क्या हनुमान जी में इतना बल था कि वो रावण, कुम्भकर्ण आदि को पराजित करके उनका वध कर सकते थे ?
सृष्टि के संहारक भगवान रूद्र ही अपने प्रिय श्री हरि की सेवा का पर्याप्त अवसर प्राप्त करने तथा कठिन कलिकाल में भक्तों की रक्षा की इच्छा से ही पवन देव के औरस पुत्र और वानरराज केसरी के क्षेत्रज पुत्र हनुमान …