों से दूर ही रहकर कार्य करना पसन्द करते हैं जिससे वे कम से कम प्रसिद्ध हो सकें |

दूसरे तरह के एलियंस वे होते हैं जो पृथ्वी पर हमेशा अपने वास्तविक रूप में ही रहते हैं लेकिन सामान्य मनुष्य उनका ओरिजिनल रूप बर्दाश्त नहीं कर सकते इसलिए वे अपने आप को अपनी यौगिक शक्ति से हमेशा अदृश्य रखते हैं जब तक कि कोई विशेष आवश्यकता ना पड़े |

तीसरे प्रकार के एलियन्स वे होतें है जो पृथ्वी पर विशेष कार्यों को पूरा करने के लिए अपने दिव्य लोक के दिव्य शरीर को त्यागकर पृथ्वी पर एक साधारण मनुष्य की भांति जन्म लेते हैं और सामाजिक उद्धार व परिवर्तन के दौर में उचित समय आने पर अपना ऐसा भीषण योगदान देते हैं कि पतन की ओर लगातार अग्रसर होता मूर्ख समाज (जो कि अपने आप को बुद्धिमान होने की ग़लतफ़हमी में रहता है) की दिशा और सोच तक बदल देते हैं |

किसी एलियन के सम्पर्क में रहने वाला मनुष्य दूसरे अपने समकक्ष एलियंस के संपर्क में रहने वाले मनुष्यों को पहचान सकता है लेकिन उन मनुष्यों को नहीं पहचान पाता हैं जो सर्वोच्च शक्तिशाली एलियंस (अर्थात ईश्वर स्वरुप, ईश्वर के गण) के सम्पर्क में हैं |

एलियंस के रहस्यों का उजागर केवल रोमांच का सुख प्राप्त करने के लिए नहीं है क्योंकि भले ही कई लोगों को यह अभी केवल समय की बर्बादी लगे, पर ऐसे सूक्ष्म संकेत यदा कदा दृष्टिगोचर हो रहें हैं कि भविष्य में मानवता की रक्षा के लिए अच्छे स्वभाव वाले एलियंस का प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करना जरूरी हो सकता है |

वास्तव में आम जनमानस को अचानक से किसी अकल्पनीय सच्चाई के बारे में पता चलने से, उनमें असहजता फ़ैल सकती है इसलिए कुछ बातें सिर्फ संकेतात्मक रूप से ही व्यक्त होती हैं और इन संकेतों के पीछे छिपे सन्देश को सिर्फ वही समझ पाते हैं जो इन अकल्पनीय सच्चाईयों को सहज तरीके से बर्दाश्त कर पाने की क्षमता रखते हैं और यह क्षमता भी उन्ही के पास होती है जिन्होंने सतत अच्छे कर्मों के अभ्यास से अपने अंदर एक न्यूनतम स्तर की मानसिक पवित्रता विकसित कर ली है |

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