बिना सूंड़ वाले गणेश जी का मंदिर

बिना सूंड़ वाले गणेश जी का मंदिरहम जब भी भगवान गणेश जी की मूर्ति की कल्पना करते हैं, तो हम उन्हें उनकी सूंड़ के साथ देखते हैं। आज देश भर में जितने भी गणपति महाराज के मंदिर हैं। उनमें से अधिकतर प्रतिमाओं में भगवान गणेश अपनी सूंड़ के साथ हैं। लेकिन हम यह भी जानते हैं कि गणेश जी की सूंड़, जन्म से ही उनके साथ नहीं थी। माँ पार्वती के वचनों का पालन करते हुये बालक गणेश ने अपना मस्तक तक कटवा दिया था।

उसके बाद वह सूंड़ रूप में अस्तित्व में आये। आज हम आपको उन्हीं बाल स्वरूप वाले गणेश जी के धाम ले चलेंगे। जहां गणपति बप्पा बिना सूंड़ के मंदिर में विराजमान हैं। आपको आश्चर्य होगा कि भला यह कौन सा मंदिर है, जहाँ गणेश जी की सूंड़ नहीं है? लेकिन यह सच है हमारे देश में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां भगवान गणेश की सूंड नहीं है।

इस मंदिर में भगवान गणेश बिना सूंड़ के स्थापित है। अब आप यह भी सोंच रहे होंगे कि यदि इस बात में जरा भी सच्चाई होती तो हमने भी कभी न कभी तो इन बिना सूंड़ वाले गणेश जी की तस्वीर देखी होती। लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह उन मंदिरों में से एक है जहाँ फोटोग्राफी वर्जित है।

मंदिर में फोटो खींचने की मनाही होने के कारण भगवान गणेश जी की बिना सूंड़ वाली प्रतिमा वाला चित्र आपने आज तक भी नहीं देखा होगा। यदि आपको बिना सूंड़ वाले इन भगवान गणेश जी की मूर्ति के दर्शन करने हैं तो आपको स्वयं चल कर इस अनोखे मंदिर में आना होगा, जहाँ भगवान गणेश जी बिना सूंड़ के विराजमान हैं। वास्तव में बड़ी मनमोहक है इस मंदिर की प्रतिमा, जो कोई भी देखता है सम्मोहित हो जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि बिना सूंड वाले गणेश जी का यह मंदिर लगभग 209 वर्ष पुराना है। यह मंदिर राजस्थान के जयपुर की नाहरगढ़ की पहाड़ियों में स्थित है। जहाँ बिना सूंड़ वाले गणेश जी अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण कर रहे हैं। दरअसल यह गणेश प्रतिमा उस समय का स्वरूप है जब भगवान शंकर ने उनका मस्तक नहीं काटा था।

राजा जयसिंह का स्वप्न

यहां गणेश जी अपने बाल्यकाल के स्वरूप में हैं। वहाँ वह अपने वास्तविक रूप में स्थापित है। इस मंदिर की स्थापना के पीछे कई रहस्य छुपे हुए हैं। कहानी बहुत पुरानी है। इस मंदिर के निर्माण की प्रेरणा यहाँ की रियासत के राजा जय सिंह को अपने एक स्वप्न से मिली थी। राजा जय सिंह
बहुत धार्मिक व्यक्ति थे। देवी-देवताओं का पूजा-पाठ उनके दैनिक कार्यों में सम्मलित था।

वह आस्तिक होने के कारण हृदय के भी बहुत उदार व्यक्ति थे। कहते हैं न कि भगवान को भी सच्चे हृदय वाले व्यक्तियों से अच्छे काम कराना होता है। इसीलिए गणेश जी ने अपने इस अनोखे मंदिर के निर्माण के लिये जयपुर के राजा जय सिंह को ही चुना।

बताते हैं कि भगवान गणेश ने राजा जय सिंह को स्वप्न में दर्शन दिये। उन्होंने राजा जय सिंह से कहा कि ‘हे राजन, तुम अपने राज्य में एक ऐसे मंदिर की स्थापना करो, जो मेरे बाल स्वरूप की हो अर्थात उसमें मेरी सूंड़ न हो। बिना सूंड़ वाला मेरा यह मंदिर संसार में अनोखा होगा।’

