हस्तरेखा विशेषज्ञ कीरो का प्रेतात्मा से सामना


Cheiro-Rahasyamayaकीरो (Cheiro), वास्तविक नाम विलियम जॉन वार्नर (William John Warner) का जन्म 1 नवम्बर सन 1866 को हुआ था | बीसवीं शताब्दी के इस प्रसिद्ध भविष्यवक्ता को कौन नहीं जानता | हस्तरेखा, सामुद्रिक शास्त्र के द्वारा भविष्यवाणी करने वाले कीरो (Cheiro) की अपने समय में, लगभग पूरे विश्व में, धाक जम चुकी थी |

एक बार कीरो ने उस समय के प्रसिद्ध साहित्यकार ऑस्कर वाइल्ड (Oscar Wilde) की हस्तरेखाएँ देखी | शेक्सपीयर (Shakespeare) के बाद, पश्चिमी जगत में, सर्वाधिक चर्चित कोई उपन्यासकार हुआ है तो वो ऑस्कर वाइल्ड (Oscar Wilde) ही थे | ऑस्कर उस समय अपनी प्रसिद्धी की बुलन्दियों पर थे |

लेकिन कीरो ने उनकी हस्तरेखा देख कर बताया कि “पाँच साल के भीतर आपकी प्रसिद्धी मिट्टी में मिल जायेगी” | ऑस्कर भौचक्के होकर कीरो को देख रहे थे | कीरो ने आगे बताया “आपको देश छोड़ना पड़ेगा और जेल की सज़ा भी भुगतनी पड़ेगी” | उस दिन ऑस्कर ने उनको बहुत भला-बुरा कहा, उनका मजाक उड़ाया और उनको अपमानित किया |

लेकिन कीरो ने भविष्य देख लिया था, एक ऐसा भविष्य जिसे आने वाले समय में हर हाल में वर्तमान का रूप लेना था | 6 अप्रैल 1895 को ऑस्कर वाइल्ड (Oscar Wilde) यौन शोषण के आरोपों की वजह से गिरफ्तार हुए और 25 मई 1895 को जेल भेज दिए गए |

कीरो का रुझान बचपन से ही रहस्यवाद की तरफ था | उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ रहस्यवाद पर दर्जन भर से ऊपर पुस्तकें लिखी जिनका पूरी दुनिया में, अलग-अलग भाषाओँ में प्रचार प्रसार हुआ |

कीरो के पिता का जिस समय देहांत हुआ उस समय तक वे काफी कमजोर हो चुके थे | अपने अंतिम समय में वह कीरो को कुछ सौंपना चाहते थे लेकिन इससे पहले की ये सब कुछ हो पाता, उनके पिता की मृत्यु हो गयी | उस समय तक कीरो की प्रसिद्धी चारो तरफ फ़ैल चुकी थी |

इस घटना के कुछ महीनों बाद, एक दिन कीरो, प्रेतात्माओं के आवाहन के कार्यक्रम में बैठे हुए थे और वहां उनके पिता की प्रेतात्मा का आगमन हुआ | कीरो स्तब्ध थे |

उनके पिता की प्रेतात्मा ने उनको बताया कि उनके परिवार के कुछ पुराने और महत्वपूर्ण दस्तावेज़, लन्दन के डेविस एंड सन सोलिसिटर के ऑफिस में रखे हुए थे | उनका ऑफिस स्ट्रेंड के एक चर्च के पास एक पतली सी सड़क पर था, जिसका नाम उस समय वो भूल रहे थे | उन्होंने कीरो को आदेश दिया की वे वहां जाएँ और उन दस्तावेजों को ले आयें |

दूसरे ही दिन कीरो उस अंजान सड़क पर जा पहुँचे | काफी देर तक माथा-पच्ची करने के बाद आखिरकार उनको वो ऑफिस मिल गया जहाँ उन्हें जाना था | वहां पहुँचने पर कीरो को पता चला कि उसके पुराने मालिक तो मर चुके थे लेकिन उनके कारोबार को किसी नए वक़ील ने खरीद लिया था |

नए मालिक ने पहले तो साफ़ मना कर दिया कि इतने ज़ल्दी इतना पुराना दस्तावेज़ ढूंढ पाना संभव नहीं | लेकिन जब कीरो ने इस काम के बदले कुछ धन देने की बात कही तो उसने पुराने बंडलों में से, आधे घंटे परिश्रम करने के बाद, उनके दस्तावेज़ों को ढूंढ निकाला और कीरो को सौंप दिया |

उन दिनों पश्चिमी जगत के कई विद्वान भारतवर्ष की यात्रा पर आये | कीरो का रहस्यवाद के प्रति आकर्षण उन्हें पवित्र भारत-भूमि की तरफ खींच रहा था | आखिरकार कीरो भी इंग्लैंड से चलकर भारतवर्ष आये और यहाँ सात वर्ष रहे |

इन वर्षों में उन्होंने ज्योतिष तथा सामुद्रिक शास्त्र की शिक्षा तो ग्रहण की ही, साथ-ही-साथ कुछ रहस्यमय साधनाएं भी कीं | इनमे से यक्षिणी साधना तथा यक्षिणी सिद्धि का उन्होंने खुद ही ज़िक्र किया था |

भारतवर्ष रहस्यों का देश है, ज्ञान का देश है | सहस्त्राब्दियों पहले से यहाँ रोम, यूनान, मिस्र, चीन, जापान से लोग आते रहे हैं ज्ञान प्राप्त करने के लिए | यहाँ से ज्ञान प्राप्त करके जब वो अपने देश जाते तो वहां बड़ी सम्मान की निगाह से देखे जाते | लेकिन आज स्थिति सर्वथा विपरीत है |

भोगवाद का अँधेरा समाप्ति की तरफ है इसलिए अपने चरम पर है इसके बाद भगवान भास्कर पूरब से ही निकलेंगे | कोई आश्चर्य नहीं कि कल फिर वो दिन आएगा जब कोई पाइथागोरस, फाह्यान और कीरो फिर भारतवर्ष आयेगा अपनी ज्ञान-पिपासा तृप्त करने के लिए |

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