खौफ़नाक रात की कहानी


khaufnak raat ki kahaniमैं और समीर बहुत अच्छे दोस्त हैं । काफी दिनों से समीर मुझे उसके गांव आने के लिए कह रहा था मुझे गांव में रहना अच्छा लगता था पर ऑफिस से छुट्टी मिलना मुश्किल होता है पर इस बार जब समीर ने मुझसे जोर देकर कहा तो मैं मना नहीं कर पाया और ऑफिस से छुट्टी लेकर मैं समीर के गांव पहुंच गया ।

समीर का गांव बहुत पिछड़ा हुआ था वहां अभी तक घरों में बिजली के कनेक्शन नहीं थे । मैं शाम तक समीर के घर पहुंच गया था खाना खाने के बाद हम दोनों घर की छत पर सोने के लिए चले गए गर्मी के दिन थे कमरे में बहुत गर्मी थी तो मुझे भी छत पर जाना ठीक लगा वैसे पहले मैं कभी खुले में नहीं सोया । थोड़ी देर तक हम दोनों इधर उधर की बातें करते रहे और कुछ ही देर में मेरी आंख लग गई ।

अचानक रात में मुझे कुछ घुटन सी महसूस हुई और मेरी आंख खुल गई मैंने देखा चारों तरफ सन्नाटा ,गहरा अंधेरा था समीर मेरे पास गहरी नींद में खर्राटे भर रहा था । कुछ देर बाद मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे सीने पर कोई भारी सी चीज रखी है मैं उठने की कोशिश करने लगा मैं उठ नहीं पा रहा था । ऐसा लग रहा था जैसे कोई चीज मुझे दबाए हुए थी ।

मुझे अचानक बहुत घबराहट होने लगी मैंने समीर को आवाज लगाने की कोशिश की पर मेरे गले से आवाज नहीं निकल पा रही थी । मैं कुछ भी समझ नहीं पा रहा मैं उठ नहीं पा रहा था बोल भी नहीं सकता था मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई मेरा गला दबा रहा है ।

मेरे सीने पर भारीपन सा महसूस हो रहा था मैं क्या करूं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था ऐसा लग रहा था की अब मैं नहीं बच पाऊंगा मेरी सांसी सांसे तेजी से चल रही थी दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था । समीर मेरे बगल में था पर मैं उससे कोई मदद नहीं ले पा रहा था । मैं अपने आप को जकड़ा हुआ महसूस कर रहा था ।

फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी और अपना पूरा जोर लगाकर मैंने उठने की कोशिश की पर मैं जितनी कोशिश करता मैं जितना जोर लगाता था उससे ज्यादा जोर वह चीज मेरे ऊपर लगा रही थी । मैंने कई बार पूरा जोर लगा कर उठने की कोशिश की पर नाकाम रहा मैंने फिर भी अपनी कोशिश जारी रखी मैं गले से जोर लगाकर बोलने की कोशिश करने लगा और मन ही मन अपने इष्ट को याद करने लगा ।

लगातार कोशिश करते हुए अचानक मेरे गले से एक जोर की चीख निकली बचाओ मुझे समीर समीर हड़बड़ा कर उठ बैठा और मेरे पास आकर मुझसे पूछने लगा क्या हुआ तुम्हें तुम ठीक तो हो मैं अभी कुछ बोल नहीं पा रहा था । समीर ने मुझे जोर से झकझोरा अचानक ऐसा लगा मैं जैसे मैं किसी जकड़न से छूट गया और मेरे ऊपर का बोझ हट गया ।

मैं बोल पा रहा था मैंने सारी बात समीर को बताई समीर सकते में था पर उसने मेरी बात पर अविश्वास नहीं किया । उसने मुझे बताया की गांव में ऐसी बहुत सी कहानियां मशहूर है बड़े बुजुर्ग सुनाते थे जिनमें भूत पिशाच के बारे में पता चलता है उसने बताया कि मैंने खुद गांव में ऐसे कई किस्से देखें जिनमें भूत पिशाच आम लोगों को तमाम तरीके से अपना शिकार बनाते हैं ।

हो सकता है तुम्हारे साथ जो कुछ हुआ वह ऐसी ही कोई चीज हो सकती है उस पूरी रात मुझे नींद नहीं आई थी हालांकि हम लोग नीचे कमरे में आ गए पर मैं सो नहीं सका और दूसरे दिन मैं वापस शहर लौट आया । आज भी जब भी कभी मुझे वो रात याद आती है मैं डर से सिहर उठता हूं और सारी रात सो नहीं पाता ।