भूत, प्रेतों, पिशाचों की रहस्यमय दुनिया इसी जगत में है


भूत, प्रेतों, पिशाचों की रहस्यमय दुनिया इसी जगत में हैभूत, प्रेतों की दुनिया इसी संसार में है, हमारे बिलकुल करीब | कई बार जैसे मनुष्य के भ्रम में भूत से सामना हो जाता है वैसे ही भूतों को भी भ्रम हो सकता है कि हम जीवित हैं या वो ! न्यू हैम्पशायर, उत्तर-पूर्व अमेरिका के न्यू इंग्लैंड क्षेत्र का ऐसा राज्य जिसकी सीमाएं दक्षिण में मेसाचुसेट्स (Massachusetts), पश्चिम में वेरमोंट (Vermont), पूर्व में अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean) और उत्तर में कनाडा (Canada) को छूती हैं |

1955 के आस-पास की बात है | मिस्टर स्मिथ उस रोज भी अपने लिए नया घर खरीदने के लिए निकले थे | अभी जहाँ उनका परिवार रहता था वो जगह ठीक नहीं थी | वो और उनका परिवार जल्दी-से-जल्दी नए घर में शिफ्ट होना चाहते थे | लेकिन समस्या यह थी स्मिथ का बजट सीमित था, वो बहुत अधिक पैसे नहीं खर्च कर सकते थे |

लगभग एक महीने की जद्दो-जहद के बाद उन्होंने एक मकान फाइनल किया लेकिन वो मकान लगभग सौ साल पुराना था | मकान बिलकुल जर्जरावस्था में था लेकिन उन्होंने परिवार के साथ उसमे प्रवेश करके उसके जीर्णोद्धार का कार्य प्रारम्भ किया | शुरू में तो सब कुछ सामान्य रहा, कहीं कोई विशेष दिक्कत नहीं हुई | लेकिन एक दिन एक भूतिया घटना घट गयी |

उस दिन मकान के उत्तर-पश्चिम कोने में बने बाथरूम की सफाई हो रही थी | वहाँ एक लोहे का बाथटब था, जो जंग लगकर एकदम झड़ चुका था | मजदूर उसी को हटा रहे थे | हटाने के दौरान एक मनहूस लेकिन डरावनी आवाज़ आई | मजदूर डर गए लेकिन फिर कुछ न होने से वो अपने काम पर लग गए |

उस बाथटब को हटाकर बाहर की तरफ रख दिया गया ताकि उसे बेचा या फेका जा सके | लेकिन उस दिन से ना जाने ऐसा क्या हुआ कि उस घर में एक-के-बाद-एक भूतिया घटनाएं होने लगी | उसी रात स्मिथ की सबसे बड़ी लड़की ‘मैरी’, जिसकी उम्र चौदह वर्ष थी, अपने कमरे में गहरी नींद सो रही थी |

अचानक उसे लगा कि किसी ने उसके पैरों को कसकर पकड़ लिया है | मैरी ने चौंक कर देखा, उसे कोई नहीं दिखाई दिया | भय से थरथराते शरीर के सारे रोमकूपों ने एकसाथ पसीना उगल दिया | हलक से निकलने वाली चीख ने पहले ही दम तोड़ दिया था | चेतना लुप्त होने से पहले मैरी ने, नाईट गाउन पहने एक बूढ़े को, उस बाथरूम की दीवार में समाते देखा जिसकी आज ही सफाई हुई थी | होश आने पर, अपने पूरे परिवार को उसने अपने पास देखा |

सभी चिंतित थे | मैरी के चेहरे पर आतंक का भाव था लेकिन उसने पूरे होश में रात की सारी घटना बताई | मैरी की छोटी बहन ट्यूलिप थी | वो चार साल की थी | अगले दिन उसने भी अपने बिस्तर पर लेटे हुए उस बूढ़े को सामने से गुजरते हुए देखा | भय से आतंकित ट्यूलिप भागते हुए अपनी माँ के कमरे में पहुंची | उखड़ी हुई सांसो के साथ उसने अपने माँ-बाप को सारी बात बतायी | उसने अपने पिता से कहा “पापा आप उस बूढ़े को भगा क्यों नहीं देते, वो उन दीवारों के पीछे छुप कर बैठा है” |

उसके बाद तो उस बूढ़े का भूत, उस परिवार में हर किसी को दिखा और ऐसी डरावनी घटनाएं लगभग रोज होने लगी | त्रस्त होकर स्मिथ परिवार ने, उस समय के प्रसिद्ध पैरानोर्मल घटनाओं के विशेषज्ञ ‘नार्मन गाथियर’ से संपर्क किया | नार्मन गाथियर, न्यू हैम्पशायर परमनोवैज्ञानिक शोध संस्थान (New Hampshire Institute of Paranormal Research) में एक अन्वेषक (Investigator) के तौर पर कार्यरत थे | अपने परिचितों में वो घोस्ट हंटर (Ghost Hunter) के नाम से विख्यात थे |

गाथियर ने स्मिथ को सहायता का वचन दिया और नियत समय पर अपने साथ दो और व्यक्तियों को लेकर वे स्मिथ के घर गए | उन दो व्यक्तियों में एक पादरी था जो एक्सोर्सिस्म (Exorcism) या झाड़-फूंक का काम करता था और दूसरा भूत और प्रेतात्माओं के आवाहन कार्यक्रम में माध्यम बनता था | इसके अलावा वे पूरे सामान और तैयारी के साथ आये थे | घर में घुसते ही गाथियर ने परिवार को बता दिया था कि यहाँ एक प्रेतात्मा का निवास है | इसकी पुष्टि उस पादरी ने भी की |

