इटली की एक लड़की का रहस्यमय अतीत, एक भ्रम या कुछ और

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इटली की एक लड़की का रहस्यमय अतीत, एक भ्रम या कुछ और

“जब मैं छोटी थी तो एक बार मैंने इटली की यात्रा की | यह मेरी इटली यात्रा का पहला अनुभव था | जैसे ही मेरी ट्रेन चली मैं उत्तेजित और बेचैन हो उठी | अपने अभिवावकों द्वारा मना करने के बावजूद, डिब्बे के भीतर और बाहर घूमने तथा अधिकांश समय गलियारे में रहने के कारण मेरे परिवार वाले मुझसे खींज गए और मुझे बहुत तेज डांटा |

मैं चुप हो गई और खिड़की के किनारे से जुड़ी हुई एक चौड़ी बेंच पर बैठ गई | मैं यह अनुभव कर रही थी कि हमारी रेल गाड़ी धीरे धीरे ऊंचाई पर जा रही थी | अचानक मै बोल उठी “दाहिनी तरफ के अगले मोड़ की पहाड़ी पर एक गिरजाघर दिखाई देगा और वहां पर वही एकमात्र भवन होगा | इकलौता होने से वह बिलकुल अद्भुत लगता है | आस पास कोई गाँव भी नहीं है” | और शीघ्र ही हूबहू वही दृश्य सामने आ गया | सभी लोग चकित हो कर मुझे देख रहे थे |

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‘मैं पुनः कहने लगी फिर आगे बायीं ओर एक नाला दिखाई देगा जिसके किनारे ऊंचे और काले रंग के पेड़ उगे हुए होंगे | उसके आगे चांदी के रंग के पत्ते वाले पेड़ों का झुंड पहाड़ी के किनारे दिखाई देगा” | “ये चांदी से पत्तों वाले पेड़ों का क्या मतलब है”? मेरी चाची बीच में बोल पड़ी | मैं आश्चर्य से कहने लगी “क्योंकि वृक्षों के संबंध में मेरा ज्ञान बहुत अल्प है” |

सच्चाई यह थी कि मुझे खुद समझ नहीं आया कि मेरे मुह से यह कैसे निकला | वास्तव में मैंने इसके पहले कभी जैतून के बगीचे नहीं देखे थे और जैसे ही वह दिखाई देने लगे मुझे बतलाया गया कि वह कैसे थे |

मुझे फिर कभी भी ऐसा अनुभव नहीं हुआ जैसा मुझे इस समय हुआ था कि मैं एक ऐसे देश में प्रवास कर रही थी जिसे मैं अच्छी प्रकार से जानती थी जबकि जहाँ तक मुझे याद है और मेरी जानकारी है मैंने इसके पहले ऐसा कभी नहीं देखा था | इटली से निकलने के बाद अपने कुछ फ्रेंच दोस्तों के साथ मै पेरिस देखने गई थी |

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हम लोग एक भवन के दरवाजे के खुलने की प्रतीक्षा में थे | दरवाज़ा खुलने पर वहां कुछ कारीगरों ने हमारा स्वागत किया और उनमें से एक मेरी और बढ़कर इटालियन भाषा में बातचीत करने लगा | मैंने फ्रेंच भाषा में उसे उत्तर दिया कि ‘मैं इटालियन भाषा नहीं जानती’ | “परंतु तुम तो इटालियन ही हो, क्या तुम इटालियन नहीं हो? तुम्हें इटालियन ही होना चाहिए और मुझे विश्वास है कि तुम इटालियन ही हो |

मैं भी उसी देश का हूं” उसने टूटी-फूटी फ्रेंच में प्रतिवाद करते हुए कहा | तभी मैं अपनी उस इटली वाली यात्रा का विचार करने लगी और मुझे इटली संबंधी अपनी प्रत्यक्ष जानकारी का भी ध्यान हो गया और अब इस कारीगर का यह आग्रह कि मैं इटली की रहने वाली हूं, मुझे थोड़ा भय सा लगने लगा था |

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क्या मैं कभी किसी महिला के रूप में उस छोटे से पहाड़ी गिरजाघर में आई-गयी थी अथवा देवदार के वृक्ष और जैतून के बगीचे में भटकने के लिए कभी छोड़ दी गई थी | क्या मै अपने वर्तमान समय से पहले कभी इटली रही थी ? प्रश्न कई सारे थे लेकिन जितना मै इन सब के बारे में सोच रही थी उतना ही उलझती जा रही थी | मैं कुछ भी समझ नहीं पा रही थी |

मुझे इतना तो पता था कि इन सारे प्रश्नों के उत्तर, मेरे सुदूर अतीत में ही कहीं छिपे थे…लेकिन शायद वो मुझसे इतनी दूर थे कि मुझे नहीं लगा कि मै वहां कभी जा पाउंगी !