खूनी मीनार की प्रेतात्मायें

Bloody_towerदुर्भाग्य, बदनसीबी…एक ऐसा शब्द है कि जब पीछे लग जाता है तो कभी-कभी जान ले लेने के बाद भी नहीं छोड़ता ! ऐसा ही दुर्भाग्य पीछे पड़ा था सम्राट हेनरी अष्टम (Hennery VIII) की दूसरी पत्नी रानी एनी बोलेन (Anne Boleyn) के पीछे जिनकी अभिशप्त प्रेतात्मा आज भी भटक रही है |

मध्य लन्दन, टेम्स नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित “टावर ऑफ़ लन्दन” जो दिखने में बेहद खूबसूरत और मनमोहक दुर्ग है लेकिन इसकी इक्कीस मीनारों में से एक को दुनिया खूनी टावर या खूनी मीनार के नाम से जानती है | ये खूनी मीनार तेरहवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में राजा हेनरी तृतीय (Hennery III) के शासन काल में अस्तित्व में आयी थी |

इसके मुख्य निर्माता हेनरी डी रेन्स, जॉन ग्लुसेस्टर और रोबर्ट बेवेर्ले ने इसे प्रमुख रूप से टेम्स नदी के मुख्य प्रवेश मार्ग को नियंत्रित करने के लिए बनाया था लेकिन उनका निर्माण एक दिन खूनी शब्द से जाना जाएगा इसका उन्हें अंदाज़ा नहीं रहा होगा |

खूनी टावर कुख्यात है दो किशोरवय राजकुमारों, एडवर्ड पंचम और उसके भाई रिचर्ड, की रहस्यमय हत्याओं के लिए | ऐसी मान्यता है कि तेरह वर्षीय एडवर्ड एवं उसके भाई रिचर्ड को टावर ऑफ़ लन्दन तक सीमित कर दिया गया था जब उनके चाचा, ड्यूक ऑफ़ ग्लुसेस्टर को उनका संरक्षक नियुक्त किया गया था |

दोनों राजकुमार आखिरी बार जीवित, जून 1483 में देखे गए थे | इसके बाद वो ग़ायब हो गए थे | ऐसी मान्यता है कि उनके ग़ायब होने का कारण, उनके चाचा के इशारे पर हुई उनकी रहस्यमय हत्या थी | बाद में सन 1674 के आस-पास उस भवन के निर्माण-कार्य के दौरान जब उसकी सीढ़ियों को नष्ट किया जा रहा था तो दो नर-कंकाल मिले जो माना जाता है कि उन्ही दोनों राजकुमारों के थे |

टावर ऑफ़ लन्दन की ये खूनी मीनार अब प्रेतग्रस्त हो चुकी है जहाँ इन दोनों राजकुमारों की प्रेतात्मायें घूमती हैं | पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ही एक रात इस खूनी मीनार के कुछ सुरक्षा कर्मियों ने ये दावा किया की उन्होंने मीनार की सीढ़ियों पर दो छोटी परछाइयों को लहराते हुए नीचे आते देखा |

खूनी मीनार की प्रेतात्मायेंवे काले  रंग की कमीज़ पहने हुए थे, कुछ समय बाद वो ग़ायब हो गए | सुरक्षा कर्मियों ने बताया की वे हांथो से हाथ को पकड़े हुए बिलकुल शांत थे और उस खूनी मीनार के पत्थरों को देख रहे थे |

पिछले लगभग 700 सालों में हुई कई डरावनी घटनाओं की वजह से ही इसे अब प्रेतग्रस्त माना जाता है | हेनरी अष्टम (Hennery VIII) की दूसरी रानी एनी बोलेन (Anne Boleyn) का पाशविक वध भी इसी खूनी मीनार की दीवारों के पीछे हुआ था |

