उस मंदिर में शरण लिये हुए निःसहायों की महादेव स्वयं रक्षा करते है

उस मंदिर में शरण लिये हुए निःसहायों की महादेव स्वयं रक्षा करते हैयह मंदिर अपने आप में अनोखा है। प्राचीन काल से ही यह मंदिर असहायों को शरण देने के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ जो भी इस मंदिर की शरण में आता है तो उसे इस मंदिर के देवता अपना संरक्षण प्रदान करते हैं और उसका बाल भी बांका नहीं होने देते। अपने भक्तों की रक्षा के लिये इस मंदिर के भगवान तरह-तरह चमत्कार करते हैं।

जो एक बार तो सुनने में अविश्वसनीय लगता हैं लेकिन इस मंदिर के प्रांगण में आते हीं उन चमत्कारों के सबूत हमें सच की तस्वीर दिखाते हैं। ऐसी रहस्यमय अनगिनत घटनायें इस स्थान पर आकर पता चलती हैं, जैसे प्रेमी-प्रेमिका के जोड़े इस मंदिर में आकर छिप गए, क्योंकि उनके प्यार के दुश्मन लोग उन्हें जान से मार डालने के लिए उनका पीछा कर रहे थे।

लेकिन इस मंदिर का चमत्कार देखिये। यहाँ आने के बाद उन प्रेमी युगलों का कोई अहित नहीं कर सका। क्योंकि यह अद्भुत और चमत्कारी मंदिर की महिमा उनकी रक्षा के लिये ढाल बन कर खड़ी हो गयी।

यह अनोखा मंदिर हिमाँचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित है। यहाँ एक गांव है शांघड़, जहाँ के देवता हैं शंगचुल महादेव। जिनका इस पूरे क्षेत्र मैं चमत्कारी प्रभाव है, यह पूरे 100 बीघे के क्षेत्र में बसा हुआ है।

इस गांव के देवता शंगचुल महादेव के बारे में यह बात प्रसिद्ध है कि यदि कोई भी प्रेमी युगल, जिनके प्यार की राह में खतरा उत्पन्न हो गया हो, लोग उनके प्यार के दुश्मन बन गये हो और उनकी जान के पीछे पड़े हों तो यदि अपनी जान बचाने के लिए वे लोग शंगचुल महादेव के शरण में आते हैं तो इस मंदिर के देवता उनकी रक्षा करते है।

मंदिर की कहानी पूरी तरह फिल्मी लगती है। जिसमें खुद भगवान महादेव बाहुबली की भूमिका में नज़र आते हैं। शंगचुल महादेव के चमत्कार के तमाम किस्से यहाँ के लोग सुनाते हैं जिसमें इस मंदिर के भगवान ने किस प्रकार दो प्यार करने वाले प्रेमी युगल की जान बचायी। ऐसी तमाम घटनाओं का जिक्र करते हुये यहाँ के लोग थकते नहीं हैं।

वे ऐसी ही एक अनोखी कहानी सुनाते हैं कि एक बार पठानकोट से एक प्रेमी-प्रेमिका का जोड़ा शंगचुल महादेव के पास अपनी जान बचाने के लिए आया। क्योंकि उनके घर वाले उनके प्यार के विरुध्द थे। वे उनकी जान के दुश्मन बन गये थे।

घर वालों ने ही उन दोनों को मार डालने के लिये गुंडे पीछे लगा दिये थे। जब उन गुंडों को यह पता चला कि जिन युवक-युवती की उन्हें तलाश है, वे यहाँ कुल्लू में शंगचुल महादेव के मंदिर में छिपे हैं। तो आठ-दस लोग जिनके हाथों में लाठी-बंदूकें थीं, इस स्थान पर आ गये।

वे सभी उन दोनों प्रेमी जोड़ों को जान से मार देना चाहते थे। उन गुंडों ने जैसे ही शंगचुल महादेव की सीमा में प्रवेश करना चाहा कि एक चमत्कार हुआ। उन प्रेमी जोड़े को मौत के घाट उतारने आये लोगों की तबीयत अचानक खराब होने लगी। किसी के पेट में भयंकर दर्द, तो किसी को भारी चक्कर तो किसी को खून की उल्टियाँ आने लगीं। वे सभी डर गये कि अभी तक तो सब ठीक-ठाक था। लेकिन यहाँ आकर उन्हें यह क्या हो गया?

जब उन्हें इस गाँव के शंगचुल महादेव की महिमा के बारे में पता चला तो वे और भय से काँपने लगे और अपनी जान बचाकर भाग निकले। उन्हें समझ में आ गया था कि यदि इस गांव के देवता की टेढ़ी नजर उन पर पड़ गयी तो उन्हें जान से हाथ धोना पड़ सकता है। स्थानीय लोग बताते है कि न जाने ऐसे कितने चमत्कार इस मंदिर में हुये हैं जिसमें खुद शंगचुल महादेव कोई रूप धारण कर शरणागत की रक्षा के लिये मंदिर से बाहर आ गये।

शंगचुल महादेव मंदिर का शरण देने का इतिहास बहुत पुराना है। ऐसी मान्यता है कि पांडव अज्ञातवास के समय हिमाँचल प्रदेश के इसी मंदिर में आकर छिपे थे। उनका पीछा करते हुए कौरव भी वहाँ आ गये।

लेकिन शंगचुल महादेव ने उन्हें रोक दिया और उन्होंने कौरवों से कहा कि पांडव इस समय मेरी शरण में है और मेरे पास आये शरणागत की मैं रक्षा करता हूँ। जो कोई भी उनका अहित करना चाहेगा उसका सर्वनाश हो जाएगा। महादेव के शाप से बचने के लिए कौरवों ने वहाँ से चले जाने में यह अपनी भलाई समझी।

कुल्लू के इस गांव में पाण्डवों के समय की बहुत सी ऐतिहासिक धरोहर हैं जो देखने योग्य हैं। इस शंगचुल महादेव के क्षेत्र में लड़ाई-झगड़े की बात कौन कहे, यहाँ ऊंची आवाज में बात करना भी मना है। यहाँ ऐसी मान्यता है कि यदि इस शांघड़ गांव में कोई ऊंची आवाज बात करता है तो यहाँ के देवता नाराज हो जाते हैं, क्योंकि वे शांतिप्रिय हैं।

इस स्थान पर हथियार ले जाना भी वर्जित है यहां नशा करने की सख्त मनाही है। पहाड़ों की खूबसूरत वादियों से घिरा यह मंदिर बहुत सुंदर है। जो कोई भी इस शरण देने वाले मंदिर की बात सुनता है तो आश्चर्यचकित रह जाता है। यहाँ शरण में आए निःसहायों के खाने-पीने और रहने की पूरी व्यवस्था है। इस मंदिर की शरण में आने वाले हर व्यक्ति को इस गाँव के देवता शंगचुल महादेव का मेहमान माना जाता है।

यहाँ के स्थानीय निवासियों का मानना है कि मंदिर के देवता के मेहमान अर्थात शरण में आये व्यक्ति को प्रसन्न करके हम शंगचुल महादेव को प्रसन्न कर सकते हैं। यह देश के उन अनोखे मंदिरों में से एक है जहाँ पुलिस का प्रवेश वर्जित है, क्योंकि गलत इरादे से आये व्यक्ति का यहाँ के देवता स्वयं सर्वनाश कर देते हैं।