और वो ग़ायब हो गया


और वो ग़ायब हो गयाये घटना २१ अक्टूबर १९७८ की है | बीस वर्षीय फ्रेडरिक वेलेंटिच (Fredrick Valentich) ने सेसना-182 (Cessna-182) नामक विमान से अपनी नियमित प्रशिक्षण उड़ान भरी | फ्रेडरिक कोई नौसिखिया पायलट नहीं था | उसे लगभग 150 घंटे की उडान का अनुभव था | कम उम्र में ही वो एक कुशल पायलट हो चुका था, उसे चतुर्थ श्रेणी की इंस्ट्रूमेंट रेटिंग भी मिल चुकी थी जो उसे रात में भी उड़ान भरने की अनुमति देती थी |

उस शाम उसने मेलबोर्न से किंग आइलैंड के लिए उड़ान भरी, एक कभी न ख़त्म होने वाले सफ़र के लिए | शाम को सात बजे के आस-पास उसने मेलबोर्न एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल रूम में अपने रेडियो पर बात की | उसने वहाँ उपस्थित अधिकारियों को बताया कि उससे लगभग 4500 फीट की दूरी पर उसे एक विमान जैसी चीज उड़ती हुई दिखाई दे रही थी | कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने उसे बताया कि इस समय वहां कोई एयर ट्रैफ़िक नहीं होना चाहिए | फिर वो क्या चीज़ थी ?

वेलेंटिच ने फिर बताया कि वो स्पष्ट रूप से देख सकता है उस अजीब से दिखने वाले विशालकाय विमान को जो अपने चार प्रकाश-पुंज की वजह से लगभग जगमगा रहा था | इसके बाद कुछ देर तक शांति छाई रही लेकिन कंट्रोल रूम में उपस्थित अधिकारियों की दिलचस्पी अब तक बढ़ चुकी थी | उनके मन में कई तरह की आशंकाये आ रही थी | लेकिन थोड़ी देर बाद उनकी आशंकाओं को दूर करते हुए फ्रेडरिक रेडियो पर दोबारा लौटा | फ्रेडरिक ने रेडियो पर बताया कि उसे लग रहा है कि वो अजीब सा दिखने वाला विमान शायद उसका पीछा कर रहा था |

कंट्रोल रूम के अधिकारियों ने फ्रेडरिक से उस विमान का हुलिया बताने को कहा | फ्रेडरिक ने कहा कि ये किस तरह का विमान है ये तो वो समझ नहीं पा रहा क्योकि इस तरह का विमान उसने पहले कभी नहीं देखा, लेकिन ये काफी लम्बा था और इसके ऊपर एक हरे रंग का प्रकाश पुंज लगा था जिससे काफ़ी तीव्र प्रकाश निकल रहा था | उसने यह भी बताया कि पूरा विमान एक विचित्र तरह की धातु का बना लग रहा था | फिर कुछ समय रुक कर फ्रेडरिक पुनः रेडियो पर आया, अबकी बार उसकी आवाज़ में थोड़ा भय मिश्रित आश्चर्य था |

उसने बताया कि “वो विमान अब उसके विमान के ऊपर आ गया है, लगभग  1000 फीट की ऊंचाई पर, और उसके विमान की, ऊपर और नीचे, परिक्रमा कर रहा है” | फिर तुरंत ही कंट्रोल रूम में, फ्रेडरिक के विमान से मिलने वाला सिग्नल बाधित होने लगा और रेडियो से खड़-खड़ की आवाज़ आने लगी और अंत में सिग्नल कट गया | फ्रेडरिक के जो आख़िरी शब्द, कंट्रोल रूम के रेडियो पर सुनाई दिए, वे थे, “ये कोई विमान नहीं है…..”

कंट्रोल रूम के अधिकारी फिर दोबारा फ्रेडरिक से रेडियो सम्पर्क साधने में असफ़ल रहे | फ्रेडरिक की आवाज़ फिर कभी नहीं सुनाई दी | इस घटना की गम्भीरता को मेलबोर्न एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल ने समझा और फ्रेडरिक को खोजने के लिए खोजी अभियान चलाया | इस बड़े खोजी अभियान में समुद्री जहाज़ों के साथ-साथ, रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फ़ोर्स (RAAF) के लॉकहीड पी-3 ओरियन नामक विमान ने, आठ और नागरिक विमानों के साथ हिस्सा लिया |

इन सब ने मिलकर लगभग एक हज़ार वर्ग मील के विशालकाय क्षेत्र में इस खोजी अभियान को अंजाम दिया लेकिन दुर्भाग्य से न तो फ्रेडरिक का पता चला और ना ही फ्रेडरिक के विमान का | दूसरी दुनिया से आने वाली उड़नतश्तरियों में विश्वास रखने वाले इसका कारण एक यू. एफ. ओ. द्वारा फ्रेडरिक और उसके विमान का अपहरण होना ही बताते हैं | खुद फ्रेडरिक के पिता ने बताया कि फ्रेडरिक का एलियंस और यू. एफ. ओ. के अस्तित्व में काफ़ी विश्वास था |

फ्रेडरिक वेलेंटिच के ग़ायब होने का रहस्य आज भी अनसुलझा है क्योकि आज के आधुनिक विज्ञान की छलांग शायद इतनी ऊँची नहीं है कि वो “धरती और आकाश” (पंचतत्वों में से दो तत्व) के बंधन को भेद कर दूसरी दुनिया में कदम रख सके !

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