तंत्र साहित्य में ब्रह्म के सच्चिदानन्द स्वरुप की व्याख्या
तंत्र विद्या केवल मारण, मोहन, विद्वेषण, उच्चाटन और वशीकरण तक सीमित नहीं है बल्कि इस प्रकार के अभिचार कर्म तंत्र का निकृष्टतम रूप हैं | ये तंत्र का विकृत रूप हैं जो भौतिकता से प्रेरित अपरा तंत्र के अंतर्गत आते …