गाथियर ने अपना काम शुरू किया | अपने काम के दौरान उन लोगों ने स्मिथ और उसके परिवार को अपने से दूर रखा | लगभग अड़तालीस घंटे में अपना काम ख़त्म करने के बाद गाथियर ने स्मिथ को बताया उनको दिखने वाली प्रेतात्मा एक बूढ़े व्यक्ति फ़िलिप की है जिसकी 63 वर्ष की आयु में मष्तिष्क की नस फटने से मृत्यु हो गयी थी | वो इस घर का मालिक था |

जिस समय फ़िलिप की मृत्यु हुई वो बाथटब में नहा रहा था (वही बाथटब जिसे स्मिथ ने बाहर रखवा दिया था) | एक तेज़ दर्द से अचानक हुई मौत ने फ़िलिप को पता ही नहीं चलने दिया कि कब उसकी मौत हुई और कब वह भूत बनकर इस बड़े मकान में रहने लगा | कभी-कभी रात में उसे घर की छत पर टहलते देखकर लोगों ने रात में उधर जाना छोड़ दिया |

यह संयोग ही था कि स्मिथ को इस घर से सम्बंधित सत्य का पता नहीं चल पाया (या शायद स्मिथ ने घर लेने की शीघ्रता में उसके इतिहास के बारे में अधिक पता करना उचित नहीं समझा होगा) |

कई सालों बाद जब स्मिथ ने उस घर को ख़रीदा और उसका जीर्णोद्धार करना शुरू किया तो बूढ़ा फ़िलिप चौंका और उसे क्रोध भी आया कि ये लोग कौन होते हैं उसके घर में परिवर्तन करने वाले ? लेकिन जब उसका प्यारा बाथटब हटाकर वहाँ पर नया बाथटब लगाया गया तो उसके क्रोध की इन्तेहा हो गयी और उसने उन लोगों को दंड देने की ठानी |

गाथियर ने फ़िलिप से उसकी पत्नी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि “उसकी पत्नी एल्थिया शायद मर चुकी है क्योंकि वह कहीं दिखाई नहीं दे रही” | फिर गाथियर ने फ़िलिप से पूछा क्या वह भूत प्रेतों पर यकीन रखता है ? तो इसका फ़िलिप ने जवाब दिया कि “मै तो अपने घर में ही रहता हूँ, बाहर की दुनिया में क्या होता है मुझे नहीं मालूम” |

गाथियर से इतना सब कुछ सुनने के बाद स्मिथ ने एक गहरी, निराशा भरी श्वाँस छोड़ी और सोफे पर बैठे हुए दोनों हाँथों से अपना चेहरा ढँक लिया | उसे सब कुछ सपने जैसा लग रहा था | उसने एक विषाद भरी दृष्टी, पास बैठे अपने पूरे परिवार पर डाली और फिर गाथियर की तरफ़ मुख़ातिब होकर बोला “कोई उपाय है इसका”? |

गाथियर के चेहरे पर एक पेशेवर मुस्कान थी | उन्होंने स्मिथ को भरोसा दिलाया और कहा “आप चिन्ता मत करिए स्मिथ, हम कुछ-न-कुछ करेंगे” | फीकी ही सही लेकिन स्मिथ के चेहरे पर भी उस समय मुस्कुराहट आई |

उसी दिन रात को गाथियर और उसके साथियों ने बंद कमरे में एक्सोर्सिस्म (Exorcism) किया और उस बूढ़े फ़िलिप को कई प्रमाणों से यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वह मर चुका है और अब इस दुनिया का वासी नहीं रहा लेकिन उन्हें अपने काम में सफलता नहीं मिल रही थी | अचानक बूढ़ा फ़िलिप वहाँ से गायब हुआ और लगभग उसी समय वह स्मिथ और उसके परिवार को अपने सामने दिखा |

उसके चेहरे पर एक स्थिर लेकिन गहरे विषाद का भाव था | अपनी चाल में तेज़ी लिए वह उन लोगों के सामने एक कमरे के बंद दरवाजे में प्रवेश कर गया और फिर कभी नहीं दिखा | गाथियर और उनके साथियों को भी फिर कभी उस घर में किसी भूत या प्रेत के प्रमाण नहीं मिले |

चित्त में वासना और आसक्ति का भाव लिए इस दुनिया के जीवित प्राणी भी वस्तुतः प्रेत की ही तरह हैं फर्क सिर्फ इतना है कि उनके पास विवेक होता है जो की प्रेतात्माओं के पास नहीं होता | यानी सही-गलत के निर्णय का सही प्रकार से चुनाव करके, अपने जीवन को उन्नति के मार्ग पर डालकर आगे बढ़ने का मौका प्रतिक्षण होता है उनके पास | जो साधारण होते हैं उनके लिए इन मौकों का कोई विशेष महत्व नहीं, उनके लिए इन्द्रियभोग ही सब कुछ है लेकिन जो विशिष्ट होते हैं वो ऐसे मौकों को ईश्वरप्रदत्त मानते हैं | वो अपने आस-पास तो परिवर्तन लाते ही हैं, कभी-कभी दुनिया भी बदल देते हैं |