गणेश जी ने राजा से यह भी कहा कि ‘हे राजा, तुम अगर मेरे ऐसे अनोखे मंदिर की स्थापना करोगे तो तुम्हारे राज्य में सुख और समृद्धि आयेगी। तुम्हारी यश और कीर्ति पूरे विश्व में स्थापित हो जायेगी।’ महाराज जय सिंह ने भगवान गणेश के सामने नतमस्तक होकर कहा कि ‘ऐसा ही होगा प्रभु। आप के आदेश का पालन होगा। मैं अपने राज्य में आपके बाल स्वरूप वाला एक मंदिर अवश्य स्थापित करूंगा।’

इस प्रकार यहाँ स्वप्न में दिए गये गणेश जी से अपने वायदे को पूरा करने के लिए राजा जयसिंह अपने काम में लग गए। उन्होंने स्थापना का कार्य आरंभ कर दिया। इस पावन कार्य के लिए उन्होंने जयपुर के नाहरगढ़ की पहाड़ियों को चुना। महाराज जय सिंह ने अश्वमेघ यज्ञ करवाकर गणेश जी के बाल स्वरूप के इस अनोखे मंदिर की धूमधाम से स्थापना करवायी। चारों तरफ राजा की जय जयकार होने लगी।

इस मंदिर में गणेश जी दो भागों में हैं पहला भाग आंकड़े की जड़ और दूसरा अश्वमेघ यज्ञ की भस्म से निर्मित है। महाराज जय सिंह भगवान गणेश के परम भक्त थे। उन्होंने भगवान गणेश जी के मंदिर की स्थापना ऐसी जगह करवायी। जिसको वह दूरबीन द्वारा अपने महल से रोज देख सकें। वह नित्य सुबह महल से नाहरगढ़ की पहाड़ियों में स्थित इस अनोखे भगवान गणेश जी की प्रतिमा के दर्शन करते थे।

उसके बाद ही अपने दैनिक कार्यों में संलग्न होते थे। देखते ही देखते उनके राज्य में हर ओर खुशहाली छा गई। संपूर्ण क्षेत्र भगवान गणेश के आशीर्वाद से धन्य हो गया। प्रजा के हर संकट को भगवान गणेश चुटकियों में दूर कर देते थे। आज भी यह मंदिर भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करने का धाम है।

मन्दिर का विचित्र रहस्य

इस मंदिर की एक और अनोखी बात है। यदि आपको यहाँ अपनी मनोकामना पूर्ण करानी है, तो उस मनोकामना को आपको गणेश जी के वाहन अर्थात पत्थर के बने मूषक से अपनी बात उसके कान में कहनी होगी। ऐसी मान्यता है कि जो भी आप अपनी मनोकामना गणेश जी के वाहन अर्थात यहाँ चूहों की मूर्तियों के कान में कहते हैं उस बात को वे चूहे उन्हें भगवान गणेश तक पहुंचा देते हैं और आपकी मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं।

यहां बिना सूंड़ वाले इन भगवान गणेश जी की प्रतिमा की फोटोग्राफी करने की सख्त मनाही है। इस प्रतिबंध के पीछे उद्देश्य यही है कि यदि आपको भगवान गणेश के इस अनोखे बाल स्वरूप के दर्शन करने हैं तो आपको खुद चलकर नाहरगढ़ की पहाड़ियों में आना होगा। यहां बिना सूंड़ वाले भगवान गणेश के दर्शन के बाद आपकी हर मनोकामना पूर्ण हो जायेगी।

लोग बताते हैं कि एक बार एक व्यक्ति चुपके से मंदिर की फोटो खींचने का प्रयास करने लगा तो अचानक उसे लगा कि किसी ने उसके हाथ पर तेजी से चोट की। उस तेज चोट के कारण वह दर्द से बिलबिला गया। उसका वह कैमरा हाथ से गिरकर चकनाचूर हो गया।