चारो भाइयों में शेर बनाने का अपराध किसने किया?
सम्राट विक्रमादित्य ने, बिलकुल भी विचलित न होते हुए, तथा अपने धर्म का पालन करते हुए, वापस पेड़ पर लौटने वाले बेताल को फिर से अपनी पीठ पर लादा और चल दिए उसी तान्त्रिक के पास, जिसने उन्हें लाने का …
सम्राट विक्रमादित्य ने, बिलकुल भी विचलित न होते हुए, तथा अपने धर्म का पालन करते हुए, वापस पेड़ पर लौटने वाले बेताल को फिर से अपनी पीठ पर लादा और चल दिए उसी तान्त्रिक के पास, जिसने उन्हें लाने का …
स्वर्ण सिंहासन की छब्बीसवीं पुतली मृगनयनी ने राजा भोज को बताया कि राजा विक्रमादित्य न सिर्फ अपना राजकाज पूरे मनोयोग से चलाते थे, बल्कि त्याग, दानवीरता, दया, वीरता इत्यादि अनेक श्रेष्ठ गुणों के वे धनी थे । वे किसी तपस्वी …
राजा विक्रमादित्य ने, बिलकुल भी विचलित न होते हुए, वापस पेड़ पर लौटने वाले बेताल को फिर से अपनी पीठ पर लादा और बिना कुछ बोले चल दिए उसी तान्त्रिक के पास, जिसने उन्हें लाने का काम सौंपा था | …
राजा विक्रमादित्य ने, असीम धैर्य का परिचय देते हुए, वापस पेड़ पर लौटने वाले बेताल को फिर से अपनी पीठ पर लादा और चल दिए उसी तान्त्रिक के पास, जिसने उन्हें लाने का काम सौंपा था | थोड़ी देर बाद …
अपनी धुन के पक्के राजा विक्रमादित्य ने, बिलकुल भी विचलित न होते हुए, वापस उसी पेड़ पर लौटने वाले बेताल को फिर से अपनी पीठ पर लादा और चल दिए उसी तान्त्रिक के पास, जिसने उन्हें लाने का काम सौंपा …
विक्रमादित्य के स्वर्ण सिंहासन की आठवीं पुतली पुष्पवती ने राजा भोज को जो कथा सुनाई वह इस प्रकार थी | सम्राट विक्रमादित्य अद्भुत कला-पारखी थे । उन्हें श्रेष्ठ से श्रेष्ठ कलाकृतियों से अपने महल को सजाने का शौक था । …
बेताल ने विक्रमादित्य को कथा सुनाना प्रारंभ किया | प्राचीन काल में यमुना नदी के किनारे धर्मस्थान नामक एक समृद्ध नगर हुआ करता था । उस नगर में गणाधिप नाम का राजा राज्य करता था। उसी नगर में केशव नाम …
महाभारत के समय कुरुक्षेत्र में जब भगवान श्री कृष्ण ने, भीषण हथियारों के साथ, महाभयंकर कौरव सेना को युद्ध के लिए उपस्थित देखा तो उन्होंने कुछ सोचकर, अर्जुन से उनके हित के लिए कहा- हे अर्जुन तुम रणक्षेत्र में इन …
मैं और समीर बहुत अच्छे दोस्त हैं । काफी दिनों से समीर मुझे उसके गांव आने के लिए कह रहा था मुझे गांव में रहना अच्छा लगता था पर ऑफिस से छुट्टी मिलना मुश्किल होता है पर इस बार जब …
इस रहस्यमयी शक्ति का ज़िक्र पहली बार महाभारत में हुआ है | महाभारत में आई कथा के अनुसार एक बार गन्धर्वराज चित्ररथ अर्जुन से कहते हैं “अर्जुन ! राजा इक्ष्वाकु के वंश में कल्माषपाद नाम का एक राजा हुआ था …