कोलकाता, पश्चिम बंगाल की रहस्यमय घटना

कोलकाता, पश्चिम बंगाल की रहस्यमय घटना

पौराणिक मान्यताओं के अनुसारअब तक सभी लोग यही अनुमान लगाते हैं कि मनुष्य की मृत्यु के कुछ पल पूर्व ही यमराज या उनके दूत धरती पर रहने वाले जीवों के प्राण हरने आते हैं। लेकिन अपने ही देश के पश्चिम बंगाल राज्य के कोलकाता शहर में एक ऐसी घटना घटी ,जो अत्यंत रहस्यमय थी। वह अजीबोगरीब घटना के अनुसार यमराज प्राण लेने के दस दिन पूर्व ही घर में आकर रहने लगे।

यमराज द्वारा दस दिन पहले प्राण लेने के लिए किसी घर में रुकना किसी आश्चर्य जनक रहस्यमय घटना से कम न था। लेकिन बाद में जब यमराज के प्राण हरने के दस दिन पूर्व ही घर में ठहरने के रहस्य का पता लगा तो सभी लोग अवाक रह गये।

यह यमराज वाली रहस्यमय घटना कोलकाता शहर के सुदर्शन कॉलोनी की है। इस कॉलोनी में रञ्जन मुखर्जी (गोपनीयता की वजह से नाम बदल दिया गया है) नाम के एक देवी भक्त व्यक्ति रहते थे। उनकी उम्र लगभग 92 वर्ष की थी। अचानक कुछ दिन से रञ्जन मुखर्जी बहुत बीमार हो गये। डॉक्टरों ने बताया कि अब उनके इस धरती पर जीवन के कुछ ही समय शेष है।

पहले रञ्जन मुखर्जी को अस्पताल में एडमिट किया गया। लेकिन फिर अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके घर वालों को सलाह दी कि कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते घर पर ही उनकी दवा-सेवा कीजिए। रञ्जन मुखर्जी की तबीयत दिन पर दिन खराब होती चली गयी। यहाँ तक की उन्होंने बोलना-चालना भी बंद कर दिया।

अब वह अपने मुँह से बहुत कुछ बोलना चाहते थे। लेकिन मुँह से आवाज ही नहीं निकलती थी। धीरे -धीरेअब उनका बिस्तर से उठ पाना भी मुश्किल हो गया। सुदर्शन कॉलोनी के निवासी रञ्जन मुखर्जी की तबीयत खराब होती चली जा रही थी। डॉक्टर पहले ही बता चुके थे कि रञ्जन मुखर्जी कुछ ही दिनों के मेहमान हैं।

लेकिन इस बीच एक अजीबोगरीब घटना घटी। जिससे इस बात का आभास हुआ कि प्राणों को हरने वाले यमराज ने रञ्जन मुखर्जी के घर में डेरा डाल दिया है। हुआ यह की अपनी पत्नी से बेहद प्यार करने वाले रञ्जन मुखर्जी मृत्यु से कुछ समय पूर्व अपनी पत्नी से बुरी तरह डरने लगे। जब भी उनकी पत्नी उनके कमरे में घुसतीं तो अब तक सीधे-साधे लेटे हुये रञ्जन मुखर्जी डरकर बुरी तरह कांपने लगते।

वह कुछ बोलने की कोशिश करते, लेकिन पैरालेसिस के वजह से उनकी जबान साथ नहीं देती थी। हाथ से इशारा करते हुये कहते कि मेरी वाइफ को मेरे कमरे से भगाओ। आश्चर्य का विषय था प्रकृति का वह रहस्य, जिसके कारण रञ्जन मुखर्जी की आवाज इसलिए बंद हो गयी ताकि वह वह अपने सामने खड़ी मौत का राज किसी के सामने खोल न सकें।

रञ्जन मुखर्जी की अजीब विवशता थी। वह सामने यमराज को देख रहे थे लेकिन जुबान चली जाने के कारण बोलने में असमर्थ थे। आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि मृत्यु के स्वामी यमराज रञ्जन मुखर्जी की पत्नी पर सवार होकर रञ्जन मुखर्जी के घर पर रहने लगे थे, जिसका किसी को पता नहीं था।

इसीलिए तो रञ्जन मुखर्जी जब भी अपनी वाइफ को देखते तो डरकर कांपने लगते और गुस्सा होकर उन्हें कमरे से निकल जाने के लिए कहते तो परिवार के लोग यमराज वाली बात से अनजान होने की वजह से हैरान हो जाते। अब रञ्जन मुखर्जी के घर में रञ्जन मुखर्जी के परिवार के लोग आश्चर्य चकित थे कि अचानक इनको क्या हो गया है।

