श्री यंत्र का रहस्य

श्री यंत्र

श्री यंत्र रहस्य

श्री यंत्र के निर्माण के रहस्य को जानने का दावा करने वाले भी इसे न जान सके। कोई इसे चमत्कारी कहता है तो कोई टोना-टोटका। जिस व्यक्ति के पास जितना ज्ञान है़ उसी के अनुसार इस श्री यंत्र की व्याख्या करता है। इस यंत्र के निर्माण के सबंध में तरह-तरह की कथाएं प्रचलित हैं। कुछ विद्वान कहा करते हैं कि यह श्री यंत्र माँ लक्ष्मी ने स्वयं तैयार कराया है ।

जिससे धरती में रहने वाला कोई भी इंसान दरिद्र न बचे। क्योंकि माँ लक्ष्मी का ऐसा सोचना था कि श्री यंत्र के माध्यम से वह धरती के हर भक्त के घर में निवास कर सकें। ताकि धरतीवासियों को वह तमाम सुख और समृद्धि मिलें, जिनकी वह इच्छा रखते हैं। आज हम इस अदभुत श्री यंत्र के रहस्यों को खोजेंगे ।

हम इस बात की जानकारी प्राप्त करेंगे कि क्या घर में श्री यंत्र की स्थापना करनी चाहिए ? कौन से व्यक्ति लक्ष्मी यंत्र की स्थापना घर पर कर सकते हैं? इस श्री यंत्र की स्थापना का विधि-विधान क्या है? जिससे इस लक्ष्मी यंत्र की स्थापना के बाद घर या दुकान में धन लाभ का रास्ता खुल जाये और कभी बंद न हो।

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यंत्र क्या होता है

अधिकांश लोग मंत्र को जानते हैं जैसे गायत्री मंत्र, सूर्य मंत्र आदि। लेकिन कई लोगों की दृष्टि में यह यंत्र शब्द बिल्कुल नया है। वैसे तो हिंदी में यंत्र को अंग्रेजी में मशीन (Machine) कहते है, लेकिन यहां यंत्र का अर्थ मशीन से नहीं है।अध्यात्म विज्ञान के अनुसार यंत्र किसी मंत्र का ज्यामितीय रूप है या दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है यंत्र किसी मंत्र का चित्रात्मक स्वरूप है जो कुछ विशेष परिस्थितियों में मंत्र की तुलना में कई गुना शक्तिशाली होता है। विद्वान ज्योतिषाचार्यों के अनुसार,

यंत्र निःसंदेह देखने में वे आड़ी-तिरछी रेखाएं हैं लेकिन यह हमारे जीवन को सीधे सुख और समृद्धि की रास्ते पर ले जाती हैं ।

दूसरे शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि यंत्र, मंत्र का भौतिक स्वरूप है जो रेखा, बिंदु आकृति और अंकों से बनाया जाता है। यंत्र दो तरह के होते हैं एक वे जो की आकृति, रेखा और बिंदु की सहायता से बनाए जाते है और दूसरे यंत्र वे जिस पर अंक लिखे होते हैं।

पंडित श्याम सुंदर कहते हैं कि अंकों की तुलना में विशिष्ट आकृति वाले यंत्र अधिक शक्तिशाली होते हैं। जहां तक श्री यंत्र का प्रश्न है इसे यंत्र राज भी कहा जाता है, अर्थात यह यंत्रों का सम्राट है। श्री यंत्र अन्य यंत्रों की तुलना में सबसे अधिक शक्तिशाली यंत्र है क्योंकि इसकी स्थापना के पश्चात माँ लक्ष्मी स्वयं अपने भक्तों के घर में प्रवेश कर जाती हैं।

श्री यंत्र क्या होता है

श्री शब्द का अर्थ लक्ष्मी होता है़। ऐसा यंत्र, जो मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए बनाया गया हो, श्री यंत्र कहलाता है। श्री यंत्र दो प्रकार के होते हैं 1. उर्ध्वामुखी 2. अधोमुखी। ज्योतिष विज्ञान के पंडितों ने इन दोनों में से उर्ध्वामुखी श्री यंत्र को अधिक शक्तिशाली माना है। श्री यंत्र चित्र या पिरामिड किसी भी रूप में हो सकता है। श्री यंत्र को घर या दुकान में स्थापना के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अपने निवास या दुकान में स्थान दिया जाता है ।

श्री यंत्र को कैसे और कब स्थापित करें

श्री यंत्र को शास्त्रों के अनुसार विधि विधान से स्थापित करने पर ही लाभ प्राप्त होता है। अधिकतर व्यक्तियों का ऐसा ही मानना है कि श्री यंत्र की स्थापना का एक मात्र उद्देश्य धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना होता है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में श्री यंत्र होता है उस घर में मां लक्ष्मी की कृपा हो जाती है।

