व्यासजी द्वारा पांडवों को द्रौपदी के पूर्वजन्म के बारे में बताना
परीक्षित नंदन जन्मेजय को महाभारत की कथा सुनते हुए वैशम्पायन जी कहते हैं-जनमेजय ! द्रौपदी के जन्म की कथा और उसके स्वयंवर का समाचार सुनकर पाण्डवों का मन उसे देखने के लिए बेचैन हो गया । उनकी व्याकुलता और द्रौपदी …