पश्चिमी देशों में घटित हुई पुनर्जन्म की घटनाएं


पश्चिमी देशों में घटित हुई पुनर्जन्म की घटनाएं
पश्चिमी देशों में घटित हुई पुनर्जन्म की घटनाएं

ऐसे देशों तथा संस्कृतियों में, जहाँ आत्मा की अमरता एवं जीव के पुनर्जन्म में लोगों का अखंड विश्वास होता है (जैसे भारतवर्ष), उन देशों की तुलना में जहाँ इन्हें मान्यता नहीं प्राप्त है, पुनर्जन्म की घटनाएं अधिक होती देखी गयी हैं | बावजूद इसके पश्चिमी देशों के मूर्धन्य विद्वानों के रहस्यपूर्ण साहित्य, वहां घटित हुई पुनर्जन्म की रहस्यमय घटनाओं के वर्णन से भरे पड़े हैं |

उदहारण के तौर पर न्यूयार्क में रहने वाली, मूल रूप से क्यूबा निवासी, २६ वर्षीया रशेल ग्रैंड (Rachel Grand) को अक्सर यह यह लगता था कि वह अपने पिछले जन्म में एक डांसर थी और यूरोप में रहती थी | उसे अपने पिछले जन्म में घटित घटनाओं की और भी स्मृतियाँ याद थीं |

काफी वर्षों की खोजबीन के बाद उसे अपने पिछले जनम के नाम के अनुसार खोज करने पर पता चला कि, उस समय से ६० साल पहले स्पेन देश में उसी नाम तथा अन्य विवरण, जो उसे याद थे, की एक डांसर रहती थी !

रशेल की कहानी का अधिक आश्चर्यजनक अंश वह था, जिसमे उसका कहना था कि ‘उसके वर्त्तमान जन्म में भी वह जन्मजात डांसर ही है और उसने बिना किसी के मार्गदर्शन अथवा अभ्यास के, हाव-भाव युक्त उम्दा नृत्य सीख लिया था !

ऐसी ही एक घटना ग्रेबियल की भी थी | यह आश्चर्यजनक घटना 32 वर्ष के ग्रेबियल उराइव नमक स्विजरलैंड के नागरिक की थी | वह स्विस रहन-सहन और पहनावे से बेहद असंतुष्ट और बेचैन था | उसे अक्सर लगता था जैसे वो कहीं और का रहने वाला हो | उसका अधिक लगाव गहरे रंग के लोगों की तरफ था |

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बड़े होने पर अपने यूरोपीय शहरों के प्रवास के दौरान एक बार वह स्पेन गया | वहां के अल्पकालीन प्रवास ने ही उसकी उद्विग्न अंतरात्मा को शांत कर दिया | वहां उसे जो अनुभव हुए वे जीवन की राह दिखाने वाले और रोमांचकारी थे | वहां उसने तन्द्रावस्था में अपने आप को अपने पूर्व जीवन में कोलंबिया निवासी एक राजनीतिज्ञ यू राफेल के रूप में देखा |

उसने अपने पूर्व जन्म की पत्नी सिकटा तूलिया तथा बच्चे इंडियन और मारिया को भी देखा | सन 1914 में कोलंबिया में एक कुल्हाड़ी से यू राफेल की हत्या कर दी गई | हत्यारे ने कुल्हाड़ी से उसके माथे पर एक प्राण घातक प्रहार किया था | आश्चर्य जनक रूप से राफेल के सिर पर जहां कुल्हाड़ी का प्रहार हुआ था, ग्रेबियल के माथे का वह भाग पूरी तरह से उभरा हुआ नहीं दिखाई देता था |

इसी प्रकार से एक अमेरिकी महिला श्रीमती रोजनबर्ग प्रायः एक शब्द “जैन” बोला करती थी, जिसका अर्थ ना तो वह स्वयं जानती थी और ना उसके निकट के लोग जानते थे । ये शब्द उनके मुख से अक्सर निकल जाया करता था | इसके साथ ही उन्हें आग से हमेशा एक अनजाना सा डर लगता था | इसके अलावा उनके जन्म से ही उनकी उंगलियों को देखकर ऐसा लगता था था कि जैसे वह कभी जल गई हो |