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लेकिन श्री यंत्र का उद्देश्य केवल धन लाभ करना नहीं बल्कि इसके स्थापना का उद्देश्य घर के बच्चों की पढ़ाई के प्रति एकाग्रता और शक्ति प्राप्त करना भी है। श्री यंत्र का उपयोग मार्ग दुर्घटना आदि से बचाव के लिए भी किया जाता है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है जिस व्यक्ति के पास यह श्री यंत्र होता है उसकी वाणी का ओज बढ़ जाता है तथा समाज में उसको  विशेष सम्मान मिलता है।

धन लाभ के लिए श्री यंत्र की स्थापना

यदि आप धन लाभ के लिए अपने घर में अथवा दुकान पर श्री यंत्र की स्थापना करने जा रहे हैं तो किसी भी शुक्रवार के दिन पूजा के स्थान पर सफेद स्फटिक से निर्मित श्री यंत्र को पिरामिड स्वरूप में साफ-सुथरी चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर श्री यंत्र को विराजमान करना चाहिए।

जहाँ  प्रतिदिन नहा धोकर नित्य दीपक जलाना चाहिए और पुष्प आदि अर्पित करना चाहिए। यदि श्री यंत्र के समक्ष पूरी श्रद्धा के साथ मां भगवती राजराजेश्वरी मंत्र पढ़ लिया जाए ऐसा माना जाता है मां लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती है।

अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए दुकान पर भी इस यंत्र के चित्र को दीवार पर लगाया जा सकता है। लेकिन यह श्री यंत्र का चित्र ऐसे स्थान पर लगाया जाना चाहिए जहाँ से यह यंत्र सदा दिखाई देता रहे। नित्य प्रातः नहाने धोने के पश्चात इस यंत्र के समक्ष नतमस्तक होकर अपना कार्य आरंभ करें तो माँ लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती हैं।

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एकाग्रता के लिए श्री यंत्र स्थापना

यदि आप अपने घर के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में एकाग्रता के प्रति चिंतित हैं तो यह अदभुत श्री यंत्र आपके बच्चों के लिए सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इस यंत्र को उस स्थान पर लगाएं जहाँ बच्चों का अध्ययन कक्ष हो। इस श्री यंत्र को बच्चों के कक्ष में उस स्थान की दीवार पर लगाया जाना चाहिए, जिस स्थान पर अधिकांश रूप से बच्चों की दृष्टि पड़ती हो।

अपनी पढ़ाई आरंभ करने से पहले बच्चे पहले इस यंत्र को देखें तत्पश्चात अपनी पढ़ाई-लिखाई शुरू करें। इस यंत्र को लगाने के बाद बच्चों की पढ़ाई के प्रति एकाग्रता में चमत्कारिक लाभ होगा। जहां तक संभव हो सके एकाग्रता के लिए लगाया जाने वाला श्री यंत्र का चित्र रंगीन होना चाहिए।

श्री यंत्र को गले में पहनने का रहस्य

आपने देखा होगा कि कुछ लोग इस श्री यंत्र को अपने गले में पहने हुए नजर आते हैं। जी हाँ, श्री यंत्र को गले में नेकलेस की तरह भी पहना जा सकता है। लेकिन इस यंत्र को हाथ की अंगुली या कमर में पहनना दोष पूर्ण माना जाता है़। जो लोग श्री यंत्र को गले में पहनते हैं तो ऐसी स्थिति में उन्हें मांस-मदिरा से दूर रहना चाहिए। यह श्री यंत्र जहां हमें दुर्घटना से बचाता है। हमारी वाणी में ओज उत्पन्न करता है। रात को सोते समय इस श्री यंत्र को निकाल कर रख देना चाहिए और सुबह नहा धोकर ही इसको धारण करना चाहिए।

श्री यंत्र के उपयोग में रखी जाने वाली सावधानियां

माँ लक्ष्मी के इस यंत्र का उपयोग करते समय उचित विधि विधान का ध्यान रखना चाहिए। नहीं तो लाभ के स्थान पर यह हानि पहुंचा सकता है। श्री यंत्र की स्थापना को स्वयं माँ लक्ष्मी की स्थापना के समतुल्य माना गया हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात 

श्री यंत्र को विधिपूर्वक अपने घर या व्यावसायिक स्थान पर स्थापित करने से पहले किसी योग्य विद्वान या अपने कुलगुरु अथवा पारिवारिक गुरु से परामर्श अवश्य ले लें और उन्ही के निर्देशानुसार, उनके संरक्षण में ही श्री यंत्र की स्थापना करें अन्यथा त्रुटियां होने पर हानि की सम्भावना बनी रहती है।