संवेदनाओं का रहस्यमय संसार


lpoपूरे ब्रह्माण्ड में व्याप्त अदृश्य चेतनाएं संवेदनाओं से भरी होती है | इनका रहस्यमय संसार असीम संभावनाओं से भरा हुआ है | इनके रहस्यमय संसार की व्याख्या करते हुए, द्वितीय विश्वयुद्ध की एक घटना का उल्लेख अपनी एक पुस्तक में करते हुये श्रीमती रुथ मान्टगुमरी ने लिखा है कि चैकोस्लोवाकिया तथा थाईलैण्ड के भूतपूर्व राजदूत जो युद्ध के बाद ही जापान के नए राजदूत नियुक्त हुये, उस समय वो मुकदेन नगर में थे। युद्ध की आशंका से बच्चों को उनसे अलग कर दिया गया। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती पैट्रीशिया ने कैलीफोर्निया के लैगुना बीच में एक मकान ले लिया और वही रहने लगी। इसी बीच श्रीमती जॉनसन ने कई बार जापान के समाचार जानने के लिये अपना रेडियो टयून किया पर रेडियो ने वहाँ का सिग्नल पकड़ा ही नहीं। एक दिन पड़ोस की एक महिला ने बताया कि उनका रेडियो जापानी प्रसारणों को (रेडियो ब्राडकास्टिंग) खूब अच्छी तरह पकड़ लेता है। तीन महीने तक श्रीमती जॉनसन ने इस तरफ कुछ ध्यान ही नहीं दिया। एक दिन उन्हें एकाएक रेडियो सुनने की तीव्र इच्छा हुई। वे तुरन्त अपने पड़ोसिन के घर गई। रेडियो का स्विच घुमाया ही था कि आवाज आई-हम रेडियो स्टेशन मुकदेन से बोल रहे हैं अब आप एक अमेरिकन ऑफिसर बी. जॉनसन को सुनेंगे।’ विस्मय विस्फारित श्रीमती जानसन एकाग्र चित्त बैठ गई- अगले ही पल जो आवाज आई वह उनके पति की ही आवाज थी। वे बोल रहे थे – मैं बी.एलेक्सिन जान्सन मुकदेन से बोल रहा हूँ जो भी कैलीफोर्निया अमेरिका का नागरिक इसे सुने कृपया मेरा सन्देश मेरी पत्नी पैट्रोसिया जान्सन या मेरे माता-पिता श्री व श्रीमती कार्ल टी जान्सन तक पहुँचाये और बतायें कि मैं यहाँ कैद में हूँ, मगर स्वस्थ हूँ, खाना अच्छा मिलता है और छूट जाऊँगा, अपनी पत्नी और बच्चों को प्यार भेजता हूँ।”

दो माह बाद जब जान्सन कैदियों की बदली में छूट कर आ गये तो उसके बाद पैट्रीशिया जब पति से मिलने गई तो वहाँ उसे पति से केवल थोड़ी देर तक ही मुलाकात होने दी गयी क्योंकि कुछ समय के लिये मिस्टर एलेक्सिस जान्सन को तुरन्त जहाज पर जाना था। वहां के नियमों के अनुसार पैट्रीशिया को थोड़ी ही देर में घर लौटना पड़ा। बाद में जब उसकी सहेलियाँ उसे शहर में घुमाने ले गई तो वे एक सिनेमा हाल में बैठी ही थीं कि पैट्रीशिया एकाएक उठकर बाहर निकल आई और अपने घर पर फोन मिलाया तो दूसरी ओर से मिस्टर एलेक्सिस जान्सन बोले और बताया कि मैं यहाँ हूँ मुझे जहाज में जाना पड़ा। पैट्रीशिया सिनेमा छोड़कर घर चली आई।

तीन महीने तक कभी भी रेडियो सुनने की आवश्यकता अनुभव न करना और ठीक उसी समय जबकि पति संदेशा देने वाले हों रेडियो सुनने की अन्तःकरण की तीव्र प्रेरणा का रहस्य क्या हो सकता है? वह कौन सी शक्ति थी जिसने पैट्रीशिया को सिनेमा के समय फोन पर पहुँचने की प्रेरणा दी जब इन बातों को हम सोचते हैं तो पता चलता है कि कोई एक अदृश्य शक्ति है अवश्य जिसने समूचे जीव जगत को एक भावनात्मक सम्बन्ध में बाँध रखा है। हम जब तक उसे नहीं जानते तब तक मनुष्य शरीर की सार्थकता कहाँ?

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