विशाल वृक्ष, जिसके तने में बनाया गया गिरिजाघर

विशाल वृक्ष, जिसके तने में बनाया गया गिरिजाघरदुनिया में आश्चर्य चकित कर देने वाले तथ्यों एवं घटनाओं की कमी नहीं है | कभी कभी कुछ ऐसी घटनाएं सामने आ जाती हैं कि उन्हें सुन कर मनुष्य भौचक्का रह जाता है |

एलोविले-नारमैंडी (फ्राँस) में एक विशालकाय ओक का वृक्ष है जिसकी आयु लगभग 1 हजार वर्ष हो चुकी है, ऐसा आज के वैज्ञानिकों का अनुमान है । इस वृक्ष की विशालता और उसके तने की भयंकर मोटाई, पहली नज़र में आपको स्तब्ध कर देगी |

ऐसे ही, लगभग सवा तीन सौ साल पहले, इसे पहली बार देख कर एक बार एक अंग्रेज के मन में उसको एक जगह से खोखला करके उसके अन्दर चर्च यानी गिरजाघर बनाने की बात आई। वह अंग्रेज बड़ा ही जीवट किस्म का इंसान था, अपनी बात का पक्का |

उसने अपने विचार को क्रियान्वित भी किया। और उसने उस विशालकाय वृक्ष में कोई छोट-मोटा नहीं बल्कि एक, दो मंजिला गिरजाघर इस विशाल वृक्ष के तने में बनाया गया जो सन 1696 से लेकर अब तक ज्यों का त्यों बना हुआ है |

सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि एक ओर तो इस विशालकाय वृक्ष के तने में बने गिरजाघर में बैठकर पूजा उपासनाएं चलती रहती हैं तो दूसरी ओर वह वृक्ष भी ऋतु के अनुसार फलता फूलता रहता है | आज की स्थिति में जो भी इस तने के भीतर बने इस गिरजाघर को जो भी देखता है, आश्चर्यचकित हुए बिना नहीं रहता |

यह ऐसा ही है जैसे कि लोग विराट् ब्रह्माण्ड में समुद्र की एक बूँद के समान पृथ्वी को ही सब कुछ मानते हैं पर विराट् जगत की कल्पना उन्हें कभी नये ढंग से सोचने की प्रेरणा ही नहीं देती।