सुबह के सपने जो वास्तव में सच हो गये

सुबह के सपने जो वास्तव में सच हो गयेकहते हैं न कि सुबह के सपने सच होतें हैं। इस बात में कुछ हद तक सच्चाई भी है। हम आपको कुछ ऐसे लोगों के बारे में बता रहें हैं जिनके सुबह के स्वप्न वास्तव में सच हो गये। जब हम आपको उन आश्चर्य जनक घटनाओं को बतायेंगे तो आप हैरान रह जायेंगे।

यह रहस्यमय विज्ञान है या हमारा भ्रम। लेकिन सुबह की नींद में देखे हुये सपनों के सच होने वाले किस्सों को जानकर आप निश्चय ही अचरज में पड़ जायेंगे।

पहली घटना

भीलवाड़ा (राजस्थान) में रहने वाले रामनाथ सिंह नाम के व्यक्ति को सोते समय सुबह यह स्वप्न आया कि उनके घर कोई वृद्ध महिला आयीं हुई हैं और वह उनके साथ खाना खा रहें हैं। रामनाथ सिंह को उस सुबह के सपने पर जरा सा भी विश्वास नहीं हुआ। क्योंकि वह इस शहर में अकेले रहते थे। उनके माँ- बाप या अन्य किसी गेस्ट का अभी उनके घर आने का कोई प्रोग्राम नहीं था।

फिर रामनाथ सिंह बैचलर होने के कारण खुद होटल में खाना खाते थे। ऐसे में उनका, अपने घर पर किसी के साथ भोजन करने का स्वप्न पूरी तरह झूठा लग रहा था। इसलिए रामनाथ सिंह ने सुबह के स्वप्न वाली बात मन से निकाल दी। वे रोज की तरह तैयार होकर अपने ऑफिस चले गये। ऑफिस से लौटकर शाम को अपने घर आये तो आश्चर्यचकित रह गये।

उन्होंने देखा कि एक वृद्ध महिला उनके घर के सामने वाली सीढ़ियों पर बेसुध बैठी हुईं हैं। अपने पहनावे से वह वृद्ध महिला किसी अच्छे घर की लग रहीं थीं। उनके पास ही एक बड़ा बैग भी रखा हुआ था। राम नाथ सिंह ने उन्हें हिला- डुलाकर होश में लाने की कोशिश की, लेकिन वह होश में नहीं आयीं।

फिर उन्होंने अपनी वाटर बॉटल निकालकर उसका पानी उन वृद्ध महिला के चेहरे पर छिड़का। मुँह पर पानी के छिड़कते ही वह वृद्ध महिला होश में आ गईं। उन्होंने राम नाथ सिंह को बताया कि वे उनके सहारनपुर वाले मित्र आशुतोष गुप्ता की दादी हैं। वे कुछ देर पहले ही सहारनपुर से इस शहर में आयीं हैं।

वह भीलवाड़ा में कल अपने एक रिलेटिव के लड़की की शादी में शामिल होने के लिए आयीं थीं। लेकिन अभी-अभी राम नाथ सिंह के घर पहुँचते ही उन्हें पता चला कि वे जिस रिश्तेदार की लड़की की शादी में वह शामिल होने आयीं थीं उसके होने वाले हसबैंड का भयंकर एक्सीडेंट हो गया है।

यह दुख भरी खबर सुन कर उन्हें चक्कर आ गया। उन्होंने यह भी बताया कि वह जब तक अपने यहाँ आने की खबर मोबाइल से देतीं, तब तक उन्हें चक्कर आ गया। राम नाथ सिंह अपने मित्र की दादी को घर में ले गए। उन्होंने उन वृध्द महिला से कहा कि बैठिए दादी जी, मैं अभी आपके लिए बाहर होटल से कुछ खाने के लिए लाता हूँ।

तब उन वृध्द महिला ने राम नाथ सिंह से कहा कि उसकी बहु ने उसके लिए ढेर सारा खाना बनाकर साथ रख दिया है। उसे बैग से निकालो, तुम भी खाओ और मुझे भी खिलाओ। थोड़ी ही देर में राम नाथ सिंह उन वृद्ध महिला के साथ खाना खा रहे थे। उन्हें पता चल गया था कि उनका सुबह का सपना सच हो गया था।

दूसरी घटना 

गोआ के रहने वाले सुब्रत मुखर्जी को अपने सुबह के सपने में दिखाई दिया कि उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर हो गया है। उन्होंने सोंचा कि आज मैं घर से ही बाहर नहीं निकलूंगा। इसके बाद सुब्रत मुखर्जी ने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली और आराम से बैठ कर ड्राइंग रूम में टी. वी देखने लगे।

कुछ देर बाद किचेन में काम कर रहीं उनकी वाइफ ने उन्हें आवाज दी। वे अपनी पत्नी की आवाज सुनकर रसोई में गये। दरअसल ऊपर आलमारी में रखे एक सामान को नीचे उतारना था।

सुब्रत मुखर्जी ने एक स्टूल लिया ओर उस सामान को नीचे उतारने के लिए स्टूल पर चढ़ गये। जैसे ही उन्होंने उस सामान को हाथ में उठाया तो मिस्टर मुखर्जी और उस सामान दोनों का वजन स्टूल संभाल नहीं पाया।

स्टूल का एक हिस्सा नीचे से टूट गया और सुब्रत मुखर्जी नीचे जमीन पर जा गिरे। उनके बाएं पाँव में चोट आ गई थी। जब उस पाँव का एक्स रे कराया गया तो उसमें फ्रैक्चर निकला। कहने का मतलब यह कि घर से बाहर न निकलने के बावजूद उनका सुबह का सपना सच हो गया था।

तीसरी घटना

भोपाल मध्य प्रदेश की रहने वाली डिग्री कॉलेज की प्रवक्ता डॉ. जया रत्नागिरी ने अपने सुबह के सपने में देखा कि कोई उनके दरवाजे पर खड़ा होकर मुस्करा रहा है। उसने नीले चेक डिजाइन की शर्ट और रेड कलर की पैंट पहन रखी है। डॉ. जया रत्नागिरी सुबह उठीं और जब वह ब्रश कर रहीं थीं तो डोरबेल बजी।

डॉ. जया ने अपना दरवाजा खोला तो सामने उनके जीजा जी खड़े थे। उन्होंने नीले चेक डिजाइन की शर्ट और लाल रंग की पैंट पहन रखी थी। डॉ. जया रत्नागिरी का सुबह का सपना शत प्रतिशत सच निकला।

सोते समय न जाने हम कितने ही सपने देखते हैं। कभी वह हकीकत होते हैं तो कभी नहीं भी। लेकिन यह कहा जाता है कि स्वप्न का हमारे जीवन से कहीं न कहीं कनेक्शन होता है।

यह जरूरी नहीं की सपने में दिखाई दी जाने वाली घटना आप के साथ घटित ही हो। वह आपके नजदीकी रिश्तेदार या मित्र के साथ भी घट सकती है। यह अंधविश्वास नहीं, वास्तव में विज्ञान का वो आयाम है जिसे अभी तक जाना नहीं जा सका है। इसका केवल अनुमान लगाया जा सकता है।