सिलाई मशीन के आविष्कार का रहस्य


सिलाई मशीन के आविष्कार का रहस्यआज घर-घर में सिलाई मशीन का प्रचलन है। कम ही लोग जानते हैं कि इसके आविष्कारक एलिआस हो, हैं | और उनसे भी कम लोग जानते हैं कि इस मशीन का आविष्कार उन्होंने कैसे किया | दरअसल इस मशीन को बनाने के लिए एलियास हो को घोर मानसिक यातनाएं सहनी पड़ी थी।

असल में हुआ यह था कि मशीन तो एलिआस हो द्वारा बना ली गई थी पर उन्हें यह नहीं समझ में आ रहा था की सुई में धागा कहाँ से डाला जाए कि वह धागा नीचे अपने आप खींच ले। एलिआस इसी उधेड़बुन में बहुत दिन से पड़े थे लेकिन उन्हें समझ में कुछ नहीं आ रहा था |

हाथ की सुई की तरह आखिरी छोर से लेकर होते हुए, सुई के बीच में छेद बनाकर सब तरह से प्रयोग कर डाले लेकिन सफलता नहीं ही मिलती दिखाई दी एलिआस को। अन्ततः वह निराश हो गए। अपना प्रयोग विफल होने की घोषणा करने के बाद उस दिन निराश और थके मन से बिस्तर पर लेटे। पता नहीं कब नींद आ गई उन्हें पता ही नहीं चला | लेकिन नींद में उन्होंने एक सपना देखा, बिलकुल जीवंत सपना ।

उनका सपना इस प्रकार से था कि जंगली जाति के कुछ लोग ‘हो’ को पकड़ कर अपने राजा के पास ले गए तथा राजा को बताया कि इस व्यक्ति ने सिलाई मशीन बनाई है, लेकिन उसे चालू नहीं कर पाया है, उनके राजा ने सारी बातें सुनी और फिर एलिआस को बिना कोई स्पष्टीकरण का मौका दिए यह शाही फरमान निकाल दिया गया कि यदि 24 घण्टे के भीतर सिलाई की मशीन चालू नहीं की गई तो उसे यानी एलियास को भाले से मार दिया जाए।

डर के मारे एलियास ने देखा कि उसे चारों ओर से हाथ में भाला लिए सैनिकों ने घेर रखा है, बीच में आग जल रही है और उस आग की रोशनी में भालों की नोंक चमक रही हैं | भयभीत हो का ध्यान भालों की नोक पर केन्द्रित हो गया, उनमें छेद हो रहे थे।

अचानक ही एलिआस की आंखें खुल गई और वह बिस्तर से उठे तथा सुई निकाल कर उसका नीचे वाला हिस्सा लोहे से काटा तथा नोक वाले हिस्से में छेद किया। अब अपनी इस सुई को उन्होंने  मशीन पर चढ़ा दिया और मशीन चल निकली।

पिछले दिन विफल घोषित कर दिया गया आविष्कार एक सपना देखकर ही सफल हो गया। इस तरह से एक सपने में यंत्रणा झेलते हुए एलियास हो ने सिलाई मशीन का अविष्कार किया |