जानवर का प्रेत या प्रेत जैसा जानवर


devil-footprintवो दिन था 9 फ़रवरी, सन 1855 का जब शीतलहर ने लगभग पूरे यूरोप को अपने क्रूर पंजे में दबोच रखा था | विशेष रूप से ब्रिटेन की हालत ज्यादे ख़राब थी | अत्यधिक बर्फ गिरने से, बर्फ की एक मोटी चादर सी जम गयी थी और यातायात एवं लोगों का पूरा दैनिक जीवन ही अस्त-व्यस्त हो गया था | दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड के डिवॉन काउंटी में तो हर स्थान पर लगभग दो इंच मोटी बर्फ की चादर बिछी हुई थी | डिवॉन में बहने वाली प्रसिद्ध नदी, एक्सी (Axe River) भी बर्फ़ से जम चुकी थी |

उस दिन सुबह जब लोग सो कर उठे तो पूरे डिवॉन में, लगभग 100 मील के क्षेत्र में, खेत, बाग़-बगीचे, मकानों के छत तथा दीवारों से होते हुए, एक रहस्यमय जानवर (या जानवर के प्रेत) के पैरों के निशान पाए गए |

बर्फ़ में बने ये निशान लगभग 4 इंच लम्बे तथा ढाई इंच चौड़े खुर के थे | और सबसे बड़ी बात ये सभी निशान एक सीधी कतार में थे तथा हर निशान की दूसरे निशान से दूरी आठ इंच थी जिससे साफ़ लग रहा था कि कोई दो पैरों वाला जानवर, उस इलाके में, बेहद सधे हुए तरीके से कदम रखता हुआ चला था | इसे वहां के लोगों ने शैतान (Ghost) के पदचिन्ह (Devil’s Footprint) कहा | लोग इसलिए भी आतंकित थे कि एक रात में लगभग 100 मील की दूरी पैरों से चलते हुए तय करना किसी जानवर या इन्सान के वश की बात नहीं थी वो भी उस प्रलयंकारी ठण्ड में, ये निश्चित रूप से कोई अतिमानवीय (Supernatural) शक्ति थी |

एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, ये रहस्यमय निशान एक चर्च के बगीचे से शुरू हुए थे और लिटिलहेम (Little ham) के पास खेतों में जाकर अचानक से वो निशान ख़त्म हो गए थे |

पास के गाँव मेलडरबन (Meldurbon) में तो एक पाइप के दोनों सिरों पर ये शैतानी पदचिन्ह पाए गए जबकि पाइप की चौड़ाई सिर्फ छह इंच थी | इससे लोगों ने अनुमान लगाया की कद में विशाल होने पर भी ये प्रेत रुपी जानवर (Ghost) अपनी इच्छा से कहीं से भी गुजर सकता था | इस सम्बन्ध में, उस समय प्रकाशित एक लेख का कुछ अंश यहाँ दिया जा रहा है जिसे पढ़ना दिलचस्प होगा-

“ये निशान बीती रात यानि गुरुवार की रात को प्रकट हुए थे, दक्षिणी डिवॉन और उसके पड़ोस में भारी हिमपात हुआ था | अगली सुबह उस शहर के निवासी तब स्तब्ध रह गए जब उन्होंने उस रहस्यमय जानवर, जो सर्वव्यापक था, के पैरों के निशान देखे |

सर्वव्यापक इसलिये क्योकि उस जानवर के पैरों के निशान, हर तरह के दुरूह स्थानों जैसे-घरों की छतों पर, पतली और संकरी दीवारों पर, बगीचों में, आँगन में (ऊँची-ऊँची दीवारों से घिरे हुए), घर में रखे बर्तनों पर (जो बर्फ़ से जम चुके थे), और साथ ही खुले स्थानों पर भी- पर देखे गए थे” |

वुडबरी (Woodbury) के चर्च के बाहर काफी सख्त बर्फ़ जमी हुई थी वहां पर भी उस शैतानी (Ghost) जानवर के निशान थे | उतनी सख्त बर्फ़ पर गहरे निशान बनाना तभी सम्भव था, जब लोहे या किसी कठोर धातु के बने हुए खुरों को आग में तपा कर वहां रखा जाता | स्पष्ट है कि ये किसी सामान्य जानवर या इन्सान के वश की बात नहीं थी |

एक जगह, जहाँ ये निशान झाड़ियों से हो कर गुजर रहे थे, प्रोफेशनल ट्रेंड कुत्तों से इन निशानों का पता लगाने को कहा गया | कुत्तों ने इन पैरों के निशान को सूंघते ही भौंकना शुरू कर दिया लेकिन लाख कोशिशों के बावज़ूद इनके ट्रेनर इन कुत्तों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित नहीं कर सके | इस घटना के काफी समय बाद तक डिवॉन में उस प्रेत (Ghost) रुपी जानवर का भय व्याप्त रहा |

उस समय के लोगों के पास विडियो कैमरा या स्मार्टफोंस जैसी चीजें तो होती नहीं थीं इसलिए इस घटना के बारे में, ठोस प्रमाण के रूप में, कम जानकारियां ही उपलब्ध हैं | एकमात्र विवरण जो इस शैतानी पद चिन्ह (Devil’s Footprint) के बारें में थोड़ा प्रकाश डालते हैं, वो डिवॉनशायर एसोसिएशन के प्रपत्र हैं जो 1950 में प्रकाशित हुए | ये दस्तावेज़, रेवरेंड जी.एम्. मुसग्रोव (Reverend G. M. Musgrove) के पत्रों से मिले जिसमे रेवरेंड ने उन पदचिन्हों का चित्रांकन भी किया था | रेवरेंड ने इलस्ट्रेटेड लन्दन न्यूज़ (Illustrated London News) को इस सम्बन्ध में पत्र भी लिखा |

सन 1994 में माइक डैश (Mike Dash) ने सभी ज्ञात स्रोतों से इस शैतानी पदचिन्ह (Devil’s Footprint) के बारे में जानकारी इकठ्ठा की और उनको एक सूत्र में पिरो कर “फोर्टीन स्टडीज” नाम से पत्र प्रकाशित कराया | अपने आर्टिकल में माइक डैश ने उन सारी थ्योरी को रखा जो लोगों ने इन भूतिया (भूत के) पैरों के निशान के बारें में दी थी लेकिन निष्कर्ष के तौर पर उन्होंने यही लिखा कि एक, इकलौता स्रोत भी ऐसा नहीं था जो पैरों के निशान की सही व्याख्या कर सके इसलिए आज अभी, और हो सकता है आने वाले समय में भी ये रहस्य, रहस्य ही रहेगा….!

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