एलियंस का अड्डा कोंगका ला पास का सच

क्या आप विश्वास करेंगे कि हमारे देश भारत में ही एक ऐसा स्थान है जहां एलियन (दूसरे ग्रहों के लोग) अक्सर आते या प्रकट होते है। सोचिए आप वहां घूमने जायें और आपको वो एलियन मिल जाए, तो क्या करेंगे। शायद आप घबरा जायें या पूरी मिठास घोल कर बोलें एलियन जी, पधारो म्हारे देस। कितना रोमांचक क्षण होगा न एलियन से मिलना, तो आइए आपको बताते हैं भारत के कोंगका ला पास के बारे में, जहां अक्सर ही दिख जाते हैं एलियन!

कहां है कोंगका ला पास

भारत के लद्दाख क्षेत्र में बर्फीली पहाड़ियों से घिरा हुआ एक दर्रा है जिसका नाम है कोंगका ला पास। तिब्बती भाषा में ला शब्द का अर्थ है दर्रा। यह भारत और चीन की वास्तविक लाइन ऑफ कंट्रोल पर स्थित है अतः यह इन दोनों देशों के नियंत्रित क्षेत्रों के बीच में आता है। यह इलाका इसीलिए अक्सर विवादों में घिरा रहता है। आपसी समझौतों के तहत दोनों ही देशों की सेनाएं यहां पर गश्त नहीं लगा सकतीं, पर आज हम यहां इस विषय पर बात नहीं करने जा रहे हैं कि यह असल में किस देश की सीमा के अंतर्गत आता है। हम आज आपको इसके बारे में एक चौका देने वाली जानकारी देने जा रहे हैं।

क्यों है कोंगका ला पास वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र

कई वर्षों से यह वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यहां दूसरे ग्रहों से उड़नतश्तरी या UFO अक्सर आती है, तो यदि आप भी उड़नतश्तरी या UFO देखना चाहते हैं तो आप कोंगका ला पास जा सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यहां महीने में कई बार दूसरे ग्रहों से विमान आते हैं। ये सिर्फ झूठे दावे इसलिए नहीं हो सकते क्योंकि अलग-अलग समय पर एक नहीं बल्कि बहुत से लोगों ने इन विचित्र आकार प्रकार के विमानों से अजीब-अजीब आकृतियों के एलियंस को उतरते हुए भी देखा है। स्थानीय लोगों और सैलानियों की बात मानें तो यहां पर कई बार यूएफओ (एलियंस का विमान) देखे गए हैं।

सबसे कमाल की बात ये है कि अगर ये बात केवल वहां के स्थानीय नागरिक या सैलानी ही बोलते तो शायद कोई ज़्यादा ध्यान नहीं देता क्योंकि ऐसा देखा गया है कि सामान्य लोग तो किसी भी अजीब सी उड़ती हुई चीज़ को यूएफओ बोल देते हैं, पर इन एलियंस और उनके यूएफओ को देखने का दावा करने वाले लोगों में बड़ी संख्या उन वैज्ञानिकों की भी है जो यहां पर रिसर्च करने आते हैं।

यहां पर एलियंस के देखे जाने से जुड़े कुछ तथ्य

22 मार्च 2020, जब भारत की धरती पर थाली बजाने वाले दृश्य को देखने परग्रही एलियंस आये

यह इलाका सबसे पहले खबरों में सन 2004 में आया। उस समय इसरो के भू-वैज्ञानिकों का एक समूह यहां कुछ खोज करने में जुटा था। अपने सर्वेक्षण के दौरान उन्हें चमकदार रोबोट जैसी कोई वस्तु उड़ते हुए दिखाई दी और उन वैज्ञानिकों ने कई मिनटों के लम्बे वीडियो में उस उड़नखटोले की वीडियो भी बनाई, परंतु इस विषय पर दुनिया भर के वैज्ञानिक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सके कि उड़ने वाली वह वस्तु क्या थी।

यह बात और पुख्ता तब हो गई जब सन् 2006 में गूगल ने इसी क्षेत्र की एक सेटेलाइट पिक्चर में कुछ अजीबोगरीब चित्र दिखाए जिनको विशेषज्ञों ने माना कि ये संभवतः एलियंस भी हो सकते हैं।

 

एक बार फिर साल 2012 में यहां भारतीय सेना और एक इंडो-टिबेटेन जवानों (ITBP) की एक मिली-जुली टुकड़ी को पैंगोंग झील के ऊपर एक-दो बार नहीं बल्कि 100 से अधिक अलग-अलग समयों पर कुछ बड़े आकार की रहस्य्मयी और चमकदार पीले रंग की चीज़ उड़ती हुए दिखी जो सेना के अधिकारीयों के अनुसार अब तक के किसी भी छोटे वायुयान, ड्रोन या सैटेलाइट की परिभाषा में फिट नहीं बैठती थी। ये बहुत कम देर के लिए ही दिख कर तेज़ी से गायब हो जाती थीं। प्रधानमंत्री ऑफिस को सूचित किया गया और सेना ने इन घटनाओं को बक़ायदा दर्ज़ भी किया।

यही नहीं, भारतीय सेना ने इन उड़नखटोलों को राडार से भी ट्रैक करने का प्रयास किया और इनके पीछे अपने हाई पॉवर ड्रोन भी भेजे पर कुछ भी पता नहीं चल सका।

2012 में ही, पैंगोंग झील से लगभग 150 किमी दक्षिण में स्थित हानले में भारतीय खगोलीय वेधशाला के खगोलविदों की एक टीम ने तीन दिनों तक इन रहस्मयी पीले चमकदार उड़नखटोलों का अध्ययन किया। इस टीम ने भी उड़ने वाली वस्तुओं को देखा, लेकिन निश्चित रूप से एकमत नहीं हो पाए कि ये उड़ने वाली बड़े आकार की वस्तुयें क्या थीं। साथ ही, उन्होंने यह भी माना कि ये वस्तुएं “गैर-आकाशीय” ही लगती थीं।

परग्रही दुनिया की रहस्यमय उड़नतश्तरी जिसे सत्तर हज़ार लोगों ने देखा

क्यों नहीं पता चल पा रहा है कोंगका ला पास का सच

यह दर्रा काफी बर्फीला और दुर्गम है इसलिए यहां पर आप लोगों का पहुँच पाना बड़ा ही मुश्किल है। ठंड से पिघला देने वाली बर्फ दूर दूर तक फैली हुई है और इसलिए ही यहां पर घट रही रहस्यमई घटनाओं के बारे में कुछ विशेष खोज संभव नहीं हो पा रही है, परंतु इन रहस्यमई घटनाओं के बारे में जानने की कोशिश विश्व के कई वैज्ञानिक कर रहे हैं। अगर ये चीन से भेजे गए ड्रोन या कोई और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते तो एक बार तो पकड़े ज़रूर जाते क्योंकि भारत के पास भी अब शक्तिशाली ड्रोन और राडार हैं। शायद आने वाले समय में हमें कोंगका ला पास की सच्चाई का बेहतर तरीके से पता चल पाए।

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