चौसठ योगिनी मंदिर, प्राचीन गुप्त विद्याओं का केंद्र

चौसठ योगिनी मंदिर

हमारे देश में कुछ ऐसे महान प्राचीन मंदिर हैं जिनकी भव्यता का केवल हम अनुमान लगा सकते हैं। क्योंकि हजारों वर्ष पुराने इन मंदिरों की दीवारों से हम कुछ प्रतिशत ही जानकारी प्राप्त कर पाते हैं। लेकिन यदि हम समय यात्रा के माध्यम से उस समय में पहुंच जायें जिस समय ऐसे मंदिरों के निर्माण, अपने आध्यात्मिक कार्य के लिए चरम पर थे तो वास्तविकता का पता चल सकता है। ऐसा ही एक मंदिर है चौसठ योगिनी मंदिर।

चौसठ योगिनी मंदिर, प्राचीन गुप्त विद्याओं का केंद्र था 

जैसा की इस मंदिर के नाम से ही स्पष्ट है कि यह मन्दिर प्राचीन काल में रहस्यमयी शक्तियों के जागरण का केंद्र रहा होगा। यहां दैवीय शक्तियों को जागृत किया जाता रहा होगा। जी हाँ, इस मंदिर के प्राचीन निशान यह बताते हैं यहाँ प्रचंड ब्रह्मांडीय शक्तियों यानी योगिनियों को जागृत किया जाता रहा होगा। कहा जाता है कि प्राचीन काल में चौसठ योगिनी मंदिर में देश-विदेश से शक्ति साधकों का जमावड़ा लगता था। वह वर्षो तक इस मंदिर में रहकर योगिनियों को जगाते थे।

उस समय चौसठ योगिनी मंदिर रात-दिन तरह-तरह के मंत्रों से गूंजता रहता था। यह मंदिर किसी समय अद्भुत मांत्रिक शक्तियों एवं चमत्कारिक शक्तियों को सिद्ध करने का भव्य केन्द्र रहा होगा। आज भी चौसठ योगिनी मंदिर की सीढ़ियों पर पांव रखते ही किसी-किसी को ऐसा आभास होता है कि जैसे वह हवा में उड़ रहे हों। यह सब उन सब प्राचीन तंत्र मंत्र की शक्तियों का प्रभाव है जो यहां पहुंचने वाले महसूस करते हैं। कहते हैं कि आज भी इस मंदिर में मांत्रिक शक्तियों की उपस्थिति का आभास होता है।

कहाँ है यह चौसठ योगिनी मंदिर

भारत की चमत्कारिक आध्यात्मिक शक्तियों का प्रत्यक्ष प्रमाण, यह चौसठ योगिनी मंदिर मध्य प्रदेश की मुरैना जिले में स्थित है। यह वह स्थान है जो तीसरी और चौथी शताब्दी में नाग किंगन के शासन में था। मुरैना वह अदभुत स्थान है जहाँ आपको हर घर के मुंडेर पर नाचते हुए मोर देखने को मिल सकते हैं।

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यह यहां की मरूभूमि और वातावरण का प्रभाव है जहां भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर प्रसन्नता के साथ निवास करना पसंद करता है। क्योंकि दैवीय प्रभाव से तृप्त यहां की धरती हर किसी को सम्मोहित करती है। इतिहासकारों के अनुसार चौसठ योगिनी मंदिर का निर्माण 1323 ईस्वी में क्षत्रिय राजाओं के द्वारा कराया गया था। किन्तु वास्तविकता में ये इससे कहीं ज्यादा पुराना हो सकता है।

मंदिर का नाम चौसठ योगिनी क्यों रखा गया

इस अद्भुत मंदिर में 64 कमरे हैं और प्रत्येक कमरे में एक एक शिवलिंग स्थापित है। ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस मंदिर में भगवान शिव के चौसठ योगिनीओं का आवाहन किया जाता था। इस कार्य के लिए क्षत्रिय राजाओं ने अनेक पुजारियों की इस मंदिर में नियुक्ति की थी। उनकी यह अभिलाषा थी कि भारत की प्राचीन काल की जादुई विद्या को पुनः जागृत किया जाये। ताकि वे राजा अपने जटिल से जटिल कार्यों को आसानी से सिद्ध कर सकें और दुश्मनों पर सरलता से अपना प्रभाव जमा सकें ।

चौसठ योगिनी मंदिर निर्माण का उद्देश्य

कहा जाता है कि आठ सौ वर्ष पूर्व के आसपास इस क्षेत्र में शासन कर रहे क्षत्रिय राजाओं को प्राचीन भारतीय गुप्त विद्याओं में विशेष रुचि थी। वहाँ के विद्वान इनसे संबंधित प्राचीन पुस्तकों एवं साधनाओं के माध्यम से निरन्तर शोध कार्यों में रत रहा करते थे। उन्होंने साधनाओं द्वारा तमाम शक्तियां भी प्राप्त कर ली थी। कहते हैं कि वे, मध्य और पश्चिम एशिया से आये अपने विदेशी दुश्मनों से युद्ध करने में भी इन गुप्त विद्याओं का उपयोग करने से नहीं चूकते थे ।

