एक अधूरी दौड़, जो कभी पूरी नहीं हुई


एक अधूरी दौड़, जो कभी पूरी नहीं हुईवार्विकशायर, इंग्लैंड के लोगो में जेम्स वार्सन (James Warson) एक अच्छे धावक के रूप में प्रसिद्ध था | बिना रुके और थके, लम्बी दूरी तक उसकी दौड़ लगाने की क्षमता के बारे में सभी जानते थे | वो अक्सर अपने दोस्तों, जिनमे बरहम वाइज (Barham Wise) और हैमरसन बर्न्स (Hamerson Burns) प्रमुख थे, कहा करता था कि कभी-कभी वो लीमिंगटन से कोवेंट्री तक की 40 किलोमीटर की दूरी यूँ ही दौड़ कर पार कर लिया करता था | उसकी इस बात को अक्सर उसके मित्र हँस कर टाल दिया करते थे | वार्सन का मित्र हैमरसन बर्न्स एक फोटोग्राफर भी था |

एक रात जेम्स वार्सन और उसके दोनों मित्र बरहम वाइज तथा हैमरसन बर्न्स वहाँ की स्थानीय मधुशाला (Pub) से ड्रिंक कर के लौट रहे थे | जेम्स लगातार अपनी धावक क्षमता के बारे में तारीफ़ की बातें किये जा रहा था जो किसी हद तक उसके दोस्तों को पसंद नहीं आ रही थी | थोड़ी देर तक उसके मित्रों ने धैर्य पूर्वक उसको सुना उसके बाद चिढ़ के उसको अपनी बात सिद्ध करने की चुनौती दे डाली | हैमरसन ने उसको लीमिंगटन से कोवेंट्री तक की 40 किलोमीटर की दूरी दौड़ कर पार करने की चुनौती दी और बरहम वाइज ने भी इसका समर्थन किया |

बात अब वार्सन की प्रतिष्ठा की थी इसलिए उसे इस चुनौती को स्वीकार करना ही था | उस रात, घर तक का सफ़र तय करने के दौरान ही वार्सन का नशा काफ़ूर हो चला था |अगला दिन, 3 सेप्टेम्बर 1873 का था | उस दिन सुबह ही यह तय हुआ कि जेम्स वार्सन आगे-आगे दौड़ेगा और उसके पीछे हैमरसन और वाइज अपनी घोड़ागाड़ी से चलेंगे, इस तरह से ये बात भी सिद्ध हो जायेगी कि जेम्स वार्सन में वो क्षमता है और अगर, ईश्वर न करे, अगर कोई अनहोनी होती है तो सहायता के लिए दोनों मित्र अपनी घोड़ागाड़ी के साथ मौज़ूद रहेंगे |

प्रारम्भ में सब कुछ ठीक तरीके से चला | वार्सन प्रसन्न भाव से, दोस्तों से हंसी-मजाक करते हुए आगे-आगे दौड़ रहा था और उसके पीछे उसके दोनों मित्र अपनी घोड़ागाड़ी से चल रहे थे | बीच-बीच में वार्सन पीछे मुड़ कर देख लेता की उसके मित्र उसके साथ चल रहे हैं की नहीं और आश्वस्त हो कर दोगुने उत्साह से आगे की ओर दौड़ पड़ता | मौसम साफ़ और खुशनुमा था, हवा में कोई भारीपन भी नहीं था |

वार्सन कोई आठ किलोमीटर तक दौड़ा होगा, उसके मित्र उसके पीछे ही थे, लगभग बीस फीट पीछे कि अचानक से वार्सन लड़खड़ाया और उसके मुंह से एक ह्रदय को विदीर्ण कर देने वाली अमानवीय चीख़ निकली | वार्सन का शरीर अपना संतुलन खो चुका था लेकिन इससे पहले की वह धरती पर गिरता, वो हवा में ही ग़ायब हो चुका था | हैमरसन और वाइज को मानो काठ मार गया ! कुछ क्षणों तक उनको समझ में ही नहीं आया कि उनकी आँखों के सामने क्या हुआ ? उनका मित्र वार्सन, उनकी आँखों के सामने हवा में गायब हो चुका था |

दोनों मित्र हड़बड़ा के अपनी घोड़ागाड़ी से उतर कर उस ज़मीन पर पहुँच गए जहाँ उनका मित्र वार्सन ग़ायब हुआ था | वहां वार्सन के पैरों के निशान तो थे लेकिन वार्सन नहीं था, वार्सन वहां कहीं नहीं था शायद दूर आकाश में भी नहीं | बदहवास हुए हैमरसन और वाइज ने काफ़ी देर तक अपने मित्र को ढूँढा लेकिन वहां कुछ नहीं था, वो उस घड़ी को कोस रहे थे जिस मनहूस घड़ी उन्होंने वार्सन को चुनौती दी थी |

Ambrose_Bierceफिर उसके बाद वो पीछे आबादी की तरफ़ गए वहां लोगो को बताया तो उनके साथ काफ़ी संख्या में लोग आये उस ज़मीन की तरफ, वार्सन को ढूँढने लेकिन रात भर चले खोजी अभियान के बाद भी वार्सन का कोई पता न चला | इस घटना का ज़िक्र अमेरिकन लेखक अम्ब्रोसे बिएर्स (Ambrose Bierce) ने अपनी पुस्तक “कैन सच थिंग्स बी (Can Such Things Be?)” में An Unfinished Race के नाम से किया है | उनकी ये पुस्तक 1893 में आई थी |

जेम्स वार्सन का शरीर या उससे सम्बंधित कोई भी चीज फिर कभी नहीं मिली और इस दुखद किन्तु विचित्र घटना के कारण को समझने या समझाने का तार्किक आधार भी किसी के पास नहीं था | इतिहास के दूसरे अनसुलझे पन्नों की तरह ये पन्ना भी अपने अन्वेषक की प्रतीक्षा कर रहा है….

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