अपने वाइफ को बेहद चाहने वाले रञ्जन मुखर्जी अचानक कैसे बदल गये हैं। लेकिन बात कुछ और थी दरअसल रञ्जन मुखर्जी की वाइफ के ऊपर यमराज सवार हो गये थे। जिस बात का रहस्य बाद में खुला। अपनी मौत से दस दिन पहले से ही डरने वाले रञ्जन मुखर्जी को यमराज नजर आने लगे थे।

रञ्जन मुखर्जी के परिवार के लोगों ने उनकी पत्नी का उस कमरे में प्रवेश मना कर दिया था जिस कमरे में रञ्जन मुखर्जी लेटे थे। क्योंकि उनके कमरे में जाते ही रञ्जन मुखर्जी अजीबोगरीब व्यवहार करने लगते थे। वह अपने बेड से उठकर भाग जाने को तैयार हो जाते थे ।

दरअसल उन्हें अपनी मौत, मृत्यु से दस दिनों पूर्व ही नजर आने लगी थी। जिससे बचने के लिए वह कहीं और भाग जाना चाहते थे। लेकिन बीमारी के कारण भागने में असमर्थ थे। फिर इंसान मौत से डरकर भाग कर जायेगा कहाँ? पाताल लोक से भी यमराज उसे ढूंढ़ निकालेंगे।

एक दिन वही हुआ जो होना था। रञ्जन मुखर्जी की वाइफ को उनके परिवार वालों ने उनके कमरे में जाने से मना कर दिया गया था। वह अब अपने हसबैंड रञ्जन मुखर्जी के कमरे में नहीं जातीं थीं। लेकिन रञ्जन मुखर्जी के मौत के दिन जो कुछ हुआ वह बहुत रहस्यमय था।

मुखर्जी परिवार की सबसे छोटी बेटी ने देखा कि रञ्जन मुखर्जी की पत्नी रात के दो बजे के करीब अचानक नींद से उठीं और रञ्जन मुखर्जी के कमरे में तेजी से पहुँच गयीं और लगभग एक दो सेकेंड वहाँ रुकने के बाद वापस अपने कमरे में आकर सो गयीं। दरअसल रञ्जन मुखर्जी के ऊपर यमराज अपना काम कर चुके थे।

रञ्जन मुखर्जी के प्राण पखेरू उड़ गये थे। बाद में परिवार वालों ने जो कुछ बताया वह और भी अधिक रहस्यमय था। मुखर्जी परिवार के बच्चों ने बताया कि उनकी माँ के स्वभाव में पिछले दस दिनों में अजीबोगरीब परिवर्तन आ गया था। वह अकेले ही हाथ उठाकर बातें करतीं हुईं नजर आतीं थीं। जैसे उनका संपर्क किसी अदृश्य शक्ति से हो रहा हो।

सभी जानते हैं कि मछली बंगालियों का प्रिय भोजन है़। इसलिए रञ्जन मुखर्जी का पूरा परिवार बड़ी रुचि से मछली खाता था। लेकिन रञ्जन मुखर्जी के मौत के दस दिन पहले ही रञ्जन मुखर्जी की वाइफ ने मछली खाना छोड़ दिया था। क्योंकि उन पर यमराज जो सवार हो गये थे। रञ्जन मुखर्जी की मौत के बाद उनकी वाइफ का बदला हुआ व्यवहार फिर पहले जैसा हो गया था।

अब वह किसी अदृश्य शक्ति से बातें करती हुईं नहीं नजर आती थीं। जिस रात वह नींद से उठकर अचानक अपने हसबैंड मिस्टर रञ्जन मुखर्जी के कमरे में गयीं, वह भी उन्हें याद नहीं था। लेकिन अब सबके मन में यही सवाल उठ रहा था कि आखिर रञ्जन मुखर्जी के प्राणों को लेने स्वयं यमराज ही क्यों आये, कोई यमदूत (मृत्यु के ठीक पहले) क्यों नहीं आया ? और मौत के दस दिन पहले से ही यमराज उनके घर में क्यों डट गये थे। उसके पीछे उनकी क्या मंशा थी।

यमराज रञ्जन मुखर्जी के घर में दस दिन पहले से रुककर क्या करने आये थे?  इसके बारे में कुछ स्थानीय विद्वानों का मानना है़ कि रञ्जन मुखर्जी दुर्गा देवी के परम भक्त थे। वे रोज सुबह-शाम माँ दुर्गा जी की स्तुति करते थे। ऐसे में उनके घर में देवी का वास हो गया था। देवी माँ की अनुकम्पा से ही रञ्जन मुखर्जी पर दैवीय कृपा हो गयी थी। सच जो भी था लेकिन था रहस्यमय, जिसको कोई जान न पाया।