भारत की प्राचीन चमत्कारिक शक्तियों की खोज एवं उनके विकास के लिए उन्हे ऐसे शिक्षा केंद्र की आवश्यकता थी जहां पुरानी पीढ़ी नई पीढ़ी को इन विद्याओं का ज्ञान दे सकें। इसलिए उन्होंने ऐसी शक्तियों से जुड़ी हुई तमाम साधनाओं एवं विद्याओं के शिक्षण, प्रशिक्षण के लिए चौसठ योगिनी मंदिर की स्थापना की। कहते हैं कि चौसठ योगिनी मंदिर के माध्यम से यहां के कुछ एक राजाओं ने तपस्वियों की भांति वह शक्ति प्राप्त कर ली थी जिससे वे अपनी साधना के प्रभाव से किसी को भी भस्म कर सकते थे।

चौसठ योगिनी मंदिर की बनावट

चौसठ योगिनी मंदिर को देखने से ऐसा आभास होता है कि यह मंदिर प्राचीन काल में यौगिक एवं मन्त्रिक शक्तियों का विशाल शिक्षा केंद्र रहा होगा। क्योंकि इस मंदिर की बनावट किसी शिक्षण संस्थान की तरह है। चौसठ योगिनी मंदिर में पहुंचने के लिए 200 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। यह मंदिर वृत्ताकार आधार पर स्थापित है। मंदिर के बीचो-बीच बने मंडप, यज्ञ संबंधी प्राचीनतम गतिविधियों के जीते जागते प्रमाण है। चौसठ योगिनी मंदिर को देखने से ऐसा लगता है कि यह किसी आधुनिक वास्तुकला का कोई नमूना है़। यह मंदिर 101 स्तंभों पर टिका हुआ है।

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मां काली का सिद्ध पीठ

चौसठ योगिनी मंदिर मां काली का सिद्ध पीठ था। जिसके कारण यहां की तंत्र-मंत्र की शक्तियों का प्रभाव चमत्कारिक था। कहते हैं कि प्राचीन काल में इस चौंसठ योगिनी मंदिर में हर समस्या का निदान होता था। कितना भी बड़ा से बड़ा रोग यहां की आध्यात्मिक शक्तियों के द्वारा दूर कर दिया जाता था। कहते हैं कि एक बार मध्य एशिया से आया एक विदेशी ‘अमीर’, जो यहां भ्रमण के लिए आया था, अचानक पक्षाघात (लकवा) से पीड़ित हो गया और उसकी आवाज आदि सब बंद हो गई।

संयोग से उस समय वह इसी क्षेत्र में था। तब उस विदेशी अमीर को उसके चाकर, उठाकर इस चौंसठ योगिनी मंदिर में लाये। चौसठ योगिनी मंदिर में लाने के बाद केवल कुछ क्षणों की प्रायोगिक साधनाओं एवं अद्भुत मंत्र- शक्तियों ने उस अमीर को पूर्णतया स्वस्थ कर दिया। वह विदेशी अमीर पालकी में लाया गया था लेकिन यहाँ की रहस्यमयी शक्तियों ने उसे अपने पांव पर चलने योग्य बना दिया।

उस अमीर की आवाज भी आ चुकी थी। वह हतप्रभ हो गया। जब चौसठ योगिनी मंदिर के चिकित्सकों ने उससे बोलने के लिए कहा तो वह ओम नमः शिवाय का जाप करने लगा। यह चमत्कार था इस चौंसठ योगिनी मंदिर का। इस तरह की अनेकों चमत्कारिक घटनाओं की कथाएं इस चौंसठ योगिनी मंदिर से जुड़ी हुई है ।

चौसठ योगिनी मंदिर का रहस्य

चौसठ योगिनी मंदिर जहां भगवान शिव द्वारा प्रदत्त रहस्यमयी शक्तियों को जगाया एवं सिद्ध किया जाता था। ऐसा कहा जाता है यहां की रहस्यमयी मांत्रिक शक्तियों ने इस मंदिर को वज्र की तरह शक्तिशाली बना दिया है। इसलिए हज़ारों वर्ष पूर्व में स्थापित यह मंदिर आज भी अपना अस्तित्व बनाए हुए है़।

कहते हैं कि इस क्षेत्र में कितनी ही बार भूकंप आया, जिसके कारण इस इलाके की तमाम अन्य इमारतें तहस-नहस हो गईं। लेकिन यह चौसठ योगिनी, जिसे भगवान शिव का आश्रय प्राप्त है़; आज भी अपने बीते कल की स्वर्णिम कहानी कह रहा है।