राणा सांगा की रक्षा करते हुए सर्प का रहस्य

राणा सांगा की रक्षा करते हुए सर्प का रहस्यभारतीय “क्षात्र गौरव” को अक्षुण रखते हुए देश का मान बढ़ाने वाले इतिहास में प्रसिद्ध राणा सांगा को कौन नहीं जनता | आप में से अधिको ने राणा सांगा का, एक विशाल सर्प की छत्र-छाया में, जंगल की घास पर सोते हुए चित्र देखा ही होगा | इस चित्र को देखने वाले अधिकांश लोगों के मन में ये कौतुहल होता है कि आखिर इस चित्र का रहस्य क्या है? क्या ये राणा को अपना ग्रास बनाने आया था? या उनकी रक्षा करने ?

तो आइये जानते हैं, इस इतिहास प्रसिद्ध रहस्यमय घटना को | यह प्रसंग राणा सांगा के जीवन की ऐसी ऐतिहासिक घटना को जो इस चित्र में वर्णित है, उसके रहस्य से पर्दा उठाएगा | राणा सांगा की बाबर से मुठभेड़ होने से पहले ही सिसोदिया वंश में जन्मे इस सूर्यवंशी राजपूत के, पूरे चित्तौड़ के स्वामी बनने की भविष्यवाणी, राजपूताने के भविष्यवक्ताओं ने पहले ही कर दी थी |

लेकिन इस भविष्यवाणी का दुष्परिणाम ये परिणाम हुआ कि राणा सांगा के भाइयों ने ही उन पर प्राणघातक हमला कर दिया और उनको मारने के लिए अग्रसर हुए | परन्तु सनातन धर्मी राणा सांगा, राजगद्दी के लिए, अपने ही भाइयों पर प्रहार नहीं करना चाहते थे |

अतः वे राजपाट आदि सब कुछ छोड़कर तथा भाइयों से बचकर घायलावस्था में ही भाग निकले (ऐसी महानता सिर्फ सनातन धर्म में ही देखने को मिल सकती है) अपने ही भाइयों से अपनी जान बचाने के लिए सांगा कई वर्षों तक भेष बदल कर रहे और इधर-उधर दिन काटते रहे, जबकि वे वहां सबसे कह चुके थे कि उन्हें राजगद्दी नहीं चाहिए |

हर तरफ मारे मारे फिर रहे राणा सांगा ने इसी दौरान एक उत्तम घोड़ा ख़रीदा और उसे खरीदकर श्रीनगर (अज़मेर जिले में) के सेठ करमचंद परमार के यहाँ जाकर नौकरी करने लगे |

उन्ही दिनों इतिहास में एक प्रसिद्ध घटना घटती है कि एक दिन करमचंद, डाकुओं के खिलाफ़ अपने किसी सैन्य अभियान के बाद जंगल में आराम कर रहा था | उसी समय सांगा भी एक पेड़ के नीचे अपना घोड़ा बांध कर आराम करने लगे और थके होने की वजह से थोड़ी ही देर में उनको नींद आ गयी |

थोड़ी देर में उधर से गुजरते हुए कुछ राजपूतों ने देखा की सांगा सो रहे हैं और एक दिव्य आभा लिए हुए विशालकाय सर्प उनके ऊपर अपना फन फैलाकर छाया कर रहा है और उनकी रक्षा कर रहा है | यह अद्भुत दृश्य देख कर वे राजपूत स्तब्ध रह गए |

यह बात उन राजपूतों ने करमचंद को बताई तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और उसने खुद वहां जाकर यह घटना अपनी आँखों से देखी |इस घटना के बाद करमचंद को सांगा पर संदेह हुआ कि हो न हो, ये कोई महापुरुष है या किसी बड़े राज्य का उत्तराधिकारी | इस प्रकार से सोचते हुए उसने गुप्त रूप से रह रहे सांगा से अपना वास्तविक परिचय बताने का आग्रह किया |

तब सांगा ने उसे बताया कि वह मेवाड़ के राजा रायमल के पुत्र हैं और अपने भाइयों से अपनी जान बचाने के लिए गुप्त भेष में दिन काट रहे हैं | इसी ऐतिहासिक घटना के आधार पर बाद में किसी चित्रकार ने अपनी कल्पना के आधार पर राणा सांगा का पेड़ के नीचे सोते हुए चित्र बनाया जिसमे एक विशालकाय सर्प अपने फन रूपी छत्र से उनकी रक्षा कर रहा है |