यौवन के झरने का रहस्य

यौवन के झरने का रहस्यमनुष्य हमेशा से अज्ञात की ओर आकर्षित होता रहा है | जब से मनुष्य ने अपने आप को इस नश्वर दुनिया में पाया है, उसकी दो इच्छाएं सदा से उसको प्रेरित करती रही हैं अनुसन्धान के लिए- एक मृत्यु पर विजय प्राप्त करने की, दूसरी- सदा युवा बने रहने की |

एक तरफ जहाँ आज का विज्ञान इस असंभव से लगने वाले काम को संभव कर दिखाने में जी-जान से जुटा हुआ है वहीँ दूसरी तरफ अगर हम इतिहास में फैले तथ्यों और मिथकों पर नज़र डालें तो हमें “यौवन के झरने” के रूप में कुछ रहस्यमय विवरण प्राप्त होतें हैं |

यौवन का झरना, नाम से ही मन में कई संभावनाओं को खंगालता हुआ ये विषय पिछले कई हज़ार सालों से विद्वानों (इतिहास वेत्ताओं) के लिए रहस्य बना हुआ है |

चारो तरफ, विश्व की कई प्राचीन सभ्यताओं में इसकी कहानियां आपको मिल जायेंगी | इनमे से एक विवरण विश्व के प्रथम इतिहासकार (?) हेरोडोटस से जुड़ा है | यूनान के प्रसिद्ध इतिहासकार हेरोडोटस ने आज से कोई ढाई हज़ार साल पहले अपनी एक कृति में एक झरने का उल्लेख किया था |

उनके अनुसार ये झरना यौवन का झरना था और ये झरना “लैंड ऑफ़ मर्कोबियंस” (Land of Marcobians) नाम की एक रहस्यमय जगह पर था | उन्होंने लिखा है कि ये झरना वहां पर रहने वाले क्षेत्रीय निवासियों को असाधारण रूप से लम्बी आयु प्रदान करता था |

इसी प्रकार से यूनान के प्रसिद्ध विजेता अलेक्सेंडर के बारे में कहा जाता है की उसने अपने विश्व-विजय के अभियान के दौरान एक ऐसी खौफनाक और रहस्यमय जगह को पार किया जहां हमेशा के लिए अंधेरे का ही निवास था अर्थात उस जगह को अंधेरे ने सदा के लिए अपने आगोश में ले लिया था | उस जगह को “लैंड ऑफ़ डार्कनेस” (अंधेरे की धरती) कहते थे |

कहा जाता है कि इसी अंधेरे की धरती को पार करते समय अलेक्सेंडर ने उस तथाकथित यौवन के झरने को ढूंढ लिया था |

प्रसिद्ध धर्मयुद्ध (Crusade) के शुरूआती समय यानि ग्यारहवीं और बारहवीं शताब्दी के दौरान, इसी प्रकार ये बात प्रचलित थी कि उस समय के प्रसिद्ध विद्वान एवं राजा, जॉन प्रेस्टर एक ऐसी जगह शासन करते थे जहाँ वो कथित रूप से यौवन का झरना हुआ करता था |

यौवन के झरने का रहस्य1पंद्रहवीं शताब्दी में जब पश्चिमी देशों के सम्राट और वहां के धनी लोग अधिक धन एवं खज़ाने की चाहत में, धरती पर स्थित नई और अनजानी जगहों की तलाश में निकल रहे थे उस समय भी लोगों में यौवन के झरने का आकर्षण कम नहीं हुआ था | उस समय की नई दुनिया, यानि आज के अमेरिका को तब यौवन के झरने की संभावित धरती के रूप में सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था, विशेष रूप से कैरेबियन द्वीप समूह को प्रमुख दावेदार माना जा रहा था क्योंकि बहुत सारे कैरेबियन द्वीप निवासियों ने वहां पहली बार पहुँचने वाले अजनबियों को एक ऐसी खोई हुई धरती के बारे में बताया जो धन-धान्य से भरपूर अत्यंत समृद्ध नगरी थी |

उस जगह को लोग बिमिनी नाम से जानते थे | स्पष्ट है की ये जगह जो कोई भी थी लेकिन आज की बिमिनी से अलग थी | बाद में इस जगह के रहस्य को यौवन के झरने से जोड़ दिया गया और ये जगह एक किंवदंती हो गयी |

उन दिनों यौवन का झरना एक बहुत ही दिलचस्प विषय हो गया था जिसके बारे में सभी लोग बातें करना पसंद करते थे | लोग इसके बारे में ज्यादे से ज्यादा जानना चाहते थे | एक स्पेनिश इतिहासकार लोपेज़ डी गोमारा (Lopez De Gomara) ने एक ऐसी ही जादुई नदी या झरने का उल्लेख किया है जिसके जल के प्रभाव से बूढ़ा आदमी फिर से जवान होने लगता और अपनी युवावस्था को प्राप्त कर लेता | उसने इसका संभावित स्थान क्यूबा और हैती के उत्तर में स्थित एक द्वीप पर बताया |

एक इटैलियन भूगोल-वेत्ता “पिएत्रो मार्तायार्ड डी अन्घीरा” (Pietro Martired d Anghiera) ने, जो की स्पेन में रहते थे, इसका ज़िक्र किया है | सन 1513 में उन्होंने इस झरने के बारे में लिखा | उन्ही के शब्दों में – “हिस्पनिओला के उत्तर में स्थित द्वीपों में, इससे लगभग 975 मील दूर, जैसा की उसने बताया जिसने इसे खोजा था, एक लगातार कभी न रुकने वाला पानी का एक झरना है | उसके अद्भुत, अविश्वसनीय गुणों वाले पानी पिने के बाद, शायद कुछ स्वल्पाहार के बाद, बूढ़ा आदमी दोबारा से जवान हो जाता है”

यौवन के झरने को पाने की चाहत में होने वाली साहसिक खोजें एवं इतिहास में बिखरे पड़े तथ्य हमें बताते हैं की मामला केवल इंसानी इच्छाओं और कल्पनाओं का नहीं है बल्कि ये उससे कहीं आगे रहस्य की गोद में बैठे एक ऐसे यथार्थ का है जो आज भी हमसे कह रहा है कि आओ मुझे खोजो !