एनी बोलेन एक काफ़ी शिक्षित और प्रभावशाली महिला थीं | राजनीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी काफ़ी मज़बूती से अपनी राय रखती थीं लेकिन वो भ्रष्ट न्यायालीय गुटबाजी और धार्मिक राजनीति के दलदल में फंस गयी | सम्राट के लिए एक पुत्र पैदा करने में नाकाम रहना भी उनके लिए एक संकट की स्थिति पैदा कर गया |

2 मई 1536 को एनी गिरफ्तार हुई और 19 मई को उनका वध कर दिया गया | उनके सनकी पति और राजा हेनरी ने जब उन्हें मरवाने का फैसला कर लिया तो एनी की अंतिम इच्छानुसार उनके वध के लिए फ़्रांस से जल्लाद बुलाया गया | उसने एक ही वार में एनी की गर्दन काट दी | इसके बाद हेनरी ने एनी की लाश को हथियार रखने की एक पुरानी पेटी में बंद करके सेंट पीटर एड विन्कुला के निकट दफ़ना दिया |

तब से उस गिरिजाघर के आस-पास एनी बोलेन का प्रेत दिखाई देता है | कभी-कभी लोगों ने एनी के सिरकटे प्रेत को एक शाही बग्घी में बैठकर अपने बचपन के घर ब्लिक्लिंग हॉल में जाते हुए देखने का दावा किया है |

फ़रवरी 1915 में इसी खूनी मीनार के पास सार्जेंट विलियम निकोलस और उनके साथ गश्त कर रहे एक सिपाही ने एनी को देखा | कुछ सोच कर सार्जेंट ने जब उसका पीछा किया तो एनी एक दीवार में ग़ायब होती दिखी | ऐसा माना जा रहा था कि फ़रवरी 1933 के बाद से एनी दोबारा नहीं दिखीं लेकिन पिछले वर्ष, 2015, में एक पर्यटक, लेम आर्कर (26 वर्ष) ने दावा ने किया उसने एनी बोलेन के प्रेत की तस्वीर खींची है अपने कैमरे में |

लेम आर्कर ने बताया की जब वो एनी के बचपन के घर में घूम रहा था तभी उसने एक फोटो खींची जिसमे एनी बोलेन का प्रेत दिखा | आर्कर ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ दुर्ग में घूम रहा था | जब उसने फ़ोटो खींची तो उसे उस फ़ोटो फ्रेम में बांयी तरफ़ एक प्रेत का हांथ मंडराता दिखायी दिया |

उसने पूरी दोपहर भर फ़ोटो खींची लेकिन शाम को जब सबके साथ वो घर लौटा तो उसने उस फोटो का अध्यन करने पर पाया कि एक हांथ अपनी तर्जनी ऊँगली से, स्पष्ट रूप से, सामने वाली चिमनी की तरफ़ इशारा कर रहा था | उसने दावा किया की ये हांथ रानी एनी बोलेन के प्रेत का हो सकता है |

टावर ऑफ़ लन्दन के इस खूनी मीनार का इतिहास काफ़ी खूनी रहा है | इसका अंग्रेजों के इतिहास में काफ़ी महत्व भी है | लेकिन यहाँ सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि ये भटकती हुई प्रेतात्मायें किसी न किसी स्थान विशेष से ही लगाव क्यों रखती हैं ? कहीं इसके पीछे सनातन धर्म का ये सिद्धांत तो नहीं कि “मृत्यु के समय असामान्य मानसिक उद्विग्नता, मृत्यु के पश्चात् प्रेत योनि में भटकाव का कारण बन सकती है”

यद्यपि सनातन धर्म में मृत्यु के पश्चात् आत्मा की शांति के लिए और प्रेत योनि से छुटकारा दिलाने के लिए कई तरह के उपाय भी दिए गए हैं तथापि हमारा जीवन, शरीर और मन अन्दर से जितना शांत होगा, हमें ये संसार उतना ही साफ़ स्पष्ट और आर-पार दिखाई देगा !….

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