लेकिन उनके पूरे जीवन में कभी जलने आदि की कोई घटना नहीं हुई थी | एक बार वहां होने वाले जैन धर्म के एक सेमिनार में वह उपस्थित थी, तभी उनके साथ एक अभूतपूर्व घटना घटी | एकाएक श्रीमती रोजनबर्ग को एक हल्का सरदर्द हुआ और उनके पूर्वजन्म की घटनाएं उन्हें एक चलचित्र की तरह दीखने लगी |

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उन्होंने देखा की वह भारत के एक जैन मंदिर में रहा करती थी और आग लग जाने की आकस्मिक घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी | ऐसी ही एक घटना इटली की थी जहाँ फ्लोरेंस स्थित मेंटल हॉस्पिटल के अवकाश प्राप्त डायरेक्टर डॉक्टर गैस्टोंन उगोसियोनी ने एक चौंका देने वाला दावा किया |

उनका कहना था कि “इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि अपने पिछले जन्म में वे भारतवर्ष के चेन्नई के निकट महाबली पुरम के एक मंदिर के पुजारी थे” | वह बताते थे कि जब वह 7-8 वर्ष के बालक थे, उन्हें एक सपना आया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट देखा कि वह एक मंदिर के पुजारी हैं | यह सपना उन्होंने दो या तीन बार देखा होगा |

उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें उस समय तक महाबलीपुरम के बारे में कुछ भी नहीं मालूम था, और ना ही वहां के किसी संबंधित व्यक्ति को वह जानते थे | वास्तव में उन्हें भारत के विषय में ही अधिक नहीं पता था | डॉक्टर साहब ने बताया कि धर्म और दर्शन में उनकी रुचि थी | इसी रुचि के कारण उन्होंने भारतीय दर्शन की पुस्तकों का भी अध्ययन किया था |

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इन सपनो के बाद उनकी इच्छा भारत दर्शन करने की थी, लेकिन कुछ कारणों से वो उस समय भारत नहीं जा सके थे | अपनी भारत यात्रा का वर्णन करते समय उन्होंने बताया कि “6 वर्ष पहले मैं भारत आया था और पहली बार चेन्नई के निकट महाबलीपुरम के उस मंदिर में गया तो मुझे ऐसा अहसास हुआ कि जैसे वहां बहुत से मंदिर रहे होंगे जो समुद्र में बह गए होंगे” |

डॉक्टर साहब ने आगे लिखा कि “मंदिर को देखते ही उन्होंने उसे पहचान लिया | सबसे अद्भुत बात तो यह थी कि भारतीय धर्म और दर्शन में मेरी जो अत्यधिक सहज-स्वाभाविक रुचि थी वह निरंतर बढ़ती जा रही थी” | वह आगे लिखते हैं कि “जब मैं मंदिर में था, तो मुझे एक गहरे अपनेपन के भाव की अनुभूति हुई | उस समय यह अनुभूति बहुत ही तीव्र तथा स्वतः ही उत्पन्न हुई थी |

यह कोई सपना नहीं था, बल्कि जीता-जागता वास्तविक अनुभव था, जिसके कारण उन्हें सोचना पड़ा कि क्या वे पिछले जन्म में महाबलीपुरम मंदिर के पुजारी रहे होंगे?”| उन्होंने बताया कि भारत में उन्होंने अजंता की गुफाएं और अन्य बहुत सारे मंदिर देखे है, लेकिन इस प्रकार की अपनेपन की अनुभूति उन मंदिरों आदि को देखकर उस समय उत्पन्न नहीं हुई |

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भारत की तरह ही जापान जहाँ बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं, उस देश में पुनर्जन्म में विश्वास किया जाता है | वहां पुनर्जन्म की घटनाएं अक्सर सुनी भी जाती हैं | भारतवर्ष में, आत्मा की अमरता, भौतिक देह की नश्वरता और पुनर्जन्म तथा कर्मफल के सिद्धांतों की जड़ें बड़ी गहरी हैं |

आज का युग टेक्नोलॉजी का युग है | तेजी से बदलते इस युग में सारा संसार एक छोटा सा गाँव बन कर सिमट गया है जिसकी वजह से पुनर्जन्म की भारतीय मान्यताओं को सच होते पूरा विश्व देख रहा है |