सूक्ष्म जगत के अनसुलझे रहस्य


सूक्ष्म जगत के अनसुलझे रहस्यहमारी दुनिया से दूसरी दुनिया में जाने के रास्ते कहीं दूर अंतरिक्ष में नहीं बल्कि यही हमारी दुनिया में ही हैं | प्रस्तुत घटना उन्ही रहस्यमय दरवाजों को प्रमाणित करती है | यह घटना 23 सितम्बर 1880 की है। टेनेसी (यू. एस. ए.) के एक किसान डेविड लैंगर का फार्म हाउस समनर काउण्टी में गैलेंटीन टाउनशिप से लगभग 20 किलोमीटर दूर था।

उस दिन सुबह से ही उमस कुछ ज्यादे ही थी | दोपहर को डेविड लैंगर अपनी पत्नी और दो बच्चों के सामने अपने लगभग चालीस एकड़ क्षेत्र में फैले खेत में गया और देखते ही देखते अचानक न जाने कहाँ गायब हो गया। जब यह सब कुछ हुआ, तब उसका भाई फार्म हाउस की ओर  ही बग्घी लिए आ रहा था।

उसके भाई ने  देखा कि डेविड चरागाह के मध्य से गुजर रहा है। वह उसे पुकारना चाह ही रहा था कि दूसरे ही पल डेविड गायब हो चुका था, मानो जमीन ने उसे निगल लिया हो। इस घटना के तुरंत बाद ही भाई और उसकी पत्नी बदहवास से उस स्थान पर पहुँचे, पर वहाँ जमीन में किसी प्रकार की कोई दरार नहीं दिखाई पड़ी जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि वह खेत में धँस गया हो और न ही ऐसा कोई दूसरा चिह्न मौजूद था, जिससे उसकी गायब होने के बारे में कोई अंदाज लगाया जा सके।

हर तरफ़ खोजबीन करने के बाद पुलिस में शिकायत कर दी गयी | बाद में पुलिस ने गहनता से उस स्थान की जाँच−पड़ताल की, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहा। इस घटना की जांच वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने भी की | भूगर्भ वेत्ताओं ने भी बारीकी से उस क्षेत्र की छान−बीन की, पर वो लोग भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सके। खोज कार्य महीनों चलता रहा, किन्तु किसी तरह का कोई सूत्र−संकेत ढूँढ़ा नहीं जा सका।

इसके लगभग दस महीने बाद, एक विचित्र घटना घटी | डेविड लैंगर के पुत्र−पुत्री एक दिन उसी घास के मैदान में घूम रहे थे जहाँ डेविड लैंगर गायब हुआ था | थोड़ी देर में उन्होंने देखा कि जिस स्थान से उनके पिता गायब हुए थे, वहाँ लगभग 20 फुट व्यास का एक बड़ा सा गोला बना हुआ था। उन किशोर वय बच्चों को कुछ समझ नहीं आया |

गोले के अंदर लम्बी−लम्बी जंगली घासें उगी हुई थीं। उन्होंने बारीकी से जांच पड़ताल शुरू की तो पता चला कि बाहर की घासों को तो पशु भली−भाँति चर चुके थे, किन्तु गोले के भीतर की इन घासों को खाने की हिम्मत किसी ने नहीं की थी। इसी बीच किसी अनजान कारण से लड़की चिल्ला उठी ”पिताजी! पिताजी !! क्या आप यहीं कहीं पास में हैं?”

चार−पाँच बार ऐसा कहने के बाद उसे अपनी पुकार के निरर्थक होने का आभास हुआ और वह वहाँ से चलने को ही थी कि अचानक एक स्वर सुनाई पड़ा, जिसमें सहायता की याचना थी। आवाज कहीं दूर से आती मालूम पड़ रही थी, पर वह इस दुनिया की नहीं थी। जब उन दोनों ने इसकी जानकारी अपनी माँ को दी, तो वह कई दिनों तक वहाँ आती और पुकारती रही।

उसे अपनी हर गुहार का जवाब मिलता, लेकिन परिणाम कोई उत्साह जनक नही रहा । धीरे−धीरे आवाज धीमी पड़ती गई और एक दिन बिलकुल बंद हो गई। वैज्ञानिक इस घटना की व्याख्या यह कहकर करते हैं कि ऐसा दो लोकों या ब्रह्मांडों के बीच की विभाजन−फलक (Dividing Plane) पर किसी छिद्र की उपस्थिति के कारण होता है।

दुर्भाग्य से यदि कोई व्यक्ति उस छिद्र के आस-पास भी पहुँच जाय, तो वह उससे खिंच कर किसी अन्य लोक या ब्रह्माण्ड में चला जायेगा, जहाँ से उसकी वापसी की संभावना नहीं के बराबर होगी, पर यदि किसी प्रकार ऐसा संभव हुआ भी, तो उस व्यक्ति की स्थिति वैसी ही होगी, जैसी किसी स्मृति−लुप्त व्यक्ति की, अर्थात् वह घटना से पूर्व, मध्य और पश्चात् की सारी बातें भूल चुका होगा।

एक अन्य संभावना प्रकट करते हुए वैज्ञानिक कहते हैं कि ऐसे व्यक्ति के लिए बाहर आने का एक दूसरा तरीका यह हो सकता है कि वह अतीन्द्रिय शक्ति से संपन्न हो। इस सामर्थ्य के द्वारा वह दो संसारों को अलग करने वाली दीवार में एक मानसिक शक्ति का धक्का लगाकर दरवाजा उसी प्रकार खोलने में समर्थ हो सकेगा, जिस प्रकार चाबी ताले को एक झटके के साथ खोल लेती है।

यदि कोई ऐसी विभूति अनजाने में अथवा असावधानी वश कभी दिक्−काल के भँवर में फँसी भी, तो वह उसी तरह उससे सुरक्षित बाहर आ जायेगी, जैसे गोताखोर समुद्र से, किन्तु इसके लिए उस द्वार को ढूँढ़ निकालना आवश्यक होगा, जिसके द्वारा वह उस दूसरे लोक में पहुँच गया। यदि इसमें वह असफल रहा, तो उससे बाहर निकलने में कभी किसी प्रकार से सफल न हो सकेगा।

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