विश्व की महानतम प्रेरणादायी व्यक्तित्व में से एक थी हेलन केलर, जिन्होंने अंधी होने के बावज़ूद 9 किताबें लिख डालीं

Helen-Kellerवह लड़की न तो देख सकती थी, ना वह बोल सकती थी और ना ही वह सुन सकती थी। लेकिन फिर भी जिद थी उसे हमेशा स्कूल और कॉलेज में आगे बढ़ने की। उसे देखकर लोग यही कहते थे कि वह अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर सकती।

लेकिन उस अंधी लड़की के अंतर्मन की आवाज यह कहती थी कि तुम बहुत कुछ कर सकती हो। उसने दुनिया वालों की नकारात्मक बातें नहीं सुनी। उसने बस अपने अंदर की सकारात्मक ध्वनि को महसूस किया और आगे बढ़ती गयी।

उसके इसी आगे बढ़ने के जुनून ने उसे विश्व प्रसिद्ध लेखिका बना डाला। उसने अपनी आंखों के अंधेरों से लड़कर अपनी कामयाबी का उजाला पूरे संसार में फैला दिया। उस अंधी लड़की ने एक दो नहीं बल्कि 9 किताबें लिख डाली। किताबों में लिखे शब्द उसकी दिल की आवाज थे। उसकी लिखी पुस्तकें इतनी अधिक पसंद की गई कि उनका संसार की पचास भाषाओं में अनुवाद किया गया।

उसकी लिखीं किताबें पूरे विश्व में इतनी संख्या में बिकीं कि उसकी पुस्तकें संसार में सबसे अधिक बिकने वाली किताबों में से एक बन गई। जो कोई भी इस अनोखी लड़की की कहानी सुनता था, आश्चर्य चकित रह जाता था। उस पावरफुल लड़की ने अपनी अपंगता की दीवार को तोड़कर अपनी मंजिल पा लिया था। लोग कहते थे कि उसमें कोई दैवीय शक्ति थी। जो सदैव उसके साथ रहती थी।

जी हाँ, यह अमेरिका की हेलेन केलर थीं। जो 27 जून 1880 को अलबामा में पैदा हुई थी। जन्म के समय हेलेन स्वस्थ थीं, लेकिन 19 महीने की होने पर नन्ही हेलन को एक बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया और उस भयंकर रोग ने उसकी देखने-बोलने और सुनने की शक्ति छीन ली। लेकिन नन्हीं  हेलेन ने हार न मानी।

उसने ब्रेल लिपि के द्वारा पढ़ना-लिखना सीखा और यही नहीं बल्कि देखते ही देखते 8 भाषाओं की ज्ञाता बन गयी। ऐसी लड़की जो ना बोल सकती हो ना देख सकती हो और ना सुन सकती हो, उसके बावजूद उसके द्वारा इतना ज्ञान अर्जित करना एक आश्चर्य का विषय था।

कुछ लोगों का कहना था कि उसने ध्यान-योग के द्वारा अपने अंदर दैवीय शक्ति का विकास कर लिया था। इसलिए उस पर गॉड की विशेष अनुकंपा थी। वह नेत्रहीन और मूक-बधिर होने बाद भी अपने दैनिक कार्यों को करने के लिये कभी दूसरों का सहारा नहीं लेती थी।

वह अपना हर कार्य अपने आप करतीं थीं। उन्हें पता था कि उनके घर में कितनी दूरी पर वाश रूम, किचेन आदि है़। वह किचेन में रखे बर्तनों को वह बिना देखे उठा लेती थीं और खुद ही अपने लिये चाय आदि बना लेती थीं।

कभी-कभी वह अपनी बेबसी पर बहुत मायूस हो जाती थीं लेकिन उस उदासी को उन्होनें अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। क्योंकि उस अदभुत लेखिका की कलम ही उसकी बैसाखी थी। बल्कि यह कहना चाहिए कि दर्द ही उसके जीवन की पतवार थी, जिसके सहारे उसने जिंदगी की नदिया पार की।

हेलेन केलर की अंधेरी दुनिया का दर्द उसकी लिखी किताबों से साफ-साफ झलकता था। उसकी लिखी किताब ‘द स्टोरी ऑफ माई लाइफ’ जब छपी तो पूरे विश्व में तहलका मच गया। लोगों को पता चल गया था कि एक अद्भुत लेखिका इस धरती पर पैदा हो चुकी है।

उसकी लिखी किताब इतनी बिकी कि वह गरीब से अमीर हो गई और उसने अपना लिये एक आलीशान बंगला खरीद लिया। कहते हैं न कि ऊपर वाला एक शक्ति छीनता है तो अनेक शक्तियों दे देता है। हेलन केलर की पास मन की आंखें थी इसीलिए तो उसके द्वारा लिखी पुस्तकों के पढ़ने से यह पता ही नहीं लगता कि इन पुस्तकों को लिखने वाली लड़की नेत्रहीन है।

उसने अपनी लिखी पुस्तकों में प्रकृति का वर्णन जिस सजीवता से किया है जैसे कि वह उन्हें खुद देख पा रही हो। उसके द्वारा ऐसी सुंदर पुस्तकों का लिखा जाना किसी चमत्कार से कम न था। हेलेन केलर गुरूदेव रवींद्र नाथ टैगौर से अत्यधिक प्रभावित थीं। हेलेन केलर की तुलना हम भारतीय गीतकार रवींद्र जैन जी से कर सकते हैं क्योंकि उन्होनें भी नेत्रहीन होने कें बावजूद सैकड़ों कर्ण प्रिय गीत लिख डाले।

हेलन केलर जैसी महान शख्सियत पर अनेक नाटक, टी. वी. सीरियल और फिल्में बन चुकीं हैं। उनके प्रेरणादायक जीवन से प्रेरित एक फिल्म भारत में वर्ष 2005 में बनी। इस फिल्म का नाम था ‘ब्लैक’, जिसमें रानी मुखर्जी और अमिताभ बच्चन जैसे महान कलाकारों ने अपनी भूमिका निभाई थी। इस महान लेखिका पर अनेक पुस्तकें लिखीं जा चुकीं हैं। वह निश्चित रूप से शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिये के लिये ही नहीं बल्कि हर उस इंसान के प्रकाशस्तम्भ हैं, जो अपनी जिंदगी से निराश हैं हताश हैं।

उनका जिंदगी को देखने का नजरिया औरों से अलग था। हेलन केलर का कहना था कि इस प्रकृति की खूबसूरती को न देखा जा सकता हैं और न ही उसे स्पर्श किया जा सकता हैं। उसे केवल महसूस किया जा सकता है। जिसका खुद का जीवन अंधेरों से भरा हुआ था, वह दूसरों की जिंदगी में उजाला भर गयी। हेलेन केलर ने वर्ष 1946 से 1957 के मध्य अनेक विदेश यात्रायें कीं और अपने द्वारा प्रेरणा की सुगंध चारों दिशाओं में